Ayodhya : भाजपा महानगर अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, दो पदों पर काबिज होने से कार्यकर्ताओं में रोष
सबसे बड़ा विवाद 'एक व्यक्ति, दो पद' के सिद्धांत को लेकर खड़ा हुआ है। कमलेश श्रीवास्तव वर्तमान में भाजपा महानगर अध्यक्ष के साथ-साथ अयोध्या विकास प्राधिकरण के सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। संगठन और प्रशा
अयोध्या की राजनीति में इन दिनों महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव चर्चा के केंद्र में हैं। उन पर संगठन के नियमों को ताक पर रखकर काम करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। हाल ही में जारी हुई नामित पार्षदों की सूची ने इस विवाद को और हवा दे दी है। आरोप है कि इस सूची को तैयार करने में पार्टी के उन नियमों की अनदेखी की गई जो सक्रिय सदस्यता और संगठन की बैठकों में अनिवार्य भागीदारी की बात करते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के समर्पित लोगों के बजाय केवल आपसी संबंधों के आधार पर चहेतों को वीआईपी एंट्री देकर पार्षद बना दिया गया।
सबसे बड़ा विवाद 'एक व्यक्ति, दो पद' के सिद्धांत को लेकर खड़ा हुआ है। कमलेश श्रीवास्तव वर्तमान में भाजपा महानगर अध्यक्ष के साथ-साथ अयोध्या विकास प्राधिकरण के सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। संगठन और प्रशासन दोनों ही महत्वपूर्ण जगहों पर एक ही व्यक्ति के काबिज होने से जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के अंदरखाने यह चर्चा जोरों पर है कि नामित पार्षदों की सूची किसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय बंद कमरे में अध्यक्ष और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी सहमति से तय की गई है।
इन आरोपों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा कथित 'लेन-देन' को लेकर हो रही है, हालांकि इस पर अभी कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम पर महानगर अध्यक्ष की चुप्पी ने विवाद को और बढ़ा दिया है। संपर्क करने की कोशिशों के बावजूद उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अब सभी की निगाहें भाजपा के प्रदेश नेतृत्व पर टिकी हैं कि क्या इस 'डबल पद मॉडल' पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा या स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी।
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