Politics News: चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) का मुस्लिम और दलितों पर ट्रम्प कार्ड, हिन्दुओं को निशाना बनाकर विवादित बयान देकर गैर हिन्दुओं को लुभाने में लगे।
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने एक बयान में मुस्लिम समुदाय....
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने एक बयान में मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, "लड़ाई लंबी है, हमको लड़ना सीखना होगा, क्यों बार-बार ठगे जा रहे हो मियां? कह रहा हूं बार-बार मत ठगे जाओ मुस्लिम भाइयों, मेरे साथ आ जाओ।" यह बयान, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तेजी से वायरल हुआ, ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कीं। चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad), जो भीम आर्मी के संस्थापक भी हैं, ने अपने इस बयान में वक्फ संपत्तियों के मुद्दे को उठाया और मुस्लिम समुदाय को एकजुट होकर उनके साथ आने की अपील की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर देश में तीव्र बहस चल रही है।
- बयान का संदर्भ- वक्फ संशोधन विधेयक और सामाजिक ध्रुवीकरण
चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) का यह बयान वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के आसपास चल रही बहस से निकटता से जुड़ा है। यह विधेयक, जिसे केंद्र सरकार ने अगस्त 2024 में संसद में पेश किया, वक्फ बोर्डों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का दावा करता है। हालांकि, विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इसे वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने और धार्मिक स्वायत्तता को कमजोर करने का प्रयास बताया है। विधेयक में गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने, संपत्तियों के पंजीकरण की अनिवार्यता, और कलेक्टरों को वक्फ संपत्तियों की जांच का अधिकार देने जैसे प्रावधानों पर तीखा विरोध हुआ है।
चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad), जो उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से 2024 में भारी मतों से विजयी हुए, ने इस मुद्दे को मुस्लिम समुदाय के साथ दलित और अन्य कमजोर वर्गों की एकता से जोड़ा। उनके बयान में "बार-बार ठगे जा रहे हो" और "मेरे साथ आ जाओ" जैसे वाक्यांशों ने उनके इरादे को स्पष्ट किया कि वह मुस्लिम समुदाय को एक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक गठजोड़ का हिस्सा बनाना चाहते हैं। नगीना सीट, जहां लगभग 46% मुस्लिम और 21% दलित मतदाता हैं, उनके लिए इस गठजोड़ का प्राकृतिक आधार रही है।
चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad), जिन्हें चंद्रशेखर रावण के नाम से भी जाना जाता है, ने 2014 में भीम आर्मी की स्थापना के बाद से दलितों और अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों के लिए आंदोलन चलाया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में नगीना सीट से उनकी जीत, जहां उन्होंने एक लाख 51,000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक उभरते हुए दलित नेता के रूप में स्थापित किया। उनकी पार्टी, आजाद समाज पार्टी, ने दलित-मुस्लिम एकता को अपनी रणनीति का केंद्र बनाया है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां ये समुदाय मतदाता आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
चंद्रशेखर का यह बयान उनकी इस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह दलित-मुस्लिम गठजोड़ को और मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने पहले भी कहा है कि वह न तो वामपंथी हैं और न ही दक्षिणपंथी, बल्कि बहुजन विचारधारा के समर्थक हैं। उनके इस बयान को वक्फ विधेयक के विरोध के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
- राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
चंद्रशेखर के बयान ने विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं प्राप्त कीं।
अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी): समाजवादी पार्टी, जो उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा आधार रखती है, ने चंद्रशेखर के बयान पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि, पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह बयान इंडिया गठबंधन की एकता को कमजोर कर सकता है, क्योंकि यह मुस्लिम मतदाताओं को एक नई दिशा में ले जाने की कोशिश है।
असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM): AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चंद्रशेखर के बयान का समर्थन करते हुए कहा, "वक्फ संपत्तियों पर हमला मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वायत्तता पर हमला है। चंद्रशेखर का यह बयान स्वागत योग्य है।" हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय को अपने हितों के लिए एकजुट होकर सभी दलों के साथ काम करना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी (BJP): बीजेपी ने चंद्रशेखर के बयान को "सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश" करार दिया। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "वक्फ विधेयक पारदर्शिता के लिए है, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाने के लिए। ऐसे बयान समाज में तनाव पैदा करते हैं।"
मायावती (बसपा): बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने चंद्रशेखर के बयान पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, "कुछ लोग दलितों और मुस्लिमों के नाम पर अपनी राजनीतिक दुकान चमकाने की कोशिश कर रहे हैं।" मायावती और चंद्रशेखर के बीच पहले से ही तनाव रहा है, खासकर 2024 के चुनावों में नगीना सीट पर उनकी प्रतिस्पर्धा के बाद।
मुस्लिम संगठनों ने भी चंद्रशेखर के बयान पर अलग-अलग रुख अपनाया। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वक्फ विधेयक के खिलाफ एकजुटता जरूरी है। हालांकि, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने चंद्रशेखर के बयान को "राजनीति से प्रेरित" बताया और कहा कि मुस्लिम समुदाय को अपनी लड़ाई स्वतंत्र रूप से लड़नी चाहिए।
दलित संगठनों में भी इस बयान को लेकर मतभेद देखे गए। कुछ संगठनों ने इसे दलित-मुस्लिम एकता की दिशा में सकारात्मक कदम बताया, जबकि अन्य ने इसे दलित मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश माना।
चंद्रशेखर का बयान X पर तेजी से वायरल हुआ, जहां #ChandraShekharAazad और #BhimArmy जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई यूजर्स ने उनके बयान को "मुस्लिम समुदाय के लिए एक नई उम्मीद" बताया, जबकि कुछ ने इसे "वोट बैंक की राजनीति" करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "चंद्रशेखर सही कह रहे हैं, मुस्लिम और दलित एक साथ आएं तो कोई ताकत हमें नहीं रोक सकती।" वहीं, एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, "यह सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाला बयान है।"
चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) का यह बयान कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। पहला, यह उनकी राजनीतिक रणनीति को दर्शाता है, जिसमें वह दलित-मुस्लिम एकता को एक मजबूत मतदाता आधार के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य, जहां मुस्लिम और दलित मतदाता मिलकर 60-70% वोट शेयर बनाते हैं, उनके लिए यह रणनीति प्रभावी हो सकती है।
दूसरा, यह बयान वक्फ संशोधन विधेयक के आसपास चल रही बहस को और गर्म करने वाला है। विधेयक को लेकर पहले से ही विपक्षी दल, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी, AIMIM, और कांग्रेस, केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। चंद्रशेखर का बयान इस विरोध को एक नया आयाम दे सकता है, खासकर तब जब वह इसे दलित-मुस्लिम एकता से जोड़ रहे हैं।
तीसरा, बयान में "मियां" और "बार-बार ठगे जा रहे हो" जैसे शब्दों का इस्तेमाल विवादास्पद रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ये शब्द मुस्लिम समुदाय को अपमानित करने वाले हो सकते हैं, जबकि चंद्रशेखर के समर्थकों का कहना है कि यह उनके सीधे और स्पष्टवादी अंदाज का हिस्सा है।
चंद्रशेखर के बयान ने सामाजिक तनाव को बढ़ाने की आशंका पैदा की है, खासकर तब जब देश पहले से ही वक्फ विधेयक और धार्मिक मुद्दों पर बंटा हुआ है। बीजेपी ने इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास बताया है, और कुछ संगठनों ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करने की बात कही है। हालांकि, अभी तक कोई औपचारिक कानूनी कार्रवाई की खबर नहीं है।
सामाजिक रूप से, यह बयान दलित-मुस्लिम एकता को मजबूत करने की दिशा में एक कदम हो सकता है, लेकिन यह अन्य समुदायों, खासकर सवर्ण और ओबीसी मतदाताओं, को उनसे दूर भी कर सकता है। नगीना जैसे क्षेत्रों में, जहां मुस्लिम और दलित मतदाता निर्णायक हैं, यह रणनीति प्रभावी हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसकी सफलता संदिग्ध है।
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