Trending News: शर्मिष्ठा पनोली (Sharmishtha Panoli) की गिरफ्तारी के बाद से राजनैतिक चर्चाओं का बाजार गर्म,  ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित वीडियो से उपजा सियासी और सामाजिक तूफान।

22 वर्षीय पुणे की लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली (Sharmishtha Panoli) को 30 मई 2025 को कोलकाता पुलिस ने हरियाणा...

Jun 2, 2025 - 13:44
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Trending News: शर्मिष्ठा पनोली (Sharmishtha Panoli) की गिरफ्तारी के बाद से राजनैतिक चर्चाओं का बाजार गर्म,  ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित वीडियो से उपजा सियासी और सामाजिक तूफान।

22 वर्षीय पुणे की लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली (Sharmishtha Panoli) को 30 मई 2025 को कोलकाता पुलिस ने हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी उनके एक इंस्टाग्राम वीडियो के कारण हुई, जिसमें उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर बॉलीवुड सितारों की चुप्पी की आलोचना करते हुए कथित तौर पर एक धर्म विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। शर्मिष्ठा ने 14 मई 2025 को यह वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने बॉलीवुड के कुछ प्रमुख अभिनेताओं, विशेष रूप से 'तीन खानों' की ऑपरेशन सिंदूर पर चुप्पी पर सवाल उठाए।

ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाई थी, जिसमें 26 निर्दोष लोग मारे गए थे। वीडियो में शर्मिष्ठा ने कथित तौर पर अपमानजनक और सांप्रदायिक भाषा का उपयोग किया, जिसे कई यूजर्स ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना। इसके बाद, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान और अन्य ने वीडियो को साझा कर शर्मिष्ठा पर सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने का आरोप लगाया और उनकी गिरफ्तारी की मांग की।

विवाद बढ़ने पर शर्मिष्ठा ने वीडियो को डिलीट कर 15 मई 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। हालांकि, कोलकाता में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज हो चुकी थी, और पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 196(1)(ए) (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से कार्य), 352 (जानबूझकर अपमान), और 353(1)(सी) (सार्वजनिक शरारत को उकसाने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया।

पुलिस ने शर्मिष्ठा और उनके परिवार को कई बार नोटिस भेजने की कोशिश की, लेकिन जब वे उपलब्ध नहीं हुए, तो कोलकाता की एक अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। इसके बाद, कोलकाता पुलिस ने 30 मई 2025 को गुरुग्राम से शर्मिष्ठा को गिरफ्तार किया और ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले गई। 31 मई को उन्हें कोलकाता के अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें 13 जून 2025 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं उकसाईं, जिससे मामला और गरमा गया।

कंगना रनौत (बॉलीवुड अभिनेत्री और बीजेपी सांसद): कंगना ने शर्मिष्ठा के समर्थन में इंस्टाग्राम स्टोरी पोस्ट कर उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने लिखा, "मैं सहमत हूं कि शर्मिष्ठा ने कुछ अनुचित शब्दों का इस्तेमाल किया, लेकिन ऐसे शब्द आजकल युवा सामान्य रूप से इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने माफी मांग ली है, और यह पर्याप्त होना चाहिए। उन्हें और परेशान करने की जरूरत नहीं।" कंगना ने पश्चिम बंगाल सरकार पर 'उत्तर कोरिया' जैसा माहौल बनाने का आरोप लगाया और कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।

पवन कल्याण (आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता): पवन कल्याण ने भी शर्मिष्ठा का समर्थन करते हुए पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की आलोचना की। उन्होंने ममता के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा, "सेकुलरिज्म दोनों तरफ से होना चाहिए। जब हिंदू धर्म को 'गंध धर्म' कहा जाता है, तो वह गुस्सा कहां जाता है? शर्मिष्ठा के साथ अन्याय हुआ है।" उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।

अमित मालवीय (बीजेपी आईटी सेल प्रमुख): मालवीय ने ममता बनर्जी सरकार पर 'वोट बैंक की राजनीति' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "शर्मिष्ठा ने वीडियो डिलीट कर माफी मांग ली थी, फिर भी उन्हें 14 दिनों की हिरासत में भेजा गया। ममता बनर्जी ने कई बार विभाजनकारी बयान दिए, लेकिन उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं?"

शुभेंदु अधिकारी (पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता): अधिकारी ने इसे 'तुष्टिकरण की राजनीति' का उदाहरण बताया और ममता सरकार की तुलना अन्य मामलों से करते हुए कहा, "महुआ मोइत्रा ने मां काली पर अपमानजनक टिप्पणी की थी, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।"
वारिस पठान (AIMIM राष्ट्रीय प्रवक्ता): पठान ने शर्मिष्ठा के वीडियो को सांप्रदायिक और इस्लाम का अपमान करने वाला बताया। उन्होंने X पर वीडियो साझा कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी, जिसके बाद यह मामला और तूल पकड़ गया।

असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM प्रमुख): ओवैसी ने शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी का समर्थन करते हुए कहा, "रसूल अल्लाह की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं होगी।" उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से भी इस मामले में कार्रवाई की अपील की थी।
अबू आजमी (समाजवादी पार्टी नेता): आजमी ने शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मनन मिश्रा (बार काउंसिल ऑफ इंडिया अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद): मिश्रा ने शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा, "तत्काल माफी के बावजूद उनकी गिरफ्तारी शर्मनाक है। हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।" उन्होंने निष्पक्ष ट्रायल और तत्काल रिहाई की मांग की।
गीर्ट वाइल्डर्स (डच नेता): डच राजनेता गीर्ट वाइल्डर्स ने भी शर्मिष्ठा के समर्थन में आवाज उठाई और पीएम मोदी से उनकी रिहाई के लिए अपील की।

बॉलीवुड की प्रतिक्रियाएं

बॉलीवुड से केवल कंगना रनौत ने इस मामले में खुलकर प्रतिक्रिया दी। अन्य प्रमुख बॉलीवुड हस्तियों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, जिसे कुछ यूजर्स ने शर्मिष्ठा के मूल वीडियो में उठाए गए सवालों से जोड़ा। शर्मिष्ठा ने अपने वीडियो में बॉलीवुड सितारों, खासकर 'तीन खानों' (शाहरुख खान, सलमान खान, और आमिर खान) की ऑपरेशन सिंदूर पर चुप्पी की आलोचना की थी। हालांकि, इन अभिनेताओं ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर #ReleaseSharmistha और #IStandwithSharmishta जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई यूजर्स ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया, जबकि अन्य ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए उनकी आलोचना की। कुछ यूजर्स ने इसे 'चुनिंदा सेंसरशिप' करार दिया, जबकि अन्य ने कानून के तहत कार्रवाई को उचित ठहराया। सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सुनैना होले ने दावा किया कि कोलकाता पुलिस के पास गिरफ्तारी के लिए उचित दस्तावेज नहीं थे, लेकिन पुलिस ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

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कोलकाता पुलिस का बयान

कोलकाता पुलिस ने 1 जून 2025 को X पर एक बयान जारी कर कहा कि शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी देशभक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि धार्मिक समुदायों के बीच नफरत फैलाने वाली सामग्री साझा करने के लिए की गई। पुलिस ने दावा किया कि शर्मिष्ठा को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन वह फरार रही, जिसके बाद कोर्ट से वारंट लिया गया। यह मामला अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक संवेदनशीलता, और राजनीतिक तुष्टिकरण जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस का केंद्र बन गया है। शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी ने हिंदू-मुस्लिम विभाजन को और गहरा करने की आशंका पैदा की है, जैसा कि सोशल मीडिया पर यूजर्स के दो गुटों में बंटने से स्पष्ट है।

कई विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला भारत में सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की सीमाओं और कानूनी जवाबदेही के बीच टकराव को उजागर करता है। कुछ लोग इसे पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की 'वोट बैंक पॉलिटिक्स' से जोड़ रहे हैं, जबकि अन्य इसे कानून का सामान्य पालन मानते हैं। शर्मिष्ठा पनोली (Sharmishtha Panoli) की गिरफ्तारी ने न केवल सोशल मीडिया, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ कंगना रनौत, पवन कल्याण, और बीजेपी नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया, वहीं AIMIM और अन्य ने इसे धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए जरूरी कदम करार दिया।

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