Viral News : हज 2025- सऊदी अरब ने बिना परमिट मुस्लिमों के मक्का प्रवेश पर लगाई रोक, 2.69 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को रोका।
सऊदी अरब ने हज 2025 के लिए मक्का में प्रवेश को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं, जिसके तहत बिना वैध हज परमिट के 2,69,678 तीर्थयात्रियों को...
सऊदी अरब ने हज 2025 के लिए मक्का में प्रवेश को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं, जिसके तहत बिना वैध हज परमिट के 2,69,678 तीर्थयात्रियों को पवित्र शहर में प्रवेश करने से रोका गया है। यह जानकारी सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) और अन्य विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर 1 जून 2025 को सामने आई। सऊदी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य हज के दौरान भीड़भाड़ को नियंत्रित करना, तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और इस धार्मिक आयोजन की पवित्रता को बनाए रखना है। यह कदम पिछले साल हज के दौरान गर्मी से संबंधित घटनाओं में सैकड़ों तीर्थयात्रियों की मौत के बाद उठाया गया है, जिसमें बिना परमिट के आए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या शामिल थी।
- हज 2025 के लिए नए नियम और प्रतिबंध
सऊदी अरब ने हज 2025 के लिए कई नए नियम और प्रतिबंध लागू किए हैं, जो 4 जून से 9 जून 2025 तक होने वाले इस वार्षिक तीर्थयात्रा के आयोजन को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना है। प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:
मक्का प्रवेश के लिए परमिट अनिवार्य: 23 अप्रैल 2025 से, मक्का में प्रवेश के लिए सभी निवासियों और तीर्थयात्रियों को वैध परमिट की आवश्यकता है। केवल वे लोग प्रवेश कर सकते हैं, जिनके पास मक्का में जारी निवास परमिट (इकामा), पवित्र स्थलों पर काम करने का वैध परमिट, या आधिकारिक हज परमिट है।
उमरा तीर्थयात्रियों के लिए समय सीमा: उमरा वीजा धारकों के लिए सऊदी अरब में प्रवेश की अंतिम तिथि 13 अप्रैल 2025 थी, और उन्हें 29 अप्रैल 2025 तक देश छोड़ना अनिवार्य था। इसके बाद, केवल हज वीजा धारकों को ही मक्का में प्रवेश या ठहरने की अनुमति है।
उमरा परमिट का निलंबन: 29 अप्रैल से 10 जून 2025 तक, नुसुक प्लेटफॉर्म के माध्यम से उमरा परमिट जारी करना निलंबित कर दिया गया है। यह नियम सऊदी नागरिकों, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के नागरिकों, और अन्य वीजा धारकों पर लागू होता है।
कड़े दंड: बिना परमिट मक्का में प्रवेश करने की कोशिश करने वालों पर 10,000 सऊदी रियाल (लगभग 2,667 डॉलर) का जुर्माना लगाया जा रहा है। इसके अलावा, अवैध रूप से तीर्थयात्रियों को लाने वालों के लिए छह महीने तक की जेल, 50,000 रियाल तक का जुर्माना, और वाहन जब्त करने जैसी सजा का प्रावधान है। प्रवासी उल्लंघनकर्ताओं को निर्वासन और 10 साल तक सऊदी अरब में पुन: प्रवेश पर रोक का सामना करना पड़ सकता है।
बच्चों पर प्रतिबंध: हज 2025 के दौरान 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को तीर्थयात्रा में भाग लेने की अनुमति नहीं है, ताकि भीड़ से संबंधित जोखिमों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- 2.69 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों पर कार्रवाई
सऊदी अरब के आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि 1 जून 2025 तक, हज परमिट के बिना मक्का में प्रवेश करने की कोशिश करने वाले 2,69,678 लोगों को रोका गया। यह आंकड़ा उन तीर्थयात्रियों का है, जो बिना वैध दस्तावेजों के मक्का, केंद्रीय हरम क्षेत्र, मीना, अराफात, मुजदलिफा, हरमैन ट्रेन स्टेशन, और अन्य सुरक्षा चौकियों पर पकड़े गए। सऊदी अधिकारियों ने इस कार्रवाई को हज के दौरान भीड़ प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया।
पिछले साल 2024 में, हज के दौरान अत्यधिक गर्मी के कारण 1,000 से अधिक तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी, जिनमें से कई बिना परमिट के आए थे। सऊदी सरकार का कहना है कि अनधिकृत तीर्थयात्री न केवल भीड़भाड़ बढ़ाते हैं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी अनावश्यक दबाव डालते हैं। इस साल, इन समस्याओं से बचने के लिए सऊदी अरब ने डिजिटल परमिट प्रणाली को और मजबूत किया है, जिसमें तसरीह पोर्टल, अबशर इंडिविजुअल्स, और मुकीम जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
- सऊदी अरब की डिजिटल पहल और सुरक्षा उपाय
सऊदी अरब ने हज प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग किया है। तसरीह पोर्टल के माध्यम से हज परमिट जारी किए जा रहे हैं, जो तवक्कलना ऐप के साथ एकीकृत है। यह प्रणाली वास्तविक समय में परमिट सत्यापन की सुविधा प्रदान करती है, जिससे अनधिकृत प्रवेश को रोका जा सके। इसके अलावा, मक्का के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा चौकियां स्थापित की गई हैं, जहां सख्त जांच हो रही है।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए भी नए नियम लागू किए गए हैं। हज 2025 के लिए तीर्थयात्रियों को कोविड-19, मेनिनजाइटिस, और इन्फ्लूएंजा के टीके अनिवार्य हैं। प्रवेश से पहले 72 घंटे के भीतर लिया गया नकारात्मक पीसीआर टेस्ट भी आवश्यक है। ये उपाय तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए हैं।
- विश्व स्तर पर प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
सऊदी अरब के इस कदम ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। कुछ देशों, विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान, ने इस नीति पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दी हैं। भारत को हज 2025 के लिए 1,75,025 तीर्थयात्रियों का कोटा मिला है, जिसमें से 1,22,518 हज कमेटी और 52,507 निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से हैं। सऊदी अरब ने भारत को अतिरिक्त 10,000 तीर्थयात्रियों की अनुमति दी है। हालांकि, कुछ निजी टूर ऑपरेटरों की समय सीमा पूरी न करने के कारण हजारों भारतीय तीर्थयात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पाकिस्तान को 1,79,210 तीर्थयात्रियों का कोटा मिला है, जिसमें अतिरिक्त 10,000 स्थान निजी योजनाओं के लिए हैं। हालांकि, एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासनिक खामियों के कारण लगभग 67,000 पाकिस्तानी आवेदकों को हज का अवसर खोना पड़ सकता है, जिसके लिए जांच की मांग उठ रही है।
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने तीखी बहस छेड़ दी है। कुछ यूजर्स ने सऊदी अरब के सख्त नियमों की आलोचना की, जबकि अन्य ने इसे सुरक्षा और व्यवस्था के लिए जरूरी बताया। एक X पोस्ट में दावा किया गया कि सऊदी अरब ने लाखों मुसलमानों को मक्का जाने से रोका, जिसे कुछ ने सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। हालांकि, सऊदी दूतावास ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई धार्मिक आधार पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों से की गई है।
सऊदी अरब के इस कदम की कुछ हलकों में आलोचना हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि सख्त नियम और डिजिटल परमिट प्रणाली ने उन तीर्थयात्रियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जो तकनीकी रूप से कमजोर हैं या जिनके पास संसाधनों की कमी है। विशेष रूप से, भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में निजी टूर ऑपरेटरों की लापरवाही ने कई तीर्थयात्रियों को परेशान किया है।
दूसरी ओर, सऊदी सरकार का तर्क है कि ये नियम हज को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक हैं। 2015 में मक्का में हुई भगदड़, जिसमें 700 से अधिक लोग मारे गए थे, और 2024 में गर्मी से 1,000 से अधिक मौतें, इन नियमों की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। सऊदी अरब ने यह भी स्पष्ट किया कि हज कोटा प्रणाली, जो प्रत्येक देश की मुस्लिम आबादी के आधार पर तय की जाती है, सभी को समान अवसर देने के लिए बनाई गई है।
सऊदी अरब द्वारा हज 2025 के लिए लागू किए गए सख्त नियम और 2,69,678 तीर्थयात्रियों को मक्का में प्रवेश से रोकने की कार्रवाई, इस धार्मिक आयोजन की जटिलताओं को दर्शाती है। हज, जो विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है, न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि इसे प्रबंधित करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती भी है।
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