हरदोई: सावित्रीबाई फुले की जयंती पर एसपी ने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए
एसपी ने कहा कि सावित्री बाई फुले टीचर के अलावा एक महान समाजसेवक भी थीं। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में माली जाति में 3 जनवरी 1831 को जन्मी सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं। इनके पिता का नाम ख...
By INA News Hardoi.
शुक्रवार को सावित्रीबाई फुले की जयंती पर पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने शहर के अंबेडकर पार्क में सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। एसपी ने इस बीच उनके जीवन को प्रेरणा से ओतप्रोत बताया। इससे पहले एसपी को सावित्रीबाई फुले का चित्र भेंट किया गया और एसपी ने डॉ. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण किया। ज्ञातव्य है कि देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले की आज 193 वीं जयंती मनाई जा रही है।
एसपी ने कहा कि सावित्री बाई फुले टीचर के अलावा एक महान समाजसेवक भी थीं। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में माली जाति में 3 जनवरी 1831 को जन्मी सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मी था।
सावित्रीबाई शिक्षक होने के साथ भारत के नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता, समाज सुधारक और मराठी कवयित्री भी थीं। इन्हें बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए समाज का कड़ा विरोध झेलना पड़ा था। कई बार तो ऐसा भी हुआ जब इन्हें समाज के ठेकेदारों से पत्थर भी खाने पड़े। सावित्रीबाई का विवाह बहुत ही छोटी उम्र में हो गया था।
उनका विवाह महज नौ साल की उम्र में वर्ष 1940 में ज्योतिराव फुले से हो गया। शादी के बाद वह जल्द ही अपने पति के साथ पुणे आ गईं। विवाह के समय वह पढ़ी-लिखी नहीं थीं। लेकिन पढ़ाई में उनका मन बहुत लगता था। उनके पढ़ने और सीखने की लगन से प्रभावित होकर उनके पति ने उन्हें आगे पढ़ना और लिखना सिखाया। सावित्रीबाई ने अहमदनगर और पुणे में शिक्षक बनने का प्रशिक्षण लिया और एक योग्य शिक्षिका बनीं।
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