दिल्ली में प्रदूषण की बढ़ती मार: AQI 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचने पर हाइब्रिड वर्क, कंस्ट्रक्शन वाहनों पर बैन और PUC अनिवार्य जैसे सख्त उपाय लागू।
दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक इस सप्ताह 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया, जिसके बाद कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन
दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक इस सप्ताह 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया, जिसके बाद कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान की स्टेज-4 लागू कर दी। इसके अतिरिक्त दिल्ली सरकार ने कुछ और सख्त उपायों की घोषणा की, जो 18 दिसंबर से प्रभावी हो गए। इनमें सरकारी और निजी कार्यालयों को हाइब्रिड मोड में शिफ्ट करना, कंस्ट्रक्शन सामग्री ले जाने वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध और सभी वाहनों के लिए वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट अनिवार्य करना शामिल है। ये उपाय प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों जैसे वाहनों और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों से उत्सर्जन को कम करने के लिए हैं। 13 दिसंबर से लगातार तीन दिनों तक AQI 'गंभीर' श्रेणी में रहने के बाद स्टेज-4 लागू हुई, जिसमें पहले से ही कंस्ट्रक्शन और डेमोलिशन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध, BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों पर बैन और ट्रकों के प्रवेश पर सख्ती शामिल थी। दिल्ली सरकार के नए उपाय इनके ऊपर अतिरिक्त हैं। पर्यावरण मंत्री ने घोषणा की कि पेट्रोल पंपों पर वैध PUC सर्टिफिकेट न होने पर वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह नियम 'नो PUC, नो फ्यूल' के रूप में लागू हो रहा है, जिसके लिए कई पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे भी लगाए गए हैं।
कंस्ट्रक्शन सामग्री जैसे सीमेंट, रेत और अन्य मटेरियल ले जाने वाले ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह स्टेज-4 के दौरान लागू है और आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी ऐसे वाहनों पर लागू होता है। इसके अलावा दिल्ली से बाहर रजिस्टर्ड नॉन-BS-VI वाहनों के शहर में प्रवेश पर भी प्रतिबंध है। GRAP स्टेज-3 और 4 के दौरान यह नियम सख्ती से लागू किया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें सीमाओं पर और पेट्रोल पंपों पर निगरानी कर रही हैं। कार्यालयों के लिए हाइब्रिड मोड अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें सभी सरकारी और निजी संस्थानों को कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देनी होगी। आवश्यक सेवाओं जैसे अस्पताल, अग्निशमन, स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कर्मचारियों को इससे छूट है। उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इस उपाय से सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होने और वाहन उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। PUC सर्टिफिकेट की अनिवार्यता सभी प्रकार के वाहनों पर लागू है। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए PUC की कीमत 60 रुपये, पेट्रोल चार पहिया के लिए 80 रुपये और डीजल वाहनों के लिए 100 रुपये है। यह प्रमाणपत्र अधिकृत केंद्रों पर उत्सर्जन जांच के बाद जारी होता है। बिना वैध PUC के वाहन को ईंधन नहीं मिलेगा, जिससे पुराने और अधिक प्रदूषण करने वाले वाहनों पर नियंत्रण होगा।
AQI में गिरावट के प्रमुख कारणों में शांत हवाएं, ठंड और प्रदूषकों का फैलाव न होना शामिल है। 17 दिसंबर को कुछ क्षेत्रों में AQI 400 से ऊपर रहा, जबकि शहर का औसत 'वेरी पूअर' श्रेणी में था। आनंद विहार जैसे इलाकों में AQI 416 तक पहुंच गया। इन उपायों से वाहन प्रदूषण, जो कुल प्रदूषण का बड़ा हिस्सा है, पर नियंत्रण करने का प्रयास है। कंस्ट्रक्शन गतिविधियों से प्रभावित मजदूरों के लिए दिल्ली सरकार ने 10,000 रुपये की सहायता की घोषणा की है, जो GRAP-4 लागू रहने की अवधि के लिए होगी। पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। यह सहायता उन मजदूरों को मिलेगी जो कंस्ट्रक्शन बैन से बेरोजगार हुए हैं। ये सभी उपाय दिल्ली-एनसीआर में लागू हैं और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट की देखरेख में चल रहे हैं। GRAP स्टेज-4 सबसे सख्त स्तर है, जो AQI 450 से ऊपर होने पर सक्रिय होता है, लेकिन इस बार लगातार गंभीर स्तर पर रहने से इसे लागू किया गया। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति पर निर्भर करते हुए इन उपायों में बदलाव संभव है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए इन कदमों के साथ-साथ पहले से लागू GRAP स्टेज-1, 2 और 3 के उपाय भी जारी हैं, जैसे धूल नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन पर रोक और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा। दिल्ली सरकार ने पेट्रोल पंप मालिकों से सहयोग की अपील की है, हालांकि कुछ पंप मालिकों ने नियम लागू करने में व्यावहारिक कठिनाइयों का जिक्र किया है।
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