Hardoi News: किसानों को गन्ने में लाल सड़न रोग की रोकथाम के सम्बन्ध मे दी गयी जानकारी।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया है कि गन्ना विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनपद मे कुल गन्ना का क्षेत्रफल 75975 हे० है, जिसमें...
हरदोई। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया है कि गन्ना विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनपद मे कुल गन्ना का क्षेत्रफल 75975 हे० है, जिसमें से 8526 हे0 क्षेत्रफल में लाल सड़न (रेड-राट) रोग से प्रभावित है। इस रोग के प्रारम्भिक लक्षणं जून, जुलाई माह में दिखाई पड़ने लगते हैं, जिसमें गन्ने की पौध के ऊपर से तीसरी-चौथी पत्ती सूखने लगती है और पत्तियां सूखने के बाद सीधी खड़ी रहती है तथा रोगी गन्ने को फाड़कर देखने पर गूदे का रंग लाई दिखाई देता है एवं इसके बीच में क्षैतिज धब्बे दिखाई पड़ते हैं व इससे सिरके जैसी गंध आती है।
गन्ने की फसल को संक्रमण से बचाने के लिये एमीस्टार, एजोडेजो या अजाका का 160 मिली० प्रति एकड़ की दर से 400 लीटर पानी में मिलाकर बुवाई के 40-45 दिन एवं 60-65 दिन पर दो छिड़काव करें। 20 प्रतिशत से अधिक संक्रमण ग्रस्त खेत की फसल नष्ट कर दें या प्राथमिकता पर कटाई कर तुरन्त मील में सप्लाई कर दें। उन्होंने बताया कि लाल सड़न रोग रोधी किस्मों जैसे-सी0ओ0-0118, 14201, 15023 आदि नवीन किस्मों का चयन करें साथ ही ट्राइकोडरमा लाल सड़न रोग के कवक का प्रभावी परजीवी कवक है जो उसको नष्ट कर देता है।
इसके लिए 10 किग्रा० प्रति हेक्टेयर मात्रा, 2 कुन्तल सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर 2-3 दिन छाया में रखने के बाद गन्ने की बुवाई के समय कूड़ों में अनिवार्य रूप से डालें। फसल चक्र अनिवार्य रूप से अपनायें। लाल सड़न रोग की रोकथाम के लिए आज विनीत कुमार, जिला कृषि रक्षा अधिकारी एवं पुत्तन लाल, ज्येष्ठ गन्ना अधिकारी, लोनी चीनी मिल क्षेत्र के ग्राम नगला भगवान में भ्रमण कर किसानों के बीच गन्ने में लाल सड़न रोग की रोकथाम हेतु नवीन जानकारी दी गयी। इसी तरह कृषि विभाग एवं गन्ना विभाग के संयुक्त रूप से कर्मचारियों द्वारा जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
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