विशेष लेख: वर्तमान समय में ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सव वाटिका की आवश्यकता।
बलिया के कुँवर सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सह प्राध्यापक, प्रवीण प्रताप सिंह ने एक भेंट में बताया कि कुछ वर्षों पूर्व, जब गाँवों की जनसंख्या सीमित थी
लेख:- विवेकानंद सिंह
बलिया के कुँवर सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सह प्राध्यापक, प्रवीण प्रताप सिंह ने एक भेंट में बताया कि कुछ वर्षों पूर्व, जब गाँवों की जनसंख्या सीमित थी, तब विवाह, तिलकोत्सव, यज्ञोपवित, जन्मोत्सव आदि मांगलिक कार्यक्रम घर के दुआर (द्वार) या आँगन अथवा बग़ल के मैदान, सामने की सड़क या किसी स्कूल के प्रांगण में ही सम्पन्न हो जाता था। लेकिन अब, जबकि लोगों के घर छोटे और दुआर सीमित हो गए हैं, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सव वाटिका या मैरिज हॉल एक आवश्यकता हो गई है। क्योंकि उत्सव वाटिका या मैरिज हॉल के प्रबंधक किसी मांगलिक आयोजनों के लिए एक साझा, सुव्यवस्थित और प्राकृतिक जगह उपलब्ध कराते है, जो साधारण परिवार की कई जरूरतों को किफ़ायती दर में पूरा करती है। इसके साथ ही इससे अनेक सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक लाभ हैं। देखा जाए तो यह जगह मांगलिक कार्यक्रमों, पारिवारिक आयोजनों और सामुदायिक बैठकों के लिए एक केंद्र है, क्योंकि यहाँ का हरा-भरा वातावरण गाँव के लोगों के लिए एक शांत और सुखद जगह प्रदान करता है।
एन. एच. 31 (उन्नाव से मालदा) पर बलिया जिलांतर्गत लक्ष्मणपुर चौराहे से कुछ सौ मीटर की दूरी पर गंगाघाट कथरिया मार्ग पर लबे सड़क स्थित प्रभा मंडपम् के संचालक, कैप्टन सोहन सिंह ने बताया कि उनके इस मंडपम् में
उचित पार्किंग की व्यवस्था के साथ मनमोहक लॉन उपलब्ध है, जयमाला एवं अन्य कार्यक्रम हेतु उचित स्थान, छोटे-बड़े हॉल, वातानुकूलित बड़े कमरे एवं छोटे कमरे, ऊपर-नीचे आने जाने के लिए लिफ्ट, ओपन रूफ कैटरिंग आदि की सुविधा उपलब्ध है। ग्राम पिपराकलां स्थित अन्नू बाबा फाउंडेशन के सचिव, बृजेश सिंह बघेल ने कहा कि पंचगावां, यानी चौरा, कथरिया, दौलतपुर, ईटही और पिपराकलां की कुल जनसंख्या लगभग दस हज़ार है, आज से पहले जब किसी के यहाँ विवाहादि पड़ता था, तो लोग बक्सर, फेफना या बलिया के मैरिज हॉल बुक कराते थे, जिसके चलते आने-जाने में समय के साथ ही पैसे भी खर्च होते थे, लेकिन अब क्षेत्र में प्रभा मंडपम् के शुरू होने से क्षेत्रवासियों को बहुत सुविधा हो जाएगी।
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