हर महीने रुकवाई एक जंग, अब पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद जल्द सुलझा दूंगा, डोनाल्ड ट्रंप ने हर महीने एक जंग रुकवाने का दावा किया

ट्रंप का पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद सुलझाने का वादा नया है। उन्होंने कहा, मैंने सुना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फिर तनाव बढ़ा है, लेकिन मैं

Oct 26, 2025 - 23:26
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हर महीने रुकवाई एक जंग, अब पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद जल्द सुलझा दूंगा, डोनाल्ड ट्रंप ने हर महीने एक जंग रुकवाने का दावा किया
हर महीने रुकवाई एक जंग, अब पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद जल्द सुलझा दूंगा, डोनाल्ड ट्रंप ने हर महीने एक जंग रुकवाने का दावा किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित 47वें आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने केवल आठ महीनों में आठ युद्धों को समाप्त कर दिया है, यानी हर महीने एक युद्ध रोका गया। ट्रंप ने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद पर हुए शांति समझौते के हस्ताक्षर समारोह में यह बात कही। उन्होंने कहा, यह समझौता उन आठ युद्धों में से एक है। अब केवल एक विवाद बचा है - पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच का - जिसे वे बहुत जल्द सुलझा देंगे। ट्रंप का यह बयान नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में उनकी महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, जहां वे खुद को वैश्विक शांतिदूत के रूप में पेश कर रहे हैं। समारोह में थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुटिन चर्नवीराकुल और कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत ने कुआलालंपुर शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सीमा पर भारी हथियार हटाने, 18 कंबोडियाई सैनिकों को रिहा करने और लैंडमाइन हटाने पर सहमति बनी।

यह समझौता जुलाई 2025 में ट्रंप की मध्यस्थता से हुए अस्थायी युद्धविराम का विस्तार है। उस समय थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर पांच दिनों की झड़पों में 43 लोग मारे गए और 3 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो गए। ट्रंप ने दोनों देशों को चेतावनी दी थी कि यदि लड़ाई नहीं रुकी, तो अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताएं रद्द कर दी जाएंगी। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने मध्यस्थता की, लेकिन ट्रंप की आर्थिक दबाव की भूमिका निर्णायक रही। कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेत ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया, जबकि थाई प्रधानमंत्री चर्नवीराकुल ने कहा कि यह स्थायी शांति की नींव रखेगा। समझौते में आसियान के पर्यवेक्षकों की निगरानी में हथियार हटाने का प्रावधान है। ट्रंप ने समारोह के बाद कहा, मेरी सरकार ने हर क्षेत्र में शांति स्थापित करने का प्रयास किया है। हमने गोल्फ खेलना छोड़कर इन नेताओं से बात की और जल्दी समाधान निकाला।

ट्रंप का आठ युद्धों को समाप्त करने का दावा कई महीनों से चल रहा है। उन्होंने कहा, जैसा कि आप जानते हैं, मेरी सरकार ने सिर्फ आठ महीनों में आठ युद्ध खत्म किए हैं। हम हर महीने एक युद्ध समाप्त कर रहे हैं। अब सिर्फ एक बचा है - पाकिस्तान और अफगानिस्तान का विवाद - लेकिन मैं उसे भी बहुत जल्द सुलझा लूंगा। व्हाइट हाउस ने इन युद्धों की सूची जारी की है: थाईलैंड-कंबोडिया, आर्मेनिया-अजरबैजान, इजरायल-ईरान, भारत-पाकिस्तान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो-रवांडा, सर्बिया-कोसोवो, मिस्र-इथियोपिया और गाजा में युद्धविराम। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह दावा अतिशयोक्तिपूर्ण है। फैक्ट-चेक संगठनों जैसे पोलिटिफैक्ट और फैक्टचेक.ओआरजी ने इसे ज्यादातर झूठा करार दिया है। कई समझौते उनके पहले कार्यकाल के हैं या अस्थायी हैं, जहां हिंसा फिर शुरू हो चुकी है।

उदाहरण के लिए, थाईलैंड-कंबोडिया समझौता जुलाई में हुआ, लेकिन सितंबर में सीमा पर फिर झड़पें हुईं। थाईलैंड ने इसे शांति समझौता नहीं, बल्कि संयुक्त घोषणा कहा। कंबोडिया ने ट्रंप को नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया, लेकिन स्थायित्व संदिग्ध है। इसी तरह, आर्मेनिया-अजरबैजान में जून 2025 का शांति समझौता लागू नहीं हो सका। इजरायल-ईरान में जून में अमेरिकी हमलों के बाद युद्धविराम हुआ, लेकिन तनाव बरकरार है। भारत-पाकिस्तान में मई 2025 के कश्मीर हमले के बाद 12 दिनों की लड़ाई रुकी, लेकिन भारत ने ट्रंप की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह द्विपक्षीय था। पाकिस्तान ने ट्रंप को धन्यवाद दिया और नोबेल के लिए नामित किया। डीआर कांगो-रवांडा में जून का समझौता टूट चुका, जहां सैकड़ों नागरिक मारे गए। सर्बिया-कोसोवो और मिस्र-इथियोपिया के मामले पहले कार्यकाल के हैं, जहां कोई पूर्ण युद्ध नहीं था। गाजा युद्धविराम को आठवां जोड़ा गया, लेकिन फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष जारी है।

ट्रंप का पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद सुलझाने का वादा नया है। उन्होंने कहा, मैंने सुना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फिर तनाव बढ़ा है, लेकिन मैं इसे बहुत जल्द हल कर दूंगा। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री महान लोग हैं। यह संदर्भ तालिबान शासन के बाद सीमा पर आतंकी घुसपैठ और ड्रोन हमलों से जुड़ा लगता है। 2025 में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर कई झड़पें हुईं, जहां पाकिस्तान ने तालिबान को आतंकी समूहों को रोकने को कहा। ट्रंप ने कहा कि वे दोनों नेताओं से बात करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जटिल है, क्योंकि अफगानिस्तान में अमेरिकी वापसी के बाद तालिबान का प्रभाव बढ़ा है। ट्रंप ने पहले कार्यकाल में अफगान शांति समझौता किया था, लेकिन वह टूट गया। अब उनका दावा नोबेल की दौड़ में मजबूती दे सकता है, हालांकि 2025 का पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्ष नेता मारिया कोरिना माचाडो को मिला।

समारोह में ट्रंप ने मलेशिया के साथ व्यापार समझौता भी किया, जिसमें अमेरिका को महत्वपूर्ण खनिजों तक असीमित पहुंच मिलेगी, बदले में मलेशियाई सामानों पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। थाईलैंड और कंबोडिया के साथ भी समान ढांचे पर सहमति बनी। वियतनाम के साथ व्यापार फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर हुए, जो दोनों देशों को बाजारों तक पहुंच देगा। ट्रंप ने कहा, व्यापार को शांति के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। हम दो देशों के साथ जो व्यापार करते हैं, उसे युद्ध रोकने के लिए दबाव बनाते हैं। मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर ने ट्रंप की भूमिका की सराहना की, लेकिन कहा कि यह आसियान की सामूहिक कोशिश है। ट्रंप एशिया यात्रा पर हैं, जहां वे जापान और दक्षिण कोरिया जाएंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात भी तय है, जहां व्यापार युद्ध पर चर्चा होगी।

ट्रंप का शांतिदूत बनने का अभियान उनके दूसरे कार्यकाल की विदेश नीति का केंद्र है। जनवरी 2025 से वे नोबेल की दौड़ में सक्रिय हैं। कंबोडिया, पाकिस्तान और इजरायल ने उन्हें नामित किया। लेकिन आलोचक कहते हैं कि उनके दावे अतिरंजित हैं। स्टैनफोर्ड के राजनीतिक वैज्ञानिक केन शुल्ट्ज ने कहा, समझौता पहला कदम है, लेकिन कार्यान्वयन जरूरी। कई मामलों में हिंसा लौट आई। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की, कहा कि यूएन ने कुछ नहीं किया। हमने इन समस्याओं को हल किया। यह दावा उनकी साख बढ़ा रहा है, लेकिन सत्यापन की जरूरत है।

पाक-अफगान विवाद पर ट्रंप की योजना स्पष्ट नहीं। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के बाद पाकिस्तान पर दहशतगर्दी का आरोप है। सीमा पर ड्रोन और तोपखाने की घटनाएं बढ़ीं। ट्रंप ने कहा कि वे दोनों पक्षों से बात करेंगे। यदि सफल हुए, तो यह नौवां युद्ध होगा। लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि क्षेत्रीय जटिलताएं हैं। भारत भी पाक-अफगान तनाव से प्रभावित हो सकता है। ट्रंप की यात्रा एशिया में अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने का प्रयास है। व्यापार समझौते से अमेरिका को लाभ होगा। उम्मीद है कि उनके प्रयास शांति लाएं।

ट्रंप का यह दावा वैश्विक मीडिया में छाया हुआ। स्काई न्यूज, न्यूजवीक और न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे कवर किया। यह उनकी छवि को मजबूत करता है, लेकिन सच्चाई की जांच जरूरी। शांति प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन स्थायी समाधान चाहिए। आने वाले दिनों में पाक-अफगान पर नजर रहेगी।

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