Sambhal : विश्व ओजोन दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन, ओजोन परत संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अर्थशास्त्र विभाग के प्रभारी डॉ. निलेश कुमार ने कहा कि यदि ओजोन परत नष्ट हो जाए तो सूर्य की हानिकारक किरणें सीधे पृथ्वी तक पहुंचेंगी। इससे वै
Report : उवैस दानिश, सम्भल
एमजीएम डिग्री कॉलेज में भूगोल विभाग द्वारा विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के वंदन के साथ हुई। भूगोल विभाग के प्रभारी दुष्यंत मिश्रा ने बताया कि विश्व ओजोन दिवस हर वर्ष 16 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन वर्ष 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर की याद में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ओजोन परत समताप मंडल में पाई जाती है और यह परत पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। ओजोन परत नष्ट होने पर पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं रहेगा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अर्थशास्त्र विभाग के प्रभारी डॉ. निलेश कुमार ने कहा कि यदि ओजोन परत नष्ट हो जाए तो सूर्य की हानिकारक किरणें सीधे पृथ्वी तक पहुंचेंगी। इससे वैश्विक तापमान बढ़ेगा, हिमखंड तेजी से पिघलेंगे, समुद्र का जलस्तर बढ़ने से तटीय क्षेत्रों और द्वीपों के जलमग्न होने का खतरा बढ़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे वर्षा चक्र असंतुलित होगा और मनुष्यों में त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ेगा। साथ ही, यह फसलों, समुद्री जीवों और पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाकर खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को खतरे में डाल देगा। शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रभारी डॉ. राघवेंद्र प्रताप ने कहा कि ओजोन परत की सुरक्षा के लिए हमें क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) जैसे ओजोन-क्षयकारी पदार्थों का प्रयोग बंद करना होगा।
साथ ही वाहनों का कम उपयोग, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, स्थानीय उत्पादों का उपयोग और अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने की आदत अपनानी चाहिए। समाजशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अमृतेश अवस्थी ने कहा कि हमें अपनी जीवन शैली को पर्यावरण के अनुकूल बनाना होगा। मन, वचन और कर्म से पर्यावरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर ही इसे बेहतर स्थिति में लाया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन वाणिज्य विभाग के प्रभारी डॉ. संजय बाबू दुबे ने किया।
इस अवसर पर अंग्रेजी विभाग के प्रभारी डॉ. नवीन कुमार यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार, उर्दू विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रियाज अनवर सहित कई शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इस गोष्ठी के अंत में सभी ने ओजोन परत की सुरक्षा और प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लिया।
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