Sitapur : ग्राम पंचायत काकोरी में भ्रष्टाचार की परत दर परतें खुलीं, मनरेगा से लेकर नल मरम्मत और रिबोर में गड़बड़झाला सचिव एवं कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध

शिकायतकर्ता रवि प्रकाश सिंह ने शिकायती पत्र के आधार पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने 20 अगस्त 2025 को पत्रांक-2014/शिलि./जांच आख्या/

Sep 16, 2025 - 09:06
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Sitapur : ग्राम पंचायत काकोरी में भ्रष्टाचार की परत दर परतें खुलीं, मनरेगा से लेकर नल मरम्मत और रिबोर में गड़बड़झाला सचिव एवं कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध
ग्राम पंचायत काकोरी में भ्रष्टाचार की परत दर परतें खुलीं

Report : संदीप चौरसिया INA NEWS ब्यूरो Sitapur

सीतापुर के मछरेहटा विकास खंड की काकोरी ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार की परतें एक के बाद एक सामने आ रही हैं। मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़ा, नल मरम्मत, रिबोर और प्रशासनिक खर्चों में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। पंचायत सचिव और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है, जिसके चलते जांच में देरी हो रही है।

मनरेगा में फर्जीवाड़े का आरोप

शिकायतकर्ता रवि प्रकाश सिंह ने शिकायती पत्र के आधार पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने 20 अगस्त 2025 को पत्रांक-2014/शिलि./जांच आख्या/2025-26 के जरिए तीन सदस्यीय जांच टीम बनाई। जांच में पाया गया कि मस्टर रोल में महिला मजदूरों के नाम पर पुरुष मजदूरों की फोटो अपलोड की गईं। पंचायत मित्र (संजय कुमार वर्मा) और पंचायत सहायक (संजय कुमार) कार्यस्थल पर मौजूद थे, जबकि उन्हें पंचायत सचिवालय में होना चाहिए था। मजदूरों और लाभार्थियों से पैसे की उगाही के भी आरोप हैं। ग्राम प्रधान, पंचायत मित्र और सहायक की मिलीभगत से योजनाबद्ध भ्रष्टाचार की बात सामने आई है। जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

इनसेट: मनरेगा में क्या-क्या गड़बड़ियां?

  • मस्टर रोल में फर्जी नाम और फोटो।

  • पंचायत मित्र और सहायक की अनधिकृत मौजूदगी।

  • मजदूरों से पैसे की उगाही।

  • ग्राम प्रधान और कर्मचारियों की मिलीभगत।

नल मरम्मत और रिबोर में भी अनियमितता

बीडीओ के एक अन्य पत्र (पत्रांक-2281/शिकायत/अभिलेख/2025-26, दिनांक 09 सितंबर 2025) ने भ्रष्टाचार की नई परत खोली। वर्ष 2021-22 से अब तक नल मरम्मत और रिबोर कार्यों में गड़बड़ी पाई गई। प्रशासनिक खर्चों में अनियमितता और कार्य से अधिक धनराशि की मेजरमेंट बुक (एमबी) तैयार करने के आरोप हैं। बिना सचिवालय संचालन के धनराशि गबन की शिकायत भी है। बीडीओ ने तीन दिन में अभिलेख जमा करने का निर्देश दिया, ताकि जांच आगे बढ़ सके।

जांच में अड़चनें

बीडीओ के बार-बार निर्देश के बावजूद पंचायत सचिव और तात्कालिक सचिव ने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। इससे जांच रुकी हुई है। सवाल उठ रहे हैं कि बीडीओ के आदेशों की अवहेलना करने वालों पर कार्रवाई होगी या नहीं।

जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने पहले भी जिलाधिकारी को शपथ पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। अब 15 सितंबर 2025 को तीन सेटों में दोबारा शपथ पत्र सौंपकर जांच की गुहार लगाई है।

प्रमुख आरोप

  • मनरेगा में मस्टर रोल और फोटो में फर्जीवाड़ा।

  • पंचायत सहायक और मित्र पर पैसे की उगाही के आरोप।

  • नल मरम्मत, रिबोर और प्रशासनिक खर्च में गड़बड़ी।

  • मेजरमेंट बुक में धांधली।

  • सचिव और कर्मचारियों द्वारा जांच में सहयोग न करना।

जिलाधिकारी को सौंपे गए शपथ पत्र के बाद अब कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि भ्रष्टाचार के दोषियों पर जल्द कार्रवाई होगी।

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