Sitapur : योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस की धज्जियां उडा रहे सचिव और रोजगार सेवक, मनरेगा योजना बनी कमाऊं खाऊं योजना
विकास कार्यों के लिए सरकारी धनराशि को भ्रष्टाचारियों के द्वारा बंदर बांट करने का मुख्य कारण बताया जा रहा है।सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना कागजों पर भले ही मजदूरों के लिए वरदान कही जा
Report : संदीप चौरसिया INA NEWS ब्यूरो Sitapur
पहला सीतापुर विकास खण्ड पहला की ग्राम पंचायत तुरसेना में तैनात सचिव आशीष कुमार रावत आफिस में बैठकर कागजों पर ही मानिटरिंग दिखा रहे और धरातल पर तुरसेना, फिरोजपुर, भेथरा माधव,सदरावा पंचायतों में भ्रष्टाचार आसमान की बुलंदियों को छू रहा है। और मनरेगा योजना में गरीबों के हक को भ्रष्टाचारियों के द्वारा अजगर की तरह निगल कर हजम किया जा रहा है। विकास खण्ड पहला के तुरसेना का है जहां पर रोजगार सेवक उदयराज यादव का मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़ा लगातार जारी है। कागजों के विपरीत धरातल पर कार्य करवाए जा रहे हैं।जिसकी खबर भी दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई। लेकिन भ्रष्टाचार के चलते अफसरों ने कार्यवाही करने से मुंह फेर लिया और पंचायत में लगातार भ्रष्टाचार चरम पर है। पंचायत में आज भी रास्तों पर कीचड एवं जलभराव जैसी समस्या झेलनी पड़ रही है।
विकास कार्यों के लिए सरकारी धनराशि को भ्रष्टाचारियों के द्वारा बंदर बांट करने का मुख्य कारण बताया जा रहा है।सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना कागजों पर भले ही मजदूरों के लिए वरदान कही जाने वाली योजना बताई जा रही हो लेकिन धरातल पर मजदूरों को लाभ नहीं मिल रहा है। भ्रष्टाचार के चलते धरातल पर कम और भ्रष्टाचारियों के तिजोरियों में अधिक मात्रा में जा रही है। इस ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण कार्य, सोलिंग पटरी कार्य,चक मार्ग कार्य तीन कार्य चलाएं जा रहें हैं। जानकार सूत्रों की मानें तो तीनों कार्यों में एक ही मजदूर की फोटो लगाकर जियो टैग करके कागजों पर मास्टर रोल चलाया जा रहा है। जब कि यह नियमों के विरुद्ध है। योगी सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश में जीरो टॉलरेंस नितियों पर कार्य किया जा रहा है। लेकिन पहला ब्लाक में रोजगार सेवक सचिव की मिली भगत के चलते योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस नितियों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। और हैरान करने वाली खबर यह है कि आफिस में बैठकर कागजों पर मानिटरिग दिखाने वाले अधिकारियों को भी इस बात की भनक तक नहीं पहुंच पा रही है।या फिर भ्रष्टाचार में ब्लाक अफसरों को भी हिस्सा पहुंच गया है। आखिर लगातार खबर प्रकाशित होने के बाद भी आफिस में बैठकर कागजों पर कार्य करने वाले अफसर भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगाने में क्यों नाकाम नजर आ रहे हैं?
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