Hardoi: धान खरीद की सुस्त रफ्तार, एक माह दस दिन में लक्ष्य का महज 8% पूरा, मंडी में 14 लाख क्विंटल की रिकॉर्ड बिक्री। 

धान की रिकॉर्ड पैदावार करने वाले जनपद के अधिकांश किसानों को सरकार की ओर से घोषित धान का समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है। जनपद की सभी

Nov 14, 2025 - 16:39
61 Views
Hardoi: धान खरीद की सुस्त रफ्तार, एक माह दस दिन में लक्ष्य का महज 8% पूरा, मंडी में 14 लाख क्विंटल की रिकॉर्ड बिक्री। 
प्रतीकात्मक तस्वीर
हरदोई। धान की रिकॉर्ड पैदावार करने वाले जनपद के अधिकांश किसानों को सरकार की ओर से घोषित धान का समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है। जनपद की सभी मंडियों में बिके 14 लाख क्विंटल धान को बिक्री का आधार माना जाए तो सरकारी क्रय केंद्रों पर मात्र 1.34 प्रतिशत धान खरीद ही हुई है। वहीं धान खरीद के निर्धारित लक्ष्य दो लाख 33 हजार मीट्रिक टन के मुकाबले सरकारी खरीद मात्र आठ फीसदी हुई है।अब तक की धान बिक्री के आधार पर कहा जा सकता है, सौ किसानों में से मात्र एक किसान का ही धान समर्थन मूल्य पर बिक सका है।बहरहाल जनपद में अब तक विभिन्न क्रय एजेंसियों द्वारा कुल 1,08,400 क्विंटल से अधिक धान की खरीद की जा चुकी है। विपणन शाखा ने 42,630 क्विंटल, पीसीएफ ने 33,440 क्विंटल, मंडी परिषद ने 10,540 क्विंटल, पीसीयू ने 12,390 क्विंटल और यूपीएसएस ने 9,400 क्विंटल धान खरीदा है।
विभागीय जिम्मेदारों का कहना है कि किसानों को समर्थन मूल्य 2,300 प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है। हालांकि मंडी ले जाने वाले किसानों को आमतौर पर 13 सौ रुपये से लेकर 16 सौ रुपये तक प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। धान की गुणवत्ता और किस्म के आधार पर धान का मूल्य कुछ अधिक भी मिल जाता है।इनसेट: जिसका दबाव उसका बिक रहा धान, आम किसान परेशानकिसान यूनियन से जुड़े किसान हों या प्रभावशाली जनप्रतिनिधि उनके धान ही क्रय केंद्र पर लिए जा रहे हैं। आम किसानों से क्रय केंद्र प्रभारी बात तक करने को तैयार नहीं हैं। किसान नेता परगट सिंह ने बताया बीते वर्ष 50 हजार मीट्रिक टन धान किसान यूनियन के दबाव में खरीदा गया था। पर इस बार इक्का दुक्का किसानों का ही धान खरीदा गया है। प्रभावशाली लोगों का ही धान खरीदा जा रहा है। एमएसपी नाम होकर रह गया है। केंद्र और प्रदेश सरकार न तो धान खरीद को लेकर गंभीर है, और न ही किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने की उसकी नियत है।
अब तक मिलर्स से नहीं हुआ तारतम्यधान खरीद को गति नहीं मिल पा रही है, इसका बड़ा कारण अब तक मिलर्स के साथ तारतम्य न होना है। पीसीएफ हो या पीसीयू, यूपीएसएस, मंडी, एफसीआई अथवा अन्य क्रए एजेंसी अब तक किसी भी एजेंसी का किसी भी मिलर्स के साथ टाईअप नहीं हुआ है। ऐसे में जो भी धान खरीदा गया है वो क्रय केंद्रों पर डंप है। धान के डंप होने के कारण सरकारी खरीद लगभग ठप सी हो गई है।

“धान खरीद शुरू है, बीते वित्तीय वर्ष की भांति इस वर्ष भी उसी रफ्तार से धान खरीद चल रही है। धान उठान की वजह से धान खरीद प्रभावित नहीं है। प्रक्रिया चल रही है, एक दो दिन में उठान भी शुरू हो जाएगा। धान खरीद लक्ष्य के अनुरूप पूरी की जाएगी।”
- निहारिका, डिप्टी आरएमओ

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow