थरूर-रिजिजू संवाद: 'महिला विरोधी' के ठप्पे पर दिलचस्प चर्चा, कांग्रेस सांसद बोले- 'मैं तो महिलाओं को मानता हूँ ह्यूमन्स 2.0'

लोकसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद राजनीतिक गलियारों में एक दिलचस्प संवाद की चर्चा जोरों पर है। तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच हुई एक अनौपचारिक बातचीत ने सोशल मीडिया से लेकर संसद तक सबका ध्यान खींचा है। यह संवाद केवल एक निजी चर्चा नहीं थी, बल्कि इसमें देश के लोकतांत्रिक भविष्य और महिला प्रतिनिधित्व जैसे गंभीर मुद्दों की झलक भी दिखाई दी।

By INA News Desk
Apr 19, 2026 - 11:30
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थरूर-रिजिजू संवाद: 'महिला विरोधी' के ठप्पे पर दिलचस्प चर्चा, कांग्रेस सांसद बोले- 'मैं तो महिलाओं को मानता हूँ ह्यूमन्स 2.0'
थरूर-रिजिजू संवाद: 'महिला विरोधी' के ठप्पे पर दिलचस्प चर्चा, कांग्रेस सांसद बोले- 'मैं तो महिलाओं को मानता हूँ ह्यूमन्स 2.0'
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  • संसद में सौहार्दपूर्ण क्षण: लोकसभा स्थगित होने के बाद विपक्षी सांसदों की रिजिजू के साथ बैठक, थरूर ने साझा किया अनसुना अंश
  • महिला आरक्षण और परिसीमन का विवाद: शशि थरूर ने महिलाओं को बताया 'इंसानी प्रजाति का बेहतर मॉडल', लोकतंत्र पर खतरे की जताई आशंका

लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को संसद भवन के भीतर एक अनूठा दृश्य देखने को मिला। आमतौर पर तीखी बहसों में उलझे रहने वाले सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता एक साथ अनौपचारिक चर्चा करते नजर आए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस बैठक की एक तस्वीर साझा करते हुए बताया कि सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद विपक्षी सांसदों की संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के साथ एक छोटी और सौहार्दपूर्ण मुलाकात हुई। इस दौरान किरेन रिजिजू ने यह समझाने का प्रयास किया कि भारतीय जनता पार्टी और उनकी सरकार विपक्ष को 'महिला विरोधी' क्यों कह रही है। रिजिजू का तर्क सत्तापक्ष द्वारा लाए गए महिला आरक्षण संबंधी विधायी प्रयासों के इर्द-गिर्द था, जिसे विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ा था।

इस चर्चा के दौरान एक ऐसा मोड़ आया जिसने माहौल को हल्का और दिलचस्प बना दिया। जब रिजिजू विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रहे थे, तब शशि थरूर ने मुस्कुराते हुए उन्हें टोकते हुए कहा कि कम से कम उनके (थरूर) बारे में तो यह बात कभी नहीं कही जा सकती। थरूर ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्होंने रिजिजू को यह स्पष्ट किया कि "मुझे कोई भी कभी भी महिला विरोधी नहीं कह सकता!" दिलचस्प बात यह रही कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस तर्क को स्वीकार कर लिया और सहमति जताई कि थरूर की छवि या उनके विचार कभी भी महिलाओं के प्रति अपमानजनक नहीं रहे हैं। यह बातचीत एक ऐसे समय में हुई जब संसद में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक रस्साकशी अपने चरम पर थी।

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का गिरना

यह पूरा विवाद संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के लोकसभा में गिरने के बाद शुरू हुआ। सरकार इस विधेयक के जरिए 2029 से विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहती थी, लेकिन इसके साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव भी जुड़ा था। सदन में दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण यह ऐतिहासिक विधेयक पारित नहीं हो सका, जिसे सत्तापक्ष ने विपक्ष की 'महिला विरोधी' मानसिकता का परिणाम बताया।

शशि थरूर ने महिलाओं के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और विश्वास को एक नए और आधुनिक नजरिए से पेश किया। उन्होंने महिलाओं को इंसानी प्रजाति का कहीं अधिक बेहतर हिस्सा करार दिया। थरूर ने एक कदम आगे बढ़ते हुए महिलाओं के लिए 'ह्यूमन्स 2.0' शब्द का प्रयोग किया, जिसका अर्थ है मानव जाति का उन्नत संस्करण। उनका मानना है कि महिलाएं प्राकृतिक रूप से अधिक सक्षम और संवेदनशील होती हैं, इसलिए वे न केवल संसद में बल्कि समाज के हर छोटे-बड़े संस्थान में समान और प्रभावी प्रतिनिधित्व की हकदार हैं। थरूर के अनुसार, महिलाओं की भागीदारी को केवल एक राजनीतिक कोटे के रूप में नहीं, बल्कि समाज के विकास के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए।

हालांकि, महिलाओं की तरक्की का पुरजोर समर्थन करने के साथ ही शशि थरूर ने एक गंभीर चेतावनी भी दी है। उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया से जोड़ने को 'शरारती' और 'संभावित रूप से खतरनाक' कदम बताया। थरूर का तर्क है कि यदि महिला आरक्षण को निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण या सीटों की संख्या बढ़ाने की शर्त से जोड़ा जाता है, तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को तबाह कर सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि परिसीमन की प्रक्रिया विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों के खिलाफ जा सकती है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। थरूर का मानना है कि महिलाओं को उनका अधिकार बिना किसी जटिल जनसांख्यिकीय शर्त के तत्काल मिलना चाहिए। संसद के भीतर हुए इस संवाद के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। एक ओर जहां किरेन रिजिजू और सत्तापक्ष यह तर्क दे रहे हैं कि विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक को गिराकर देश की आधी आबादी के साथ अन्याय किया है, वहीं थरूर जैसे नेता इसे 'राजनीतिक छलावा' करार दे रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने आरक्षण के उपहार को 'कांटेदार तारों' में लपेटकर पेश किया है, जिसमें परिसीमन की शर्त जोड़कर इसे भविष्य के लिए टालने की कोशिश की गई है। थरूर ने अपने हालिया भाषणों में परिसीमन को 'राजनीतिक नोटबंदी' की संज्ञा दी है, जो उनके अनुसार देश के संघीय ढांचे के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

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