Sitapur: संघर्ष की जीत: बंद पड़े महाविद्यालय में फिर जली शिक्षा की लौ, बेटियों को मिली नई उड़ान।
शहर में वर्षों से खामोश खड़ा एक “शिक्षा का मंदिर” आखिरकार फिर से आबाद हो गया। पुराने सीतापुर के शेख सराय काजियारा
रिपोर्ट- संदीप चौरसिया
सीतापुर /शहर में वर्षों से खामोश खड़ा एक “शिक्षा का मंदिर” आखिरकार फिर से आबाद हो गया। पुराने सीतापुर के शेख सराय काजियारा स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय, जो करीब एक दशक से बंद पड़ा था, अब फिर से छात्राओं की चहल-पहल से गुलजार होने जा रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए यहां नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दशकभर की खामोशी टूटी यह महाविद्यालय लंबे समय तक बनकर भी बंद रहा, जिससे जिले की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए भटकना पड़ता था। सीटों की कमी और आर्थिक मजबूरियों के कारण कई छात्राओं के सपने अधूरे रह जाते थे।
इस बदलाव के पीछे लोक निर्माण संघ के संस्थापक अध्यक्ष हरिओम मिश्र ‘राजेन्द्र’ के निरंतर प्रयासों की अहम भूमिका बताई जा रही है। उन्होंने इस मुद्दे को लगातार उठाकर शासन-प्रशासन तक पहुंचाया, जिसके बाद पहल तेज हुई।
सरकार की पहल, खुला रास्ता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उच्च शिक्षा विभाग सक्रिय हुआ और महाविद्यालय को संचालित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। अब यहां प्रवेश शुरू हो चुका है, जिससे जिले की बेटियों को बड़ी राहत मिली है। छात्रावास की भी सुविधा महाविद्यालय परिसर में महिला छात्रावास की व्यवस्था भी उपलब्ध है, जिससे दूरदराज की छात्राओं को रहने की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अब नहीं भटकेंगी बेटियां
हरिओम मिश्र ‘राजेन्द्र’ ने इसे जिले के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब सीतापुर की बेटियों को शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यह संस्थान उनके सपनों को साकार करने का माध्यम बनेगा।
जनपद के सभी अभिभावकों से अनुरोध है कि वे अपनी बेटियों का अधिक से अधिक संख्या में इस राजकीय महिला महाविद्यालय में प्रवेश कराएं और इस पहल को सफल बनाएं।
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