लघु नाटिका- ग्रामीण विवाह मंडप का एक दृश्य
सास- लल्ला एक बात कहिन चाहत हैं....
ग्रामीण विवाह मंडप का एक दृश्य
डॉ.मधु प्रधान ,कानपुर
विवाहोपरांत कुर्सी पर बैठे दूल्हे के पास उसकी नई-नई सास पास आकर ज़मीन पर बैठ गयी और दामाद से बोली।]
सास- लल्ला एक बात कहिन चाहत हैं।
दामाद- कहिये....
सास- अब तो तुमाओ ब्याहऊ हो गओ है घर गिरस्ती वाले हो गये हो तुमाई जुम्मेदारी बढ़ गयी है।
दामाद- जी आप ठीक कह रही हैं।
सास- हमाये तो बड़े भाग जो तुमाओ ऐसों जमाई मिलो है हमाई बिटिया ने बा जनम में बड़े पुन्न करे हुई हैं।
दामाद- क्या पता? आप कुछ कहना चाह रही थीं।
सास- हाँ लल्ला हमाई बिटिया ने बी.ए. पास करो है। गाँव में कैसे रहि है। सहर में एक कमरा ले लियो। तुमऊँ खूब पढ़े-लिखे हो शहर में अच्छी सी नौकेरी करके दोऊ जने वहाँ ख़ुशी ख़ुशी रहो।
दामाद--अभी तक गाँव में कैसे रहती थीं ?
सास--मजबूरी हती को रहत उनके सँग ?
दामाद- गाँव में हमारा दो मंजिला घर है। बिगहा भर में फैला हुआ, वहाँ उन्हें क्या तकलीफ होगी?
सास- तुम समझ नही रहे लल्ला...
दामाद- ठीक है। अगर शहर में घर ले लें तो गाँव मे पचास बीघा खेती व ट्रेक्टर कौन देखेगा?
सास- तुम्हारे बप्पा तो हैं। हफ्ते में एक बार जाते रहियो।
दामाद- हमारे बप्पा दमा के मरीज हैं।हम उनके इकलौते बेटे हैं। हमाओ उनके नाते भी फ़र्ज़ हैं। तुमाये लड़का को कोई तुमसे अलग होने को कहे तो तुम्हे कैसो लागिहे ?
सास--तुम हमाई बात समझ नहीं रहे लल्ला।
दामाद-- हम सब समझ रहे अम्मा !
[निररुतर सास आँखों पर पल्ला रख कर रोने की एक्टिंग करती वहाँ से चली गयी]
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