बरेली में अनुशासन का कड़ा पाठ, एसपी अंशिका वर्मा के निरीक्षण में सैल्यूट न करना सिपाही को पड़ा भारी, मिला 15 दिन की विशेष ट्रेनिंग का आदेश।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पुलिस महकमे के भीतर अनुशासन और प्रोटोकॉल को लेकर एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जिसने

May 14, 2026 - 15:52
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बरेली में अनुशासन का कड़ा पाठ, एसपी अंशिका वर्मा के निरीक्षण में सैल्यूट न करना सिपाही को पड़ा भारी, मिला 15 दिन की विशेष ट्रेनिंग का आदेश।
बरेली में अनुशासन का कड़ा पाठ, एसपी अंशिका वर्मा के निरीक्षण में सैल्यूट न करना सिपाही को पड़ा भारी, मिला 15 दिन की विशेष ट्रेनिंग का आदेश।
  • वर्दी की गरिमा और प्रोटोकॉल पर सख्त तेवर, एसपी साउथ ने अनुशासनहीनता पर कॉन्स्टेबल को भेजा पुलिस लाइन, सिखाई जाएगी सैल्यूट की बारीकियां
  • सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सजा का अनोखा आदेश, आंवला थाने में चूक करने वाले सिपाही को रिजर्व पुलिस लाइन में लेना होगा कड़ा प्रशिक्षण

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पुलिस महकमे के भीतर अनुशासन और प्रोटोकॉल को लेकर एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले में हलचल मचा दी है। बरेली की एसपी साउथ अंशिका वर्मा इन दिनों थानों की कार्यप्रणाली और वहां की सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर निरीक्षण कर रही हैं। इसी कड़ी में जब वे आंवला थाने का जायजा लेने पहुंचीं, तो वहां एक सिपाही द्वारा प्रोटोकॉल का पालन न किए जाने का मामला सामने आया। पुलिस विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों के आगमन पर मातहतों द्वारा सैल्यूट करना एक अनिवार्य अनुशासन और परंपरा का हिस्सा माना जाता है, लेकिन यहां एक सिपाही ने इस बुनियादी प्रक्रिया में चूक कर दी, जिसे एसपी ने गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए। यह पूरी घटना उस समय घटित हुई जब एसपी साउथ अंशिका वर्मा आंवला थाने के भीतर विभिन्न अभिलेखों, हवालात और मेस की स्थिति का निरीक्षण कर रही थीं। थाने में तैनात सिपाही परम उस समय ड्यूटी पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने सामने से गुजर रहीं एसपी को नियमानुसार सैल्यूट नहीं किया। पुलिस बल जैसे अनुशासित संगठन में यह माना जाता है कि वर्दी पहने हुए प्रत्येक कर्मी को अपने से वरिष्ठ अधिकारी को उचित सम्मान और अभिवादन देना अनिवार्य है। सिपाही की इस लापरवाही को एसपी ने केवल एक छोटी भूल न मानकर इसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा। उनके अनुसार, यदि बुनियादी प्रशिक्षण में कमी रह जाती है, तो वह भविष्य में पुलिस की कार्यक्षमता और छवि को प्रभावित कर सकती है।

सिपाही द्वारा किए गए इस व्यवहार पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए एसपी साउथ ने एक लिखित आदेश जारी किया, जो अब सार्वजनिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। आदेश के मुताबिक, सिपाही परम को अपनी इस गलती के सुधार के लिए रिजर्व पुलिस लाइन भेजा गया है। वहां उन्हें अगले 15 दिनों तक विशेष 'सैल्यूट ट्रेनिंग' लेनी होगी। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सिपाही को पुलिस मैनुअल के अनुसार अभिवादन करने के सही तरीके, ड्रिल और अनुशासन के महत्व को फिर से समझाना है। पुलिस विभाग में इस तरह की सजा को 'रिफ्रेशर कोर्स' के तौर पर देखा जाता है, ताकि कर्मचारी अपनी वर्दी के प्रति जिम्मेदारी और वरिष्ठों के प्रति सम्मान की भावना को पुनः आत्मसात कर सकें, पुलिस रेगुलेशन और ड्रिल मैनुअल के अनुसार, वर्दी में तैनात हर सिपाही और अधिकारी के लिए वरिष्ठों को सैल्यूट करना अनिवार्य होता है। यह केवल एक व्यक्तिगत अभिवादन नहीं, बल्कि पद और संविधान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। अनुशासन भंग होने पर विभागीय जांच के बजाय प्रशिक्षण की सजा देना एक सुधारात्मक दृष्टिकोण माना जाता है, जिससे कर्मचारी को अपनी दक्षता सुधारने का अवसर मिलता है। एसपी अंशिका वर्मा के इस कड़े रुख ने विभाग के अन्य कर्मचारियों को भी सतर्क कर दिया है। अक्सर थानों में निरीक्षण के दौरान छोटी-मोटी लापरवाहियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन एसपी साउथ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बुनियादी नियमों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उनके इस आदेश में यह भी निहित है कि एक नया सिपाही जब पुलिस बल में शामिल होता है, तो उसे प्रशिक्षण के दौरान सिखाए गए हर बिंदु का पालन कार्यक्षेत्र में भी करना चाहिए। 15 दिनों की इस विशेष ट्रेनिंग के दौरान सिपाही को ड्रिल इंस्पेक्टर की देखरेख में पुलिस शिष्टाचार की बारीकियों का अभ्यास कराया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी त्रुटि की पुनरावृत्ति न हो।

आंवला थाने की इस घटना के बाद बरेली पुलिस के भीतर चर्चाओं का दौर तेज है। एसपी साउथ अंशिका वर्मा अपनी कार्यशैली और सख्त मिजाज के लिए पहले भी सुर्खियों में रही हैं। थानों के निरीक्षण के दौरान वे न केवल फाइलों का मिलान करती हैं, बल्कि पुलिस कर्मियों की मुस्तैदी और उनकी वर्दी की स्थिति पर भी पैनी नजर रखती हैं। सिपाही परम को दी गई यह 'सजा' वास्तव में एक सन्देश है कि ड्यूटी के दौरान सजगता और शिष्टाचार ही पुलिस बल की असली पहचान है। सोशल मीडिया पर भी इस अनोखी ट्रेनिंग की खूब चर्चा हो रही है, जहाँ लोग पुलिस के भीतर अनुशासन बनाए रखने के इस तरीके पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। विशेषज्ञों के नजरिए को हटाकर यदि विभागीय प्रक्रिया की बात करें, तो पुलिस लाइन में प्रशिक्षण की अवधि के दौरान सिपाही को अपनी नियमित ड्यूटी से हटाकर केवल ड्रिल और अनुशासन संबंधी गतिविधियों में संलग्न रखा जाता है। यह मानसिक और शारीरिक रूप से सिपाही को यह याद दिलाने के लिए होता है कि वह एक अनुशासित बल का हिस्सा है। 15 दिन का यह समय सिपाही के लिए आत्म-अवलोकन का भी होगा। बरेली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की सुधारात्मक कार्रवाइयों से निचले स्तर पर काम करने वाले सिपाहियों में भी कर्तव्यबोध जागता है और वे अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक सजग होते हैं।

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