Ajab Gajab: 200 जहरीले सांपों ने काटा, फिर भी जिंदा है यह ‘विष पुरुष’, खून में रंगों सा दौड़ता है जहर। 

सांप का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों की रूह कांप जाती है, लेकिन अमेरिका के कैलिफोर्निया के 57 वर्षीय टिम फ्रीडे (Tim Friede) एक ऐसे शख्स हैं...

May 6, 2025 - 15:27
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Ajab Gajab: 200 जहरीले सांपों ने काटा, फिर भी जिंदा है यह ‘विष पुरुष’, खून में रंगों सा दौड़ता है जहर। 

न्यूयॉर्क, अमेरिका: सांप का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों की रूह कांप जाती है, लेकिन अमेरिका के कैलिफोर्निया के 57 वर्षीय टिम फ्रीडे (Tim Friede) एक ऐसे शख्स हैं, जिन्हें पिछले 20 सालों में 200 से अधिक जहरीले सांपों ने काटा, फिर भी वे न केवल जिंदा हैं, बल्कि उनके खून से अब वैज्ञानिक एक ऐसी क्रांतिकारी दवा बना रहे हैं, जो दुनिया भर में सांप के जहर से होने वाली मौतों को रोक सकती है। टिम के खून में पाई गई एंटीबॉडीज को ‘रंगों में दौड़ता जहर’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह विभिन्न सांपों के जहर को बेअसर करने की अद्भुत क्षमता रखता है। यह कहानी न केवल हैरान करने वाली है, बल्कि विज्ञान और मानव साहस की एक अनोखी मिसाल भी है।

  • कौन हैं टिम फ्रीडे (Tim Friede)?

टिम फ्रीडे (Tim Friede), जिन्हें अब ‘विष पुरुष’ के नाम से जाना जा रहा है, एक पूर्व ट्रक ड्राइवर हैं, जिनका बचपन से ही सांपों और जहरीले जीवों के प्रति गहरा लगाव रहा है। विस्कॉन्सिन में अपने घर के पीछे उन्होंने दर्जनों जहरीले सांप पाल रखे थे, जिनमें कोबरा, करैत, ब्लैक माम्बा, ताइपन, और वॉटर कोबरा जैसे दुनिया के सबसे खतरनाक सांप शामिल थे। उनकी जिज्ञासा और सांपों के जहर के प्रति रुचि ने उन्हें एक खतरनाक प्रयोग की ओर धकेल दिया: उन्होंने जानबूझकर खुद को सांपों से काटने की अनुमति दी।

टिम ने बीबीसी को बताया, “मैं मौत को छूकर वापस आना चाहता था। पहले बहुत डर लगता था, लेकिन जितना करते गए, उतना आसान होता गया।” उन्होंने छोटी खुराक में सांपों का जहर अपने शरीर में लेना शुरू किया, ताकि उनका इम्यून सिस्टम एंटीबॉडीज बनाए। धीरे-धीरे खुराक बढ़ाकर उन्होंने अपने शरीर को इतना मजबूत बना लिया कि अब उनके लिए जहरीले सांपों का काटना भी सामान्य बात हो गई है।

  • 200 बार काटे गए, फिर भी जिंदा

टिम का दावा है कि उन्हें कोबरा, करैत, वाइपर, ब्लैक माम्बा, और ताइपन जैसे सांपों ने 200 से अधिक बार काटा है। उनके यूट्यूब चैनल पर वायरल वीडियो में उनके सूजे हुए हाथ दिखाई देते हैं, जो इन सांपों के काटने के बाद की स्थिति को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि कम से कम 12 बार वे मौत के मुंह से वापस आए। पहले साल में ही दो कोबरा के काटने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।

टिम की इस जोखिम भरी यात्रा को कोई भी चिकित्सा विशेषज्ञ सही नहीं मानता। लिवरपूल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के डॉ. स्टुअर्ट एन्सवर्थ ने बीबीसी से कहा, “यह खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना है। हम नहीं जानते कि यह लंबे समय में उनके शरीर पर क्या प्रभाव डालेगा।” फिर भी, टिम का मानना है कि उनका यह प्रयोग मानवता के लिए एक बड़ा योगदान दे सकता है।

  • वैज्ञानिक खोज: खून से बनी क्रांतिकारी दवा

टिम के इस असाधारण प्रयोग ने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा। 8 साल की रिसर्च के बाद, वैज्ञानिकों ने उनके खून से एक ऐसा एंटीवेनम कॉकटेल तैयार किया है, जो 19 अलग-अलग जहरीले सांपों के जहर को बेअसर कर सकता है। यह रिसर्च जर्नल सेल में प्रकाशित हुई है।

  • कैसे काम करता है यह एंटीवेनम?

टिम के खून में पाई गई एंटीबॉडीज न्यूरोटॉक्सिन के दो वर्गों को बेअसर करती हैं, जो एलापिड सांपों (जैसे कोबरा, करैत, माम्बा) में पाए जाते हैं। ये न्यूरोटॉक्सिन तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित कर पैरालिसिस या मांसपेशियों की विफलता का कारण बनते हैं। वैज्ञानिकों ने एक दवा को इस कॉकटेल में जोड़ा, जो तीसरे वर्ग के जहर को टारगेट करती है। चूहों पर किए गए प्रयोगों में यह कॉकटेल 19 में से 13 सांपों के जहर से चूहों को पूरी तरह बचा सका, जबकि बाकी 6 के खिलाफ आंशिक सुरक्षा प्रदान की।

हालांकि, इस एंटीवेनम का अभी तक इंसानों पर परीक्षण नहीं हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पारंपरिक एंटीवेनम से कहीं अधिक प्रभावी हो सकता है, जो आमतौर पर केवल एक या कुछ प्रजातियों के जहर के लिए काम करता है।

  • सांप के जहर का वैश्विक प्रभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल दुनिया भर में सांपों के काटने से 81,000 से 1,38,000 लोगों की मौत होती है, और लगभग 5 लाख लोग स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं। भारत में सांपों के काटने से हर साल हजारों मौतें होती हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां कोबरा, करैत, रसल्स वाइपर, और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे सांप आम हैं।

टिम का यह प्रयोग इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मौजूदा एंटीवेनम महंगे हैं, और कई बार ग्रामीण अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होते। अगर टिम के खून से बनी दवा सफल होती है, तो यह सस्ती और व्यापक रूप से प्रभावी हो सकती है, जिससे लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। 

  • सोशल मीडिया पर वायरल सनसनी

टिम फ्रीडे (Tim Friede) की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। X पर उनकी तस्वीरें और वीडियो खूब शेयर किए जा रहे हैं, जिनमें वे सांपों के साथ ‘खेलते’ नजर आते हैं। कुछ यूजर्स ने उन्हें ‘सुपरहीरो’ करार दिया, तो कुछ ने उनके प्रयोग को ‘पागलपन’ बताया।

हालांकि, कुछ यूजर्स ने उनके इस प्रयोग को गैर-जिम्मेदाराना बताया और दूसरों को ऐसा न करने की सलाह दी। एक यूजर ने लिखा, “यह साहस नहीं, बल्कि जान जोखिम में डालना है। सांपों से दूरी ही बेहतर है।

  • भारत के संदर्भ में प्रासंगिकता

भारत में सांपों के काटने की घटनाएं बारिश के मौसम में बढ़ जाती हैं, जब कोबरा, करैत, रसल्स वाइपर, और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे सांप बिलों से बाहर निकलते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में 272 प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें से केवल 4 ही घातक रूप से जहरीले हैं। फिर भी, सांप के काटने से डर और झाड़-फूंक में समय बर्बाद करने के कारण कई मौतें हो जाती हैं।

डॉ. विनय सचान, GSVM मेडिकल कॉलेज, कानपुर, ने बताया कि सांप के काटने से घबराहट के कारण हार्ट अटैक या पैरालिसिस जैसी स्थिति बन सकती है, जो मौत का कारण बनती है। उन्होंने सलाह दी कि सांप काटने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए, जहां एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन से 99% मामलों में जान बचाई जा सकती है।

टिम फ्रीडे (Tim Friede) का प्रयोग भारत जैसे देशों के लिए एक उम्मीद की किरण हो सकता है, जहां सांपों के काटने से हर साल हजारों लोग मरते हैं। अगर उनका एंटीवेनम सफल होता है, तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती और प्रभावी दवा के रूप में उपलब्ध हो सकता है।

चुनौतियां और विवाद

  • टिम का यह प्रयोग विवादों से भी घिरा है:

चिकित्सा जोखिम: विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार जहर लेने से टिम के शरीर पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है, जैसे किडनी या लिवर की क्षति।
गैर-जिम्मेदाराना प्रेरणा: उनके यूट्यूब वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट युवाओं को गलत प्रेरणा दे सकते हैं, जो बिना तैयारी के सांपों के साथ प्रयोग कर सकते हैं।
सीमित प्रभाव: अभी तक यह एंटीवेनम केवल एलापिड सांपों (न्यूरोटॉक्सिन आधारित) के लिए प्रभावी है। वाइपर जैसे सांपों के साइटोटॉक्सिन जहर के लिए और रिसर्च की जरूरत है।
आगे की राह

टिम फ्रीडे (Tim Friede) की कहानी साहस, जुनून, और विज्ञान का अनोखा संगम है। वैज्ञानिक अब उनके खून से बने एंटीवेनम को इंसानों पर टेस्ट करने की योजना बना रहे हैं। अगर यह सफल होता है, तो यह सांप के जहर से होने वाली मौतों को कम करने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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भारत जैसे देशों में, जहां सांपों के काटने से हर साल हजारों लोग मरते हैं, इस तरह की खोज ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर सकती है। साथ ही, यह हमें सांपों के प्रति जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देती है। जैसा कि स्नेक एक्सपर्ट ओंकार सिंह कहते हैं, “सांप प्रकृति के दोस्त हैं। अगर हम उन्हें समझें और सही कदम उठाएं, तो नुकसान से बचा जा सकता है।”

टिम फ्रीडे (Tim Friede), जिनके खून में ‘रंगों सा दौड़ता जहर’ है, ने अपने खतरनाक प्रयोग से न केवल मौत को मात दी, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी बचाने की उम्मीद भी जगाई। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि साहस और विज्ञान का मेल असंभव को संभव बना सकता है। लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी देती है कि सांपों जैसे खतरनाक जीवों के साथ प्रयोग बिना विशेषज्ञता के नहीं करना चाहिए।

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