Deoband : देवबंद आतंकी नेटवर्क मामला- न्यायालय के निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक करेंगे गहन जांच

विकास त्यागी ने देवबंद के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि पुलिस और एटीएस की पुरानी जांच में कई कमियां पाई गई हैं। पत्र के अनुसार, एक बांग्लादेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों की मदद से पांच सा

Apr 1, 2026 - 22:43
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Deoband : देवबंद आतंकी नेटवर्क मामला- न्यायालय के निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक करेंगे गहन जांच
Deoband : देवबंद आतंकी नेटवर्क मामला- न्यायालय के निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक करेंगे गहन जांच

देवबंद आतंकी नेटवर्क मामले में एक नया मोड़ आया है। हिंदूवादी नेता विकास त्यागी ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जानकारी दी है कि न्यायालय ने अब तक की जांच पर असंतुष्टि जताई है। न्यायालय ने प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को इस पूरे प्रकरण की नए सिरे से गहराई से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। यह मामला अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क और अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आने वाले लोगों से जुड़ा है।

विकास त्यागी ने देवबंद के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि पुलिस और एटीएस की पुरानी जांच में कई कमियां पाई गई हैं। पत्र के अनुसार, एक बांग्लादेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों की मदद से पांच साल तक दारुल उलूम के छात्रावास में रहा। उसके पास से अलकायदा और तालिबान से जुड़ी लगभग 789 प्रतिबंधित फाइलें मिलने की बात भी कही गई है। त्यागी ने मांग की है कि अब इस मामले की परतें दोबारा खोली जाएं और संस्थान की भूमिका की भी जांच की जाए ताकि सुरक्षा में हुई चूक की जवाबदेही तय हो सके।

त्यागी का कहना है कि वे काफी समय से देवबंद में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देवबंद अंतरराष्ट्रीय आतंकियों के छिपने की जगह बनता जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि जांच के दौरान दारुल उलूम के सभी रिकॉर्ड जब्त किए जाएं और विदेशी धन के लेनदेन की जांच प्रवर्तन निदेशालय से कराई जाए। विकास त्यागी ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद गंभीर बताया है।

इस पत्र की प्रतियां राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृह मंत्रालय के सचिव, खुफिया ब्यूरो और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई हैं। पत्र के साथ न्यायालय द्वारा जारी आदेश की प्रति भी लगाई गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और जांच एजेंसियां इस संवेदनशील मामले में आगे क्या कदम उठाती हैं।

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