अग्निकांड ने खोली अस्पताल की पोल: फायर सिस्टम शोपीस, प्रबंधन की लापरवाही से बाल-बाल बचा जिला चिकित्सालय।
मध्यप्रदेश के बैतूल में अव्यस्थाओ और घूसखोरी से भरे जिला चिकित्सालय में एक और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है कहने को तो जिला
रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया, बैतूल मध्यप्रदेश
- आगजनी की घटना ने खोली दावों की पोल, अग्निशमन यंत्र बने शोपीस,फायर ब्रिगेड की मदद से पाया गया आग पर काबू हो सकता था कोई बड़ा हादसा,प्रबन्धन की लापरवाही पर उठ रहे गंभीर सवाल,जिला चिकित्सालय नहीं बन गया है लूट खसोट का अड्डा, रोजाना होती 108 एम्बुलेंस में मरीजों से खुली लूट, कार्यवाही के नाम पर होती है खानापूर्ति, शिकायत के बाद भी नही होती कोई कार्यवाही
मध्यप्रदेश के बैतूल में अव्यस्थाओ और घूसखोरी से भरे जिला चिकित्सालय में एक और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है कहने को तो जिला चिकित्सालय में अग्निशमन यंत्रो सहित सारी सुविधाएं दिखाने के लिए ही है उसका शोपीस होना इस बात से साबित हो गया कि रविवार को जिला अस्पताल के किचन एरिया के स्टोर रूम में शॉर्ट सर्किट के कारण अचानक आग लगने की घटना सामने आई।
वही अस्पताल का मेन गेट बंद था पर स्थिति गंभीर होने से पहले ही अस्पताल प्रशासन की सूझबूझ, तत्परता से फायरब्रिगेड को बुलाकर आग पर काबू तो पा लिया गया पर यहाँ गंभीर सवाल यह है कि अस्पताल में लगे फायर सेफ्टी इक्विपमेंट सिर्फ दिखावे के लिए लगाए गए है चूंकि आग लगने के बाद एक भी फायर सेफ्टी इक्विपमेंट काम मे नही आये और फायरब्रिगेड को बुलाना पड़ा जबकि जिला चिकित्सालय लगातार सुर्खियों में बना हुआ है यहाँ 108 की बात हो मरीजों से लूट ये मामलों में कोई कमी नही आई सिविल सर्जन और सीएमएचओ के बदलने के बावजूद कोई सुधार न होना कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नही किया जा सकता खैर घटना की जानकारी मिलने पर प्रभारी सिविल सर्जन डॉ रुपेश पदमाकर, आरएमओ डॉ. रानू वर्मा तत्काल मौके पर पहुंचे। फायर ब्रिगेड को बुलवाकर आग पर काबू पाया गया।
अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन बिहारिया और सहायक इलेक्ट्रीशियन महेश तिवारी ने स्विच को बंद किया एहतियातन फीमेल वार्ड , बच्चा वार्ड के मरीजों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया। वहीं मौके पर प्रभारी कलेक्टर अक्षत जैन, अपर कलेक्टर वंदना जाट , मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ मनोज हुरमाड़े और ई एंड एम, एमपीईबी के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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