भारतीय सेना प्रमुख की चेतावनी- अगला युद्ध जल्द हो सकता है, दुश्मन को मिल सकता है विदेशी समर्थन।
UP News: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि भारत को जल्द ही एक बड़े युद्ध का सामना करना...
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि भारत को जल्द ही एक बड़े युद्ध का सामना करना पड़ सकता है, और इस बार दुश्मन को किसी अन्य देश का समर्थन भी प्राप्त हो सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर संयुक्त राज्य अमेरिका के दौरे पर हैं। जनरल द्विवेदी ने अपने बयान में किसी देश का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी ने क्षेत्रीय और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों पर गहरी चिंता जताई है। यह बयान चेन्नई में आईआईटी मद्रास में भारतीय सेना अनुसंधान सेल के उद्घाटन के दौरान दिया गया, जिसका वीडियो भारतीय सेना ने बाद में सार्वजनिक किया। जनरल द्विवेदी ने इस दौरान "संपूर्ण राष्ट्र" दृष्टिकोण पर जोर दिया, जिसमें सैनिकों के साथ-साथ वैज्ञानिक, उद्योग, शैक्षणिक संस्थान और आम नागरिकों की भागीदारी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन में भविष्य के युद्धों की प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये युद्ध पारंपरिक युद्धों से भिन्न होंगे। उन्होंने "गैर-काइनेटिक" युद्ध और "ग्रे जोन" संचालन की अवधारणा को समझाया, जहां युद्ध पूर्ण पैमाने पर युद्ध के बजाय रणनीतिक और सूक्ष्म स्तर पर लड़ा जाता है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन, जो अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, एक शतरंज के खेल की तरह था। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसमें नौ में से सात लक्ष्यों को नष्ट किया गया। इन हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, और यह पहली बार था जब भारत ने दुश्मन के "हृदयस्थल" पर हमला किया। जनरल द्विवेदी ने कहा कि इस ऑपरेशन ने न केवल भारत की सैन्य क्षमता को प्रदर्शित किया, बल्कि सूचना प्रबंधन और रणनीतिक संदेश के महत्व को भी उजागर किया।
ऑपरेशन सिंदूर को जनरल द्विवेदी ने एक "नया सामान्य" करार दिया, जो भारत की बदलती रक्षा रणनीति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में सेना, नौसेना और वायुसेना ने एक ही कोडनेम के तहत काम किया, जो पहले की प्रथा से अलग था। यह एकीकरण और समन्वय भारत की सैन्य रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। ऑपरेशन के दौरान, भारत ने "न्याय हुआ" (Justice Done) का संदेश दिया, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक देखे गए संदेशों में से एक बन गया। इस संदेश को दो महिला अधिकारियों—एक सेना और एक वायुसेना से—द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रचारित किया गया। ऑपरेशन का लोगो, जो एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक गैर-कमीशन अधिकारी द्वारा डिजाइन किया गया था, ने भी सोशल मीडिया पर व्यापक प्रसार प्राप्त किया। यह रणनीति न केवल सैन्य कार्रवाई को मजबूत करती है, बल्कि जनता की धारणा को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन में यह भी चेतावनी दी कि अगला युद्ध केवल सैन्य बलों द्वारा नहीं लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत को "दो-आधा मोर्चों" का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें पाकिस्तान और चीन के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां शामिल हैं। उन्होंने यह संकेत दिया कि पाकिस्तान को किसी अन्य देश का समर्थन प्राप्त हो सकता है, जिससे भारत के लिए खतरा और जटिल हो सकता है। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अमेरिका के दौरे पर हैं। इस दौरे को क्षेत्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक गतिशीलता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत को इस संभावना के लिए तैयार रहना होगा कि दुश्मन अकेले नहीं होगा, और इस स्थिति में भारत को अपनी रक्षा रणनीतियों को और मजबूत करना होगा। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की रणनीति को "शतरंज का खेल" करार देते हुए कहा कि यह एक "ग्रे जोन" ऑपरेशन था, जिसमें दोनों पक्षों ने रणनीतिक चालें चलीं। उन्होंने बताया कि भारत ने इस ऑपरेशन में सात लक्ष्यों को नष्ट किया, जिसमें आतंकी प्रशिक्षण शिविर और उनके नेताओं को निशाना बनाया गया। दो अन्य लक्ष्यों, जो पाकिस्तान के गहरे इलाकों में थे, को भारतीय वायुसेना ने नष्ट किया। इस ऑपरेशन ने न केवल भारत की सैन्य ताकत को दिखाया, बल्कि यह भी साबित किया कि भारत अब जवाबी कार्रवाई में संकोच नहीं करता। जनरल द्विवेदी ने कहा कि इस ऑपरेशन में राजनीतिक इच्छाशक्ति, त्रि-सेवा एकीकरण और प्रौद्योगिकी के साथ खुफिया जानकारी का त्वरित संलयन महत्वपूर्ण कारक थे।
जनरल द्विवेदी ने यह भी उल्लेख किया कि पाकिस्तान ने अपने घरेलू जनता को यह विश्वास दिलाने में सफलता प्राप्त की कि वे इस टकराव में विजयी रहे, क्योंकि उनके सेना प्रमुख को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया। उन्होंने इस धारणा को "मन की जीत" करार दिया और कहा कि भारत ने इस चुनौती का जवाब "न्याय हुआ" संदेश के साथ दिया, जो वैश्विक स्तर पर प्रभावी रहा। इस रणनीति में सोशल मीडिया और अन्य मंचों का उपयोग करके भारत ने न केवल अपनी जनता, बल्कि विरोधी और तटस्थ आबादी को प्रभावित करने का प्रयास किया।
यह आधुनिक युद्ध में सूचना प्रबंधन और जनता की धारणा को आकार देने की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। इसके अलावा, जनरल द्विवेदी ने प्रौद्योगिकी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना "कीचड़ भरे खाइयों से सैन्य चीजों के इंटरनेट" की ओर बढ़ रही है, जहां डेटा, सेंसर और स्वायत्त प्रणालियां युद्धक्षेत्र के निर्णयों को वास्तविक समय में प्रभावित करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर में व्यावसायिक उपग्रह चित्रों, उच्च ऊंचाई वाले छद्म-उपग्रहों और टेदर्ड ड्रोनों का उपयोग किया गया, जो जैमिंग से बचने में सक्षम थे। सामाजिक मीडिया और ओपन-सोर्स डेटा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें भारत की वैश्विक डायस्पोरा के "अच्छे समरिटन्स" ने खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में मदद की। इसके अतिरिक्त, रात के समय रोशनी के पैटर्न का विश्लेषण करके गतिविधियों में बदलाव का पता लगाया गया।
जनरल द्विवेदी ने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों का उपयोग एक "रैचेटिंग प्रभाव" पैदा करता है, जहां दोनों पक्षों को एक-दूसरे की ताकत को पार करने की आवश्यकता होती है। भारतीय सेना ने डीआरडीओ के साथ मिलकर संशोधित व्यावसायिक ड्रोनों का उपयोग किया, जो निगरानी और हमले दोनों के लिए प्रभावी थे। सटीक-निर्देशित हथियारों ने लागत-प्रभावशीलता को बढ़ाया, जिसमें दो मीटर की सटीकता के साथ रॉकेट सिस्टम का उपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप अब "विनाश" से "सटीकता" की ओर बढ़ रहा है, जहां प्रभाव लागत से अधिक महत्वपूर्ण है।
जनरल द्विवेदी ने भारत की सीमाओं पर बढ़ते खतरों के संदर्भ में दो-मोर्चों के युद्ध की वास्तविकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी, विशेष रूप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के माध्यम से, भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने इसे "लगभग पूर्ण सहमति" करार दिया, जो भारत की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपनी सैन्य और कूटनीतिक रणनीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि वह इन दोनों मोर्चों पर प्रभावी ढंग से जवाब दे सके।
इसके साथ ही, जनरल द्विवेदी ने नागरिकों की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सीमा पर सामुदायिक बंकरों से लेकर उन्नत ड्रोनों तक, भारत को अपने संसाधनों और मानव शक्ति का उपयोग करना होगा। उन्होंने आईआईटी जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी को बढ़ावा देने की बात की, जहां उन्नत सामग्री, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना का लक्ष्य 2047 तक आत्मनिर्भर बनना है, जो भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ संरेखित है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के अमेरिका दौरे ने इस बयान को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि इस दौरे के विवरण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह माना जा रहा है कि यह दौरे क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य सहयोग से संबंधित हो सकता है। जनरल द्विवेदी की चेतावनी इस संदर्भ में और भी प्रासंगिक हो जाती है, क्योंकि यह भारत की सैन्य और कूटनीतिक रणनीतियों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करती है।
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