Sambhal: खादी तिरंगे की घटती चमक: अनधिकृत झंडों से प्रभावित हुई बिक्री, सम्मान और जागरूकता की अपील।

देश की शान और पहचान खादी से बने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की बिक्री लगातार घटती जा रही है। मुरादाबाद रोड स्थित गांधी आश्रम,

Jan 22, 2026 - 14:08
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Sambhal: खादी तिरंगे की घटती चमक: अनधिकृत झंडों से प्रभावित हुई बिक्री, सम्मान और जागरूकता की अपील।
विजय शंकर पांडे, दुकान स्वामी

उवैस दानिश, सम्भल 

सम्भल: देश की शान और पहचान खादी से बने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की बिक्री लगातार घटती जा रही है। मुरादाबाद रोड स्थित गांधी आश्रम, सम्भल में पिछले 45 वर्षों से खादी तिरंगे की बिक्री कर रहे विजय शंकर पांडे बताते हैं कि एक–दो सालों से खादी झंडों की मांग में भारी गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण बाजारों में बड़ी संख्या में अनधिकृत और गैर-मानक झंडों की उपलब्धता है।

विक्रेता के अनुसार, खादी तिरंगे आज भी सरकारी मानकों के अनुरूप ही बनाए जाते हैं, जिनका उत्पादन मेरठ और अकबरपुर स्थित गांधी आश्रमों में होता है। उनके पास 60×45, 90×60 और 135×90 साइज के झंडे उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 360 रुपये से लेकर 1900 रुपये तक है। सबसे अधिक मांग 90×60 साइज यानी 3 फीट लंबा और 2 फीट चौड़े झंडे की रहती है, जबकि बड़े सरकारी कार्यालय और इंटर कॉलेज 90×135 साइज का झंडा लेते हैं। विजय शंकर पांडे का कहना है कि खादी झंडों के दामों में पिछले साल की तुलना में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद बिक्री कम होती जा रही है। पहले तिरंगे का विशेष सम्मान था और उपयोग के बाद उसका ससम्मान निस्तारण किया जाता था, लेकिन अब गलियों और सड़कों पर झंडों का दुरुपयोग और अपमान देखने को मिलता है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि राष्ट्रीय ध्वज खरीदते समय उसके मानक और सम्मान का ध्यान रखें। तिरंगे को साइकिल, वाहनों पर लटकाना, गिराना या उपयोग के बाद सड़कों पर छोड़ देना देश के गौरव का अपमान है। हर नागरिक को चाहिए कि वह खादी के शुद्ध तिरंगे को अपनाए और पहले जैसी श्रद्धा और सम्मान की भावना को फिर से जीवित करे।

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