Sambhal: सम्भल के मदरसों में देशभक्ति के रंग में मना 77वाँ गणतंत्र दिवस, संविधान की रक्षा का लिया संकल्प।
जनपद सम्भल के मदरसों में भी 77वाँ गणतंत्र दिवस पूरे हर्षोल्लास और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत
उवैस दानिश, सम्भल
जनपद सम्भल के मदरसों में भी 77वाँ गणतंत्र दिवस पूरे हर्षोल्लास और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम में ध्वजारोहण किया गया। राष्ट्रीय गान के साथ “सारे जहाँ से अच्छा” तराना पढ़ा गया, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने छात्रों को गणतंत्र दिवस के महत्व और भारतीय संविधान की विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। छात्रों ने हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं में संबोधन कर देशभक्ति, एकता और भाईचारे का संदेश दिया। मौलाना वसी अशरफ ने अपने संबोधन में कहा कि 26 जनवरी और 15 अगस्त ऐसे राष्ट्रीय पर्व हैं, जिन्हें पूरा हिंदुस्तान एक साथ मनाता है। यह किसी एक कौम, बिरादरी या मज़हब का नहीं बल्कि पूरे देश की खुशी का दिन है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिया गया संविधान दुनिया का सबसे बड़ा और सर्वश्रेष्ठ संविधान है, जिसकी रक्षा करना हम सबका कर्तव्य है। उन्होंने छात्रों से संविधान की रक्षा के लिए हर कुर्बानी देने का संकल्प लेने की अपील की। वहीं मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने कहा कि मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उलूम न सिर्फ हिंदुस्तान बल्कि पूरे आलम-ए-इस्लाम की एक अजीम दर्सगाह है। उन्होंने सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की मुबारकबाद देते हुए कहा कि भारत अमन और सुकून का गहवारा है, जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई मिल-जुलकर रहते हैं। संविधान सभी को अपने-अपने धर्म के अनुसार जीवन जीने की आज़ादी देता है। उन्होंने देशवासियों से अमन, शांति और भाईचारे के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चलने की अपील की, ताकि भारत विश्व गुरु बन सके।
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