Sambhal: बुर्का, कांवड़ और बयानबाज़ी पर सियासी घमासान: अमन त्यागी और तमन्ना मलिक ने सांसद व मौलाना के बयानों पर दिया करारा जवाब। 

रमज़ान उल मुबारक के पवित्र महीने की शुरुआत से पहले समाजवादी पार्टी ने प्रशासन से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की

Feb 16, 2026 - 16:45
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Sambhal: बुर्का, कांवड़ और बयानबाज़ी पर सियासी घमासान: अमन त्यागी और तमन्ना मलिक ने सांसद व मौलाना के बयानों पर दिया करारा जवाब। 
बुर्का, कांवड़ और बयानबाज़ी पर सियासी घमासान: अमन त्यागी और तमन्ना मलिक ने सांसद व मौलाना के बयानों पर दिया करारा जवाब। 

उवैस दानिश, सम्भल 

सम्भल में बुर्का पहनकर कांवड़ उठाने के मामले को लेकर बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। इस मुद्दे पर स्थानीय सांसद जियाउर्रहमान बर्क के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छिड़ गई है। सांसद ने इसे बुर्का और इस्लाम को बदनाम करने की साजिश बताया था।

इस पर अमन त्यागी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बुर्का पहनने से बुर्का बदनाम नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि बेवजह के बयान देकर समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है। अमन त्यागी ने साफ कहा कि संभल में अब शांति का माहौल है और प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में गुंडागर्दी और गलत बयानबाज़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी क्रम में कोटद्वार की घटना का हवाला देते हुए सांसद द्वारा दिए गए बयान पर भी अमन त्यागी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति नाम या परंपरा से जुड़े निर्णय अपनी मर्जी से लेता है, तो उसे लेकर दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है। उन्होंने इसे भाईचारे के खिलाफ बताया। वहीं, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के बयान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। मौलाना ने कहा था कि हिंदू त्योहार मनाने वाला मुसलमान इस्लाम में रहने का हक़दार नहीं है। इस पर अमन त्यागी ने कहा कि इस्लाम किसी एक मौलाना की बपौती नहीं है और हर व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार जीने की आज़ादी है। इस पूरे विवाद में तमन्ना मलिक ने भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह अपने त्योहार अपने विवेक से मनाती हैं और बुर्का पहनना उनका निजी निर्णय है। शादी के बाद से वह बुर्का पहन रही हैं और उनके ससुराल या पति को इससे कोई आपत्ति नहीं है। तमन्ना ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भाईचारे की बात तो करते हैं, लेकिन व्यवहार में फतवे और विवाद ही फैलाते हैं। कुल मिलाकर, बुर्का और कांवड़ के मुद्दे पर शुरू हुई यह बहस अब सियासी और धार्मिक बयानबाज़ी का रूप ले चुकी है, जिस पर सम्भल में शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।

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