Prayagraj : राष्ट्रीय शिल्प मेला में डांडिया और भांगड़ा ने मचाया धमाल, लोक कलाकारों ने बांधा दर्शकों का दिल

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत स्थानीय गायिका शुभी पाण्डेय के भजनों से हुई। उन्होंने बाजे रे मुरलिया बाजे, ओ जी हरि किट गए, रे मेरा मान कृष्ण नाम कहीं लीजिए, मन

Dec 8, 2025 - 00:49
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Prayagraj : राष्ट्रीय शिल्प मेला में डांडिया और भांगड़ा ने मचाया धमाल, लोक कलाकारों ने बांधा दर्शकों का दिल
Prayagraj : राष्ट्रीय शिल्प मेला में डांडिया और भांगड़ा ने मचाया धमाल, लोक कलाकारों ने बांधा दर्शकों का दिल

प्रयागराज। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के तहत आयोजित राष्ट्रीय शिल्प मेले की सातवीं सांस्कृतिक शाम में लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। घाघरा-चोली, धोती-कुर्ता-पगड़ी जैसे चटकीले परिधानों में कलाकारों की जुगलबंदी ने माहौल को उत्साह से भर दिया। शिल्प हाट का प्रांगण खचाऊभर हो गया, जहां गीतों पर लोग थिरकते और तालियां बजाते नजर आए।

कार्यक्रम का शुभारंभ पुलिस महानिरीक्षक अजय कुमार मिश्रा और माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव भगवती सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने अतिथियों एडीजी संजीव गुप्ता, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति सत्यकाम, रामप्रकाश राय को अंगवस्त्र और पौधा भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने स्वागत उद्बोधन दिया।

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत स्थानीय गायिका शुभी पाण्डेय के भजनों से हुई। उन्होंने बाजे रे मुरलिया बाजे, ओ जी हरि किट गए, रे मेरा मान कृष्ण नाम कहीं लीजिए, मन लाग्यो मेरो यार फकीरी में और प्रयाग नगरी बसे संगम के तीरे जैसे गीत गाए। इनसे श्रोताओं ने खूब तारीफ की। इसके बाद गजल गायक संतोष पाण्डेय ने इस तरह मोहब्बत की शुरुआत कीजिए, साथ छूटेगा कैसे मेरा आपका और मोहे आईने जग से लाज जैसी गजलों से माहौल को रोमांटिक बना दिया।

मंच पर सिंजनी सरकार और उनके साथियों ने भरतनाट्यम के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम द्वारा रावण पर युद्ध से पहले देवी शक्ति की पूजा के प्रसंग को भावपूर्ण ढंग से दिखाया। दर्शकों ने हर लय पर तालियां बजाईं।

लोक नृत्यों की श्रृंखला में अमरेंद्र सिंह ने पंजाब का भांगड़ा और जिंदुआ नृत्य प्रस्तुत कर ऊर्जा बिखेरी। नितिन दवे ने गुजराती डांडिया से दर्शकों को झुमाया। छड़ियों की खनक पर ढोलिडा ढोल धीमो, पंखिड़ा तू उड़ी जाजे, केसरियो रंग तने लाग्यो जैसे गीतों ने ताल का नया संसार रचा। शब्बीर सिद्धी और साथियों ने सिद्धी धमाल नृत्य से उत्साह बढ़ाया। तमिलनाडु के कलाकारों ने अम्मन अट्टम दिखाया। शरद अनुरागी ने आल्हा के जरिए कजली की लड़ाई की वीर रस भरी गाथा सुनाई।

संचालन प्रियांशु श्रीवास्तव ने किया। यह मेला महाकुंभ 2025 की थीम पर आधारित है, जो 1 से 12 दिसंबर तक चला। विभिन्न राज्यों के शिल्पी और कलाकारों ने सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत किया।

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