Trending: निर्जला एकादशी पर सड़क पर ‘बियर’ बांटने की रील वायरल, युवकों का दावा- बोतलों में था जूस, पुलिस ने सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
राजस्थान की राजधानी, में रविवार को एक ऐसी घटना ने सुर्खियां बटोरीं, जिसने धार्मिक भावनाओं और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर ...
जयपुर, राजस्थान की राजधानी, में रविवार को एक ऐसी घटना ने सुर्खियां बटोरीं, जिसने धार्मिक भावनाओं और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए। शहर के मानसरोवर क्षेत्र में एक यूट्यूबर, जिसे लप्पू सचिन उर्फ सचिन सिंह के नाम से जाना जाता है, और उसके छह दोस्तों ने सड़क पर कथित तौर पर बियर की बोतलें बांटने का वीडियो बनाया। यह वीडियो निर्जला एकादशी, हिंदुओं के लिए एक पवित्र उपवास का दिन, पर बनाया गया, जिसके बाद इसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने से विवाद खड़ा हो गया। वीडियो के वायरल होने के बाद जयपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
घटना मानसरोवर के टोंक रोड इलाके की है, जहां रविवार की दोपहर लप्पू सचिन और उसके दोस्त एक स्कॉर्पियो कार में सवार होकर पहुंचे। उनके पास बियर की बोतलों का एक कार्टन था, जिसे वे ऑटोरिक्शा चालकों, यात्रियों और राहगीरों को बांटते नजर आए। इस पूरी घटना को उन्होंने कैमरे में रिकॉर्ड किया और यूट्यूब व इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर दिया। वीडियो में युवक बियर की बोतलें बांटते हुए उत्साह से बातें करते और इसे मनोरंजन के रूप में पेश करते दिखे।
निर्जला एकादशी के दिन, जब लोग उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों में व्यस्त थे, इस वीडियो को धार्मिक भावनाओं के लिए अपमानजनक माना गया। वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसकी कड़ी निंदा की, जिसके चलते मामला पुलिस तक पहुंचा। वीडियो में दिख रही स्कॉर्पियो कार की नंबर प्लेट के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की और उन्हें हिरासत में लिया।
- आरोपियों का दावा:
गिरफ्तारी के बाद लप्पू सचिन और उसके दोस्तों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने यह वीडियो केवल मनोरंजन के लिए बनाया था। उनका दावा था कि बोतलों में बियर नहीं, बल्कि जूस भरा हुआ था। सचिन ने कहा, “हमने राहगीरों से पूछकर और उनकी सहमति से यह वीडियो बनाया। हमारा इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।” इसके साथ ही, उन्होंने अपने कार्यों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और कहा कि अगर इस वीडियो से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं, तो वे इसके लिए खेद प्रकट करते हैं।
जयपुर पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मानसरोवर थाना प्रभारी लखन सिंह खटाना और साइबर सेल की टीम के नेतृत्व में जांच शुरू की। पुलिस ने स्कॉर्पियो कार की नंबर प्लेट (RJ-14-UX-0940) के आधार पर वाहन मालिक और वीडियो में शामिल लोगों की पहचान की। दक्षिण जयपुर के उपायुक्त (डीसीपी) दिगंत आनंद ने बताया, “वायरल वीडियो में युवक निर्जला एकादशी के दिन सड़क पर शराब बांटते दिख रहे थे, जिसने धार्मिक भावनाओं को आहत किया। हमने तुरंत जांच शुरू की और सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।”
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पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थान पर शराब का वितरण या सेवन राजस्थान के आबकारी कानूनों के तहत अवैध है। इसके अलावा, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए के तहत कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने वीडियो की फोरेंसिक जांच शुरू की है ताकि यह पुष्टि हो सके कि बोतलों में शराब थी या जूस। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह कार्य सोशल मीडिया पर वायरल होने और प्रसिद्धि पाने के लिए जानबूझकर किया गया।
वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसने व्यापक चर्चा को जन्म दिया। X पर कई यूजर्स ने इस घटना की जानकारी साझा की। @news24tvchannel ने लिखा, “जयपुर में लड़कों ने सड़क पर बियर बांटकर बनाई रील। युवक ने कहा- बोतल में शराब नहीं बल्कि जूस भरा हुआ था।” @VistaarNews ने पोस्ट किया, “जयपुर में युवाओं ने सड़क पर बांटी बीयर, सोशल मीडिया पर वायरल।” @rpbreakingnews ने लिखा, “सड़क पर बीयर… वीडियो का पार्ट-2 जयपुर पुलिस ने किया जारी, कान पकड़कर माफी मांगते नजर आए आरोपी।” इन पोस्ट्स ने इस घटना को व्यापक स्तर पर उजागर किया और पुलिस पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ाया।
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पुलिस ने सातों आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद उनके बयान दर्ज किए हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला कि लप्पू सचिन का इंस्टाग्राम अकाउंट (@lappu_sachin) पहले भी विवादास्पद रील्स के लिए चर्चा में रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस वीडियो को वायरल करने के पीछे कोई व्यावसायिक मंशा थी, जैसे कि सोशल मीडिया फॉलोअर्स बढ़ाने या प्रायोजित सामग्री को बढ़ावा देना।
सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की गतिविधियां न केवल आबकारी कानूनों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि सार्वजनिक शांति भंग करने (आईपीसी धारा 268 और 290) के तहत भी दंडनीय हो सकती हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जयपुर पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और साइबर सेल को सोशल मीडिया पर ऐसी गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। डीसीपी दिगंत आनंद ने कहा, “हमारी प्राथमिकता है कि शहर में कानून-व्यवस्था बनी रहे और धार्मिक भावनाओं का सम्मान हो। इस तरह के कृत्य न केवल गैरकानूनी हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी प्रभावित करते हैं।”
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