Saharanpur : आरटीओ कार्यालय में अव्यवस्था चरम पर, अफसरों की आपसी खींचतान से जनता बेहाल

कार्यालय में मौजूद लोगों का कहना है कि कई खिड़कियों पर कर्मचारी ही नदारद रहते हैं। खासतौर पर संविदा पर तैनात बाबुओं की लगातार गैरहाजिरी के चलते फाइलों का निस्ता

Dec 15, 2025 - 21:03
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Saharanpur : आरटीओ कार्यालय में अव्यवस्था चरम पर, अफसरों की आपसी खींचतान से जनता बेहाल
Saharanpur : आरटीओ कार्यालय में अव्यवस्था चरम पर, अफसरों की आपसी खींचतान से जनता बेहाल

सहारनपुर : आरटीओ कार्यालय इन दिनों आम जनता के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। विभाग के भीतर चल रही अफसरों की आपसी खींचतान और आपसी तालमेल की कमी का खामियाजा सीधे तौर पर जनता को भुगतना पड़ रहा है। रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए दूर-दराज से आने वाले लोग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, लेकिन अधिकांश काउंटर बंद होने के कारण उनका काम आगे नहीं बढ़ पा रहा।
कार्यालय में मौजूद लोगों का कहना है कि कई खिड़कियों पर कर्मचारी ही नदारद रहते हैं। खासतौर पर संविदा पर तैनात बाबुओं की लगातार गैरहाजिरी के चलते फाइलों का निस्तारण प्रभावित हो रहा है। इससे न केवल कामकाज धीमा पड़ा है, बल्कि आरटीओ परिसर में भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। भीड़ और अव्यवस्था के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और दूर से आए लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सूत्रों की मानें तो आरटीओ विभाग के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वर्चस्व को लेकर खींचतान चल रही है। कोई अधिकारी खुद को मंत्री स्तर तक पहुंच रखने वाला बताता है, तो कोई उच्च अधिकारियों से नजदीकी के दावे करता नजर आता है। इसी अंदरूनी रस्साकशी का असर व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। आम लोगों का आरोप है कि अधिकारी आपसी ताकत दिखाने में व्यस्त हैं, जबकि जनता की समस्याओं की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
विभाग पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि कथित रूप से पैसों के लेन-देन और अंदरखाने चल रही बंदरबांट को लेकर तनाव बना हुआ है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात देखकर जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि कई-कई दिनों से चक्कर काटने के बावजूद उनके लाइसेंस, वाहन पंजीकरण और अन्य जरूरी काम अधर में लटके हुए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर जल्द ही आरटीओ कार्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया और जिम्मेदार अधिकारियों ने हालात नहीं संभाले, तो आक्रोशित जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर हो सकती है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के उच्च अधिकारी कब तक इस अव्यवस्था पर संज्ञान लेते हैं और आम आदमी को राहत कब मिलती है।

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