Sambhal : 40 साल के अनुभव से बनी खुशियों की रंगत- हर्बल गुलाल से सुरक्षित और पर्यावरण-मित्र होली की पहल
हर्ष गुप्ता बताते हैं कि हर्बल गुलाल बनाने का विचार इसलिए आया ताकि लोग बिना किसी डर के होली खेल सकें। इस गुलाल में पोटैटो स्टार्च (आलू का आटा) और कॉर्न स्टार्च (मक्का का आटा) का इस्ते
सुरक्षित रंग, प्राकृतिक खुशबू और रोज़गार के साथ—हर्बल गुलाल बना रहा है होली को सचमुच खुशियों का त्योहार
Report : उवैस दानिश, सम्भल
होली के रंग जहां खुशियां लाते हैं, वहीं केमिकल युक्त गुलाल कई बार त्वचा, आंख और बच्चों के लिए नुकसानदेह साबित होता है। इसी समस्या को देखते हुए हर्ष गुप्ता ने पूरी तरह हर्बल और ऑर्गेनिक गुलाल बनाने की पहल की, जो आज 10 से 12 राज्यों में लोगों की पसंद बन चुका है।
हर्ष गुप्ता बताते हैं कि हर्बल गुलाल बनाने का विचार इसलिए आया ताकि लोग बिना किसी डर के होली खेल सकें। इस गुलाल में पोटैटो स्टार्च (आलू का आटा) और कॉर्न स्टार्च (मक्का का आटा) का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें फ़ूड कलर और अहमदाबाद व कन्नौज के फूलों की प्राकृतिक खुशबू मिलाई जाती है।
तैयार मिश्रण को खेतों में तिरपाल पर 7–8 दिन तक प्राकृतिक धूप में सुखाया जाता है, फिर उसकी पिसाई कर अलग-अलग पैकिंग में बाज़ार भेजा जाता है। करीब 28 साल पहले फैक्ट्री स्तर पर शुरू हुआ यह काम, अनुभव के लिहाज़ से आज 40–45 साल का सफर तय कर चुका है।
यहां रोज़ाना 2 से ढाई टन तक गुलाल तैयार होता है। बच्चों के लिए खासतौर पर स्किन-लविंग और एलर्जी-फ्री गुलाल, गुलाल की पिचकारी, चॉकलेट, मिंट और नारियल खुशबू वाले रंग भी बनाए जाते हैं।
हर्बल गुलाल न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर है, क्योंकि यह मिट्टी में घुल जाता है और पानी को प्रदूषित नहीं करता। होली के सीज़न में इस फैक्ट्री से 40–50 स्थानीय लोगों को रोज़गार भी मिलता है।
हर्ष गुप्ता के मुताबिक उनका गुलाल खास तौर पर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बरेली समेत कई जिलों में सबसे ज़्यादा पसंद किया जाता है।
प्राकृतिक तरीके से बनने और अधिक मेहनत लगने के कारण हर्बल गुलाल आम गुलाल से थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन सेहत और पर्यावरण के लिहाज़ से यह कहीं बेहतर विकल्प साबित हो रहा है।
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