Sambhal : पर्दानशीं महिलाओं पर चुनाव आयोग का फैसला अन्यायपूर्ण- सांसद जियाउर्रहमान बर्क बोले मुस्लिम महिलाओं को किया जा रहा टारगेट
सांसद बर्क ने कहा कि जिस तरह बिहार में चुनाव होने जा रहे हैं, उसी दौरान आयोग ने पर्दे में रहने वाली महिलाओं पर केंद्रित निर्णय लिया है, जो समझ से परे है। उन्होंने कहा कि
बीजेपी घृणा की राजनीति कर रही है, बुर्का पहनने वालों को जाली वोटर बताना झूठ: विधायक इकबाल महमूद
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने चुनाव आयोग के हालिया फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि आयोग के लगातार आने वाले फैसले उसकी निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है, क्योंकि फैसले निष्पक्ष नज़र नहीं आते।
सांसद बर्क ने कहा कि जिस तरह बिहार में चुनाव होने जा रहे हैं, उसी दौरान आयोग ने पर्दे में रहने वाली महिलाओं पर केंद्रित निर्णय लिया है, जो समझ से परे है। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को वोट डालने का अधिकार है। अगर कोई नियम बनता है, तो वह सबके लिए होना चाहिए, न कि किसी खास वर्ग या धर्म के लिए। बर्क ने चेताया कि इस तरह के फैसलों से वोटिंग प्रतिशत घटेगा। \
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग करोड़ों रुपए खर्च करता है ताकि लोग वोट डालने आएं, लेकिन अब इस तरह के कदम से लोग प्रताड़ित होकर वोट डालने से पीछे हट सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश की संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा बना रहना चाहिए, किसी भी वर्ग को निशाना बनाने वाला नियम लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। चेहरे की पहचान से वोट घटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारे देश में आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं पर्दानशीं हैं। वे जब मतदान करने जाती हैं तो पर्दे में रहना उनकी धार्मिक और सामाजिक मर्यादा का हिस्सा है। ऐसे में उनकी जांच-परख के नाम पर रोकना या प्रताड़ित करना उचित नहीं है।
वहीं, सपा विधायक इकबाल महमूद ने भी चुनाव आयोग के फैसले को बीजेपी की घृणा की राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि बीजेपी यह समझती है कि बुर्का पहनने वाली महिलाएं जाली वोट डालती हैं, जबकि यह सरासर झूठ है। बुर्का मुस्लिम समाज की संस्कृति का हिस्सा है। अगर पहचान सुनिश्चित करनी है किसी महिला को बिठाया है तो कोई ऐतराज नहीं है।
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