सुले का साहसिक बयान: 'मैं हूं परिवारवाद और मुझे इसका अभिमान है', संसद में NCP-SCP सांसद सुप्रिया सुले का खुलासा।
लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान 9 दिसंबर 2025 को एक गरमागर्म बहस में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले
लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान 9 दिसंबर 2025 को एक गरमागर्म बहस में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने परिवारवाद पर खुलकर बोला और कहा कि मैं हूं परिवारवाद और मुझे इसका अभिमान है। यह बयान विपक्ष की एकजुटता पर चल रही चर्चा के बीच आया, जहां सत्ताधारी दल के सदस्यों ने विपक्षी दलों में वंशवाद को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। सुले ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि परिवारवाद कोई अपराध नहीं, बल्कि राजनीति में निरंतरता और मूल्यों का प्रतीक है, जो कई पार्टियों में देखा जाता है। इस बयान ने सदन में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कीं, और विपक्ष के अन्य सदस्यों ने सुले के पक्ष में आवाज उठाई। चर्चा का विषय विपक्ष के गठबंधन की मजबूती था, लेकिन सुले ने इसे परिवार आधारित राजनीति की वैधता से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही फैसला करती है, और यदि परिवार के सदस्य चुने जाते हैं तो यह जनादेश का सम्मान है।
बहस की शुरुआत सुबह 11 बजे हुई, जब स्पीकर ने विपक्ष की एकजुटता पर विशेष चर्चा का प्रस्ताव रखा। यह चर्चा हाल ही में हुए राज्य चुनावों के परिणामों से प्रेरित थी, जहां विपक्षी गठबंधन ने कुछ राज्यों में अप्रत्याशित सफलता हासिल की। सुले को बोलने का अवसर दोपहर दो बजे मिला, और उन्होंने अपने 15 मिनट के भाषण में परिवारवाद को केंद्र में रखा। सुले ने कहा कि राजनीति में परिवारवाद का आरोप केवल विपक्ष पर लगाया जाता है, जबकि सत्ताधारी दलों में भी वही पैटर्न दिखता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कई नेताओं के परिवार के सदस्य विभिन्न पदों पर हैं, जो राजनीतिक विरासत को दर्शाता है। सुले ने जोर दिया कि उनका परिवार राजनीति में सेवा के लिए आया, और पिता शरद पवार की विरासत को आगे बढ़ाना उनका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि परिवारवाद से राजनीति में स्थिरता आती है, और यह जनता की पसंद पर आधारित है। इस बयान के बाद सदन में कुछ सदस्यों ने ताली बजाई, जबकि अन्य ने आपत्ति जताई। सुले का बयान NCP-SCP के आंतरिक संदर्भ से जुड़ा हुआ था, जहां पार्टी हाल ही में विभाजन का शिकार हुई। शरद पवार गुट ने अजित पवार गुट से अलग होकर अपनी पहचान बनाई, और सुले इस गुट की प्रमुख चेहरा हैं। बहस में सुले ने कहा कि परिवारवाद का मतलब सत्ता का दुरुपयोग नहीं, बल्कि मूल्यों और सिद्धांतों का हस्तांतरण है। उन्होंने 1999 में NCP के गठन का जिक्र किया, जब शरद पवार ने कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाई, और परिवार ने हमेशा पार्टी को मजबूत किया। सुले ने कहा कि यदि परिवारवाद गलत होता तो जनता उन्हें बार-बार चुनती नहीं। उन्होंने पुणे लोकसभा क्षेत्र से अपनी चार बार की जीत का उदाहरण दिया, जहां वोटरों ने परिवार की राजनीति को स्वीकार किया। सुले ने विपक्ष पर सवाल उठाया कि यदि परिवारवाद इतना बुरा है तो सभी दलों में क्यों प्रचलित है। इस पर सत्ताधारी पक्ष के एक सदस्य ने जवाब दिया कि विपक्ष में यह अधिक चरम है, लेकिन स्पीकर ने चर्चा को आगे बढ़ाया।
चर्चा के दौरान सुले ने विपक्ष की एकजुटता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन की सफलता परिवार आधारित पार्टियों के सहयोग से आई, जहां प्रत्येक नेता अपने परिवार की विरासत को लेकर एकजुट है। सुले ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों का हवाला दिया, जहां NCP-SCP ने अजित गुट के बावजूद मजबूत प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि परिवारवाद से पार्टी में वफादारी बढ़ती है, और बाहरी हस्तक्षेप से बचाव होता है। सुले ने जोर दिया कि राजनीति में योग्यता ही मायने रखती है, और परिवार का नाम केवल प्रारंभिक पहचान है। उन्होंने कहा कि मैं हूं परिवारवाद का प्रतीक, और मुझे इसका अभिमान है क्योंकि यह मेरे परिवार की मेहनत का परिणाम है। इस बयान ने विपक्षी बेंचों से समर्थन प्राप्त किया, और कई सांसदों ने एक साथ कहा कि यह सच्चाई है। सत्ताधारी पक्ष ने इसे बचाव का प्रयास बताया, लेकिन सुले ने अपनी बात रखी। बहस का दूसरा चरण दोपहर तीन बजे शुरू हुआ, जहां अन्य विपक्षी सांसदों ने सुले के बयान का समर्थन किया। एक सांसद ने कहा कि राजनीति में परिवारवाद लोकतंत्र का हिस्सा है, और इसे खत्म करने की बात अव्यावहारिक है। सुले ने अपनी स्पीच के अंत में कहा कि यदि परिवारवाद पर बहस हो रही है तो सभी दलों की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि चुनाव सुधारों में परिवारवाद पर कोई प्रतिबंध न लगाया जाए, क्योंकि यह संवैधानिक अधिकार है। स्पीकर ने बहस को समाप्त करते हुए कहा कि यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, और आगे चर्चा हो सकती है। सुले का बयान सत्र के मुख्य आकर्षणों में से एक रहा, जो विपक्ष की रणनीति को दर्शाता है। NCP-SCP ने बाद में एक बयान जारी किया, जिसमें सुले के विचारों को पार्टी की आधिकारिक लाइन बताया गया।
इस बयान का संदर्भ महाराष्ट्र की राजनीति से गहराई से जुड़ा है। NCP का विभाजन जुलाई 2023 में हुआ, जब अजित पवार ने बहुमत के साथ शरद पवार गुट से अलग हो गए। सुले ने तब से पार्टी को मजबूत करने में भूमिका निभाई, और लोकसभा चुनाव 2024 में पुणे से जीत हासिल की। बहस में सुले ने कहा कि परिवारवाद ने NCP को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी, और शरद पवार की बेटी होने का अभिमान है। उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं के लिए परिवार का समर्थन आवश्यक है, क्योंकि बाहरी चुनौतियां अधिक हैं। सुले ने उदाहरण दिया कि कई महिला नेताओं ने परिवार की पृष्ठभूमि से राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने कहा कि अभिमान इसलिए है क्योंकि परिवार ने हमेशा जनसेवा को प्राथमिकता दी। इस पर सत्ताधारी सदस्यों ने सवाल उठाए, लेकिन सुले ने जवाब दिया कि आंकड़े झूठ नहीं बोलते। विपक्ष की एकजुटता पर चर्चा में सुले ने INDIA गठबंधन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गठबंधन में परिवार आधारित पार्टियां प्रमुख हैं, जैसे SP, DMK और NCP, जो एक-दूसरे के साथ खड़ी हैं। सुले ने कहा कि यह एकजुटता लोकतंत्र को बचाने के लिए है, न कि सत्ता के लिए। उन्होंने हाल के उपचुनावों का जिक्र किया, जहां गठबंधन ने सत्ताधारी दल को चुनौती दी। सुले ने कहा कि परिवारवाद का अभिमान इसलिए है क्योंकि यह जनता की पसंद को मजबूत बनाता है। बहस के दौरान सुले ने सत्ताधारी दल पर आरोप लगाया कि वे परिवारवाद को मुद्दा बनाकर विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा लोकतंत्र परिवार की भागीदारी से ही फलता-फूलता है। इस बयान ने सदन में करीब 10 मिनट का हंगामा पैदा किया, और स्पीकर को बीच में आना पड़ा।
सत्र के बाद सुले ने पत्रकारों से बात की, जहां उन्होंने अपने बयान को दोहराया। उन्होंने कहा कि परिवारवाद राजनीति का अभिन्न अंग है, और इसे कलंकित करने की साजिश हो रही है। सुले ने NCP-SCP की रणनीति पर कहा कि पार्टी महाराष्ट्र में मजबूत वापसी करेगी, और परिवार की एकता इसका आधार होगी। उन्होंने शरद पवार की स्वास्थ्य स्थिति का जिक्र किया, और कहा कि पिता की विरासत को आगे बढ़ाना उनका कर्तव्य है। सुले ने कहा कि अभिमान इसलिए है क्योंकि परिवार ने कभी सत्ता के लिए समझौता नहीं किया। इस बयान ने विपक्षी दलों में चर्चा छेड़ दी, और कई नेताओं ने समर्थन व्यक्त किया। सत्ताधारी दल ने इसे व्यक्तिगत रक्षा बताया, लेकिन सुले ने इसे सिद्धांतों पर आधारित कहा। चर्चा का व्यापक प्रभाव महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा, जो 2026 में होने हैं। NCP-SCP सुले को प्रमुख चेहरा बना रही है, और यह बयान पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भर सकता है। सुले ने बहस में कहा कि परिवारवाद से युवा नेतृत्व उभरता है, और NCP में कई युवा परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में निरंतरता के लिए परिवार आवश्यक है। सुले का बयान विपक्ष की आंतरिक मजबूती को दर्शाता है, जहां परिवारवाद को हथियार बनाया जा रहा है। सत्र के अन्य हिस्सों में बजट और विदेश नीति पर चर्चा हुई, लेकिन सुले का बयान प्रमुख रहा। NCP-SCP ने पार्टी मीटिंग में इस बयान को हाइलाइट किया, और सुले को बधाई दी।
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