प्रशासनिक कौशल और निडरता का पर्याय: लखीमपुर खीरी की डीएम रहीं दुर्गा शक्ति नागपाल अब संभालेंगी देवीपाटन मंडल की कमान।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा रविवार देर रात किए गए एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने नौकरशाही के गलियारों में हलचल तेज

By INA News Desk
Apr 20, 2026 - 14:21
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प्रशासनिक कौशल और निडरता का पर्याय: लखीमपुर खीरी की डीएम रहीं दुर्गा शक्ति नागपाल अब संभालेंगी देवीपाटन मंडल की कमान।
प्रशासनिक कौशल और निडरता का पर्याय: लखीमपुर खीरी की डीएम रहीं दुर्गा शक्ति नागपाल अब संभालेंगी देवीपाटन मंडल की कमान।
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  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस और विकासोन्मुखी विजन: मंडलायुक्त पद पर पदोन्नत हुईं IAS दुर्गा शक्ति नागपाल, प्रशासनिक गलियारों में बढ़ी हलचल

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा रविवार देर रात किए गए एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने नौकरशाही के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस फेरबदल के तहत 2010 बैच की वरिष्ठ और तेजतर्रार IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को उनके बेहतरीन कार्य प्रदर्शन का इनाम देते हुए एक महत्वपूर्ण पदोन्नति सौंपी गई है। लखीमपुर खीरी की जिला मजिस्ट्रेट (DM) के रूप में तैनात रहीं दुर्गा शक्ति नागपाल को अब देवीपाटन मंडल का नया मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) नियुक्त किया गया है। यह पदोन्नति न केवल उनके प्रशासनिक अनुभव पर शासन की मुहर है, बल्कि यह संकेत भी है कि सरकार उन्हें अब मंडल स्तर पर नीति निर्धारण और निगरानी की बड़ी भूमिका में देखना चाहती है। लखीमपुर खीरी जैसे चुनौतीपूर्ण और बड़े जिले में उनके कार्यकाल ने यह सिद्ध कर दिया कि वे जटिल परिस्थितियों में भी विकास और प्रशासन के बीच संतुलन बिठाने में माहिर हैं।

IAS दुर्गा शक्ति नागपाल का नाम भारतीय प्रशासनिक सेवा में साहस और ईमानदारी की मिसाल के रूप में जाना जाता है। दिल्ली के 'इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी' से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक करने वाली दुर्गा शक्ति ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में देश भर में 20वां स्थान प्राप्त किया था। उनके करियर की शुरुआत पंजाब कैडर से हुई थी, जहाँ उन्होंने मोहाली में एक बड़े भूमि घोटाले का पर्दाफाश कर अपनी कार्यशैली का परिचय दिया था। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश कैडर में आईं और गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में उप-जिलाधिकारी (SDM) के रूप में तैनात हुईं। नोएडा में उन्होंने अवैध रेत खनन माफियाओं के खिलाफ आधी रात को छापे मारकर और उनके सिंडिकेट को ध्वस्त करके पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। हालांकि, इस दौरान उन्हें राजनीतिक विरोध और निलंबन जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन वे कभी अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटीं। देवीपाटन मंडल के मंडलायुक्त के रूप में दुर्गा शक्ति नागपाल की नई पारी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देवीपाटन मंडल में गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर जैसे जिले शामिल हैं, जो भौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इन जिलों में तराई क्षेत्र की चुनौतियां, बाढ़ की समस्या और शिक्षा व स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार की अपार संभावनाएं हैं। एक अनुभवी प्रशासक के रूप में दुर्गा शक्ति से उम्मीद की जा रही है कि वे मंडल स्तर पर इन जिलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेंगी। लखीमपुर खीरी में उनके डीएम रहने के दौरान बाढ़ राहत कार्यों और कृषि सुधारों में आई तेजी को देखते हुए शासन ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि वे मंडल के चारों जिलों के विकास कार्यों को नई दिशा दे सकें।

  • चुनौतियों को अवसर में बदलने वाली अधिकारी

दुर्गा शक्ति नागपाल की पहचान एक ऐसे अधिकारी की रही है जो सीधे जनसंपर्क और स्थल निरीक्षण पर विश्वास रखती हैं। नोएडा के रेत माफियाओं से लोहा लेना हो या बांदा और लखीमपुर खीरी में जन-समस्याओं का समाधान, उन्होंने हर जगह अपनी सक्रियता से व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन लाने का प्रयास किया है। लखीमपुर खीरी जिले में दुर्गा शक्ति नागपाल का कार्यकाल कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। तराई के इस महत्वपूर्ण जिले में गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान से लेकर कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने तक, उन्होंने हर मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत रखी। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण के लिए उनके द्वारा चलाए गए अभियानों ने जिले के स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार किया। उनके विजन ने लखीमपुर खीरी में सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता को सुनिश्चित किया, जिससे भ्रष्टाचार के मामलों में कमी आई। अब देवीपाटन मंडल के कमिश्नर के रूप में वे चार जिलों की कमान संभालेंगी, जहाँ उन्हें विकास परियोजनाओं की निगरानी के साथ-साथ मंडल के चारों जिलाधिकारियों के कार्यों का मार्गदर्शन भी करना होगा।

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि दुर्गा शक्ति नागपाल की यह पदोन्नति उनके दीर्घकालिक करियर के लिए एक मील का पत्थर है। मंडलायुक्त का पद एक ऐसा पद होता है जहाँ अधिकारी को न केवल प्रशासन बल्कि विकास प्राधिकरणों और पंचायती राज संस्थाओं के कार्यों का भी समन्वय करना होता है। दुर्गा शक्ति ने अपने पिछले अनुभवों से यह साबित किया है कि वे 'रूल बुक' के अनुसार काम करने वाली अधिकारी हैं और किसी भी प्रकार के दबाव के आगे झुकना उनके स्वभाव में नहीं है। देवीपाटन मंडल के गोंडा स्थित मुख्यालय से अब वे इस पूरे क्षेत्र के विकास की रूपरेखा तैयार करेंगी, जो कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास के सरकारी लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक होगा। दुर्गा शक्ति नागपाल की इस नई नियुक्ति से न केवल प्रशासन में सख्ती आने की उम्मीद है, बल्कि आम जनता में भी यह विश्वास जगा है कि उनके क्षेत्रों में अब विकास कार्यों में तेजी आएगी। उनकी छवि एक ऐसी अधिकारी की है जो विवादों से घबराने के बजाय उन्हें हल करने में यकीन रखती हैं। लखीमपुर खीरी से विदा होते समय वहां के लोगों ने उन्हें एक संवेदनशील और न्यायप्रिय अधिकारी के रूप में याद किया। अब देवीपाटन मंडल का प्रशासनिक अमला उनके नेतृत्व में एक नई कार्यसंस्कृति को अपनाने के लिए तैयार है। यह देखना रोमांचक होगा कि वे अपनी इस नई और बड़ी भूमिका में विकास के किन नए प्रतिमानों को स्थापित करती हैं।

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