Deoband: अभिभावकों को लूटने का सीजन शुरू- महंगी फीस, एनुअल फीस, डेवलेपमेंट फीस देने के बाद स्कूलों से ही महंगी किताबें, स्टेशनरी और यूनिफार्म खरीदने का दबाव। 

हर साल की तरह इस साल भी बच्चो के एडमिशन व क्लासेज बढ़ती हैं और फिर वही पिछले साल में पढ़ाई गई किताबो को दोबारा नही पढाया जाता

Mar 31, 2026 - 11:04
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Deoband: अभिभावकों को लूटने का सीजन शुरू- महंगी फीस, एनुअल फीस, डेवलेपमेंट फीस देने के बाद स्कूलों से ही महंगी किताबें, स्टेशनरी और यूनिफार्म खरीदने का दबाव। 
अभिभावकों को लूटने का सीजन शुरू- महंगी फीस, एनुअल फीस, डेवलेपमेंट फीस देने के बाद स्कूलों से ही महंगी किताबें, स्टेशनरी और यूनिफार्म खरीदने का दबाव। 

देवबन्द: हर साल की तरह इस साल भी बच्चो के एडमिशन व क्लासेज बढ़ती हैं और फिर वही पिछले साल में पढ़ाई गई किताबो को दोबारा नही पढाया जाता बल्कि नई किताबो का दबाव अभिभावकों पर डाल दिया जाता है लेकिन जिम्मेदार पद पर बैठे लोग आंख बंद कर लेते है!आज निजी स्कूल हर साल की तरह इस साल भी अभिभावकों पर महंगी किताबें और यूनिफार्म खरीदने का दबाव बना रहे हैं। महंगी ट्यूशन फीस, एनुअल फीस, डेवलेपमेंट फीस देने के बाद स्कूलों से ही महंगी किताबें, स्टेशनरी और यूनिफार्म खरीदने का दबाव सीधे-सीधे अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा है। इससे उनका पूरा बजट ही गड़बड़ा रहा है।अभिभावकों को होने वाली पर परेशानियों की शिकायतों के बाद भी कोई सुध नहीं ली जाती। हर साल शिकायते होती है लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं होती! जबकि खुले तौर पर यह काम हो रहा है। शिक्षा मंत्री से लेकर जिम्मेदारो की चुप्पी से निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों की परेशानी बढ़ रही है।अभिभावकों का कहना है कि निदेशालय की सह के कारण ही स्कूल प्रत्येक वर्ष मंजूरी न मिलने के बावजूद फीस में बढ़ोत्तरी करते रहते हैं। हद तो ये है कि स्कूलों के अंदर बकायदा स्टाल लगवाकर विशिष्ट विक्रेताओं की किताबें और यूनिफार्म बेची जा रही है।

स्कूल जिले के कुछ निजी स्कूलों ने एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए शिक्षा सत्र में स्कूल फीस में काफी बढ़ोतरी करने के साथ ही एनसीईआरटी की जगह प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें लगाने से अभिभावकों की दिक्कत बढ़ गई है। स्कूलों की मनमानी के विरोध में कुछ जगह बैठेके भी हुई और अभिभावकों ने कहाकि जब पेपर एनसीईआरटी की किताबों के सिलेबस से आता है तो फिर स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें क्यों लगाई जा रही हैं। वैसे भी प्राइवेट प्रकाशकों की किताबों की कीमत एनसीईआरटी की किताबों से काफी ज्यादा है। कुल मिलाकर एक बार फिर अभिभावको को लूटने का जाल बुना जा चुका है है और संबंधित विभाग के मंत्री व अधिकारी एक बार फिर आंख बंद कर सब कुछ होते हुए देखते रह जाएंगे।

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