Trending: भारत का पहला सिल्वर नोटिस, CBI ने इंटरपोल के जरिए वीजा धोखाधड़ी और क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में अपराधियों की संपत्ति पर नकेल कसी

इंटरपोल ने जनवरी 2025 में सिल्वर नोटिस की शुरुआत की, जो इसके नौ रंग-कोडित नोटिसों में नवीनतम है। यह नोटिस विशेष रूप से अपराधियों की अवैध संपत्तियों को ट्रैक करने के लिए ...

May 28, 2025 - 22:30
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Trending: भारत का पहला सिल्वर नोटिस, CBI ने इंटरपोल के जरिए वीजा धोखाधड़ी और क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में अपराधियों की संपत्ति पर नकेल कसी
Photo: Social Media

नई दिल्ली : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन (इंटरपोल) के सहयोग से भारत के पहले दो सिल्वर नोटिस जारी करवाए हैं। यह नोटिस वीजा धोखाधड़ी और क्रिप्टोकरेंसी घोटाले से जुड़े दो भगोड़े अपराधियों, शुभम शोकीन और अमित मदनलाल लखनपाल, की वैश्विक संपत्तियों को ट्रैक करने के लिए हैं। सिल्वर नोटिस, जो जनवरी 2025 में इंटरपोल द्वारा शुरू किया गया एक नया उपकरण है, का उद्देश्य अपराधियों की अवैध संपत्तियों, जैसे संपत्ति, वाहन, बैंक खाते और व्यवसायों को ढूंढना और जब्त करना है। इस कदम को भारत की सीमा-पार वित्तीय अपराधों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

सिल्वर नोटिस: एक नया हथियार

इंटरपोल ने जनवरी 2025 में सिल्वर नोटिस की शुरुआत की, जो इसके नौ रंग-कोडित नोटिसों में नवीनतम है। यह नोटिस विशेष रूप से अपराधियों की अवैध संपत्तियों को ट्रैक करने के लिए बनाया गया है, जो धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, नशीली दवाओं की तस्करी, और पर्यावरणीय अपराधों जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ी हो सकती हैं। यह 51 देशों के साथ एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया गया है, जो नवंबर 2025 तक चलेगा। प्रत्येक भागीदार देश को नौ सिल्वर नोटिस जारी करने की अनुमति है, और भारत ने इस अवसर का उपयोग दो बड़े मामलों में किया है।

CBI, जो भारत में इंटरपोल की नोडल एजेंसी है, ने 23 मई को पहला सिल्वर नोटिस शुभम शोकीन के खिलाफ और 26 मई को अमित मदनलाल लखनपाल के खिलाफ जारी करवाया। यह नोटिस 196 सदस्य देशों को भेजे जाते हैं, ताकि अपराधियों की संपत्तियों की जानकारी साझा की जा सके और उनकी जब्ती में सहायता मिले।

शुभम शोकीन मामला: वीजा धोखाधड़ी और दुबई में संपत्ति

पहला सिल्वर नोटिस शुभम शोकीन के खिलाफ है, जो दिल्ली में फ्रांसीसी दूतावास में वीजा और स्थानीय कानून अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। CBI के अनुसार, सितंबर 2019 से मई 2022 तक, शोकीन ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर शेंगेन वीजा जारी करने में अवैध भुगतान लिया, जो प्रति आवेदक 15 लाख से 45 लाख रुपये तक था। इस अवैध आय से उन्होंने दुबई में 7,760,500 दिरहम (लगभग 15.73 करोड़ रुपये) की छह अचल संपत्तियां खरीदीं।

CBI ने पहले शोकीन के खिलाफ एक ब्लू नोटिस जारी करवाया था, जिसका उद्देश्य उनकी पहचान, स्थान, या गतिविधियों के बारे में जानकारी एकत्र करना था। अब सिल्वर नोटिस के जरिए उनकी विदेशी संपत्तियों को ट्रैक करने और जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह कदम भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई भगोड़े आर्थिक अपराधी अपनी अवैध कमाई को विदेशी टैक्स हेवन्स में छिपाते हैं।

अमित मदनलाल लखनपाल: क्रिप्टोकरेंसी घोटाला

दूसरा सिल्वर नोटिस प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मांग पर अमित मदनलाल लखनपाल के खिलाफ जारी किया गया है। लखनपाल ने कथित तौर पर भारत में गैर-मान्यता प्राप्त क्रिप्टोकरेंसी ‘MTC’ बनाई और बिना सरकारी या भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के निवेशकों से 113.10 करोड़ रुपये एकत्र किए। उन्होंने निवेशकों को गुमराह करने के लिए खुद को वित्त मंत्रालय का अधिकृत प्रतिनिधि बताया। इस धन को उन्होंने हड़प लिया और निवेशकों को वादा किए गए रिटर्न नहीं दिए।

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इस सिल्वर नोटिस का उद्देश्य लखनपाल की वैश्विक संपत्तियों को ढूंढना और उनकी निगरानी करना है। इससे पहले, उनके खिलाफ एक रेड नोटिस भी जारी किया गया था, जो उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के लिए था। सिल्वर नोटिस इस मामले में एक अतिरिक्त उपकरण है, जो उनकी अवैध संपत्तियों को जब्त करने में मदद करेगा।

भारत ने सिल्वर नोटिस की अवधारणा को वास्तविकता में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2015 में, CBI ने नई दिल्ली में इंटरपोल ग्लोबल फोकल पॉइंट कॉन्फ्रेंस ऑन एसेट रिकवरी का आयोजन किया था, जहां इस नोटिस की चर्चा शुरू हुई थी। 2022 में, भारत द्वारा आयोजित इंटरपोल जनरल असेंबली में भी सिल्वर नोटिस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा था कि यह नोटिस जटिल मामलों में वास्तविक समय में सूचना साझा करने और संपत्ति ट्रैकिंग में मूल्य जोड़ सकता है।

भारत उन 51 देशों में शामिल है, जो इस पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। अन्य देशों में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, और चीन शामिल हैं। यह प्रोजेक्ट 500 नोटिसों तक सीमित है, और प्रत्येक देश को नौ नोटिस जारी करने की अनुमति है। भारत ने CBI, ईडी, और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की ओर से कई अन्य मामलों में भी सिल्वर नोटिस के लिए अनुरोध प्रस्तुत किए हैं।

सिल्वर नोटिस का कार्य और प्रभाव

सिल्वर नोटिस का मुख्य उद्देश्य अपराधियों की संपत्तियों को ढूंढना, उनकी पहचान करना, और उनकी निगरानी करना है। यह नोटिस देशों को द्विपक्षीय सहयोग के लिए प्रोत्साहित करता है, ताकि राष्ट्रीय कानूनों के तहत संपत्तियों की जब्ती या वसूली की जा सके। इंटरपोल के महासचिव वाल्डेसी उरक्विजा ने कहा, “99% आपराधिक संपत्तियां अभी भी अप्राप्त हैं। सिल्वर नोटिस अपराधियों के वित्तीय लाभ को लक्षित करके सीमा-पार संगठित अपराधों से लड़ने का एक शक्तिशाली तरीका है।”

पायलट चरण के दौरान, सिल्वर नोटिस की जानकारी को इंटरपोल की वेबसाइट पर सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, और प्रत्येक नोटिस की समीक्षा इंटरपोल के नियमों के अनुपालन के लिए की जाएगी, ताकि इसका उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए न हो।

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