Bihar: पहले दोनों किडनी गवाईं, फिर मिली मौत, नहीं मिला तो न्याय, पढ़िए मुजफ्फरपुर की सुनीता की दर्दनाक दास्तान...
झोला छाप डॉक्टर ने गर्भाशय के ऑपरेशन के बहाने सुनीता(Sunita) की किडनी(Kidney) निकाल ली थी। उसके बाद से ही उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उसकी मौत के साथ ही ये मामला फिर से सुर्खियों में है।
Muzaffarpur News INA.
Muzaffarpur Kidney Case..
बिहार के मुजफ्फरपुर(Muzaffarpur) चर्चित किडनी(Kidney) कांड की पीड़िता सुनीता(Sunita) ने आखिरकार दम तोड़ दिया। अस्पताल में इलाज के दौरान जिंदगी से जंग हार गई सुनीता(Sunita) और उनकी मौत हो गई। बता दें कि झोला छाप डॉक्टर ने गर्भाशय के ऑपरेशन के नाम पर सुनीता(Sunita) की किडनी(Kidney) गायब कर दी थी। इसके बाद मुजफ्फरपुर(Muzaffarpur) SKMCH में उनका इलाज किया गया और लगभग दो साल से उनका इलाज चल रहा था लेकिन उसे बचाया न जा सका। साल 2022 में झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में अपनी दोनों किडनी(Kidney) गंवाने वाली सुनीता(Sunita) देवी की आखिरकार मौत हो गई है।
एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर(Muzaffarpur) में सोमवार की दोपहर को आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। स्थानीय लोगों में आक्रोश है। झोला छाप डॉक्टर ने गर्भाशय के ऑपरेशन के बहाने सुनीता(Sunita) की किडनी(Kidney) निकाल ली थी। उसके बाद से ही उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उसकी मौत के साथ ही ये मामला फिर से सुर्खियों में है। इस मामले में डॉक्टर आरके सिंह मुख्य आरोपी हैं, जो घटना के बाद से फरार हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया और कोर्ट के आदेश पर घर की कुर्की भी की, लेकिन अभी तक वह पुलिस की पकड़ से बाहर है। जबकि डॉक्टर पवन कुमार को दोषी ठहराते हुए 7 साल की सजा सुनाई जा चुकी है।
मुख्य आरोपी का फरार रहना कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना की शुरुआत जुलाई, 2022 में हुई, जब सकरा थाना क्षेत्र की 35 वर्षीय सुनीता(Sunita) देवी को पेट में दर्द की शिकायत हुई। सुनीता(Sunita) को परिजनों ने डॉक्टर पवन कुमार के क्लिनिक लाया। डॉक्टर ने गर्भाशय निकालने का ऑपरेशन करने की सलाह दी और 3 सितंबर, 2022 को बरियारपुर स्थित शुभ कांत क्लिनिक में ऑपरेशन कर दिया। लेकिन दो दिन बाद ही सुनीता(Sunita) की हालत बिगड़ गई और जांच के बाद पता चला कि ऑपरेशन के दौरान उसकी दोनों किडनी(Kidney) निकाल ली गई थी। सुनीता(Sunita) के मामले ने स्वास्थ्य तंत्र की कमियों को उजागर किया है, जिसमें झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध क्लिनिकों की भरमार से लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। सुनीता(Sunita) देवी की मौत की खबर मुजफ्फरपुर(Muzaffarpur) समेत पूरे राज्य में सनसनी की तरह फैल गई है।
इस दुखद घटना ने एक बार फिर से राज्य में मेडिकल अपराधों और अवैध ट्रांसप्लांट रैकेट की ओर ध्यान खींचा है। जनता अब सवाल कर रही है कि आखिर कब तक इस तरह की घटनाओं में मासूम लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे? कब तक ऐसे अपराधी कानून की गिरफ्त से दूर रहेंगे? सुनीता(Sunita) की मौत से सवाल उठता है कि किडनी(Kidney) निकालने जैसी गंभीर घटना के बाद भी वो न्याय और समुचित इलाज से वंचित क्यों रही? उसकी दोनों किडनी(Kidney) के बिना जीवित रहने की जद्दोजहद और इलाज की प्रक्रिया में देरी के चलते उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही। एसकेएमसीएच में भर्ती रहने के दौरान भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। सुनीता(Sunita) की मौत के साथ ही किडनी(Kidney) तस्करी के बढ़ते मामलों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। क्या नर्सिंग होम और निजी क्लिनिक का बढ़ता जाल आम जनता के लिए खतरनाक साबित हो रहा है?
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