Hardoi: वट सावित्री व्रत पर आस्था का सैलाब, सुहागिनों ने बरगद की पूजा कर मांगा अखंड सौभाग्य।
ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार को संडीला क्षेत्र पूरी तरह श्रद्धा और भक्ति में डूबा नजर आया। वट सावित्री
रिपोर्ट- मुकेश सिंह सोमवंशी
संडीला, हरदोई। ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार को संडीला क्षेत्र पूरी तरह श्रद्धा और भक्ति में डूबा नजर आया। वट सावित्री व्रत को लेकर सुबह से ही मंदिरों और पूजा स्थलों पर सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शीतला माता मंदिर, स्टेशन रोड मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं ने बरगद के वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की।
सुहागिन महिलाएं पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार में पूजा स्थलों पर पहुंचीं। हाथों में पूजा की थाली और मन में अटूट आस्था लिए महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर रक्षा सूत्र बांधा तथा सावित्री-सत्यवान की कथा सुनकर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की। पूरे दिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर धार्मिक परंपराओं का पालन किया। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
पूजा के दौरान महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से कथा श्रवण और पूजा कार्यक्रम आयोजित किए गए। महिलाओं ने बताया कि वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
क्या है वट सावित्री व्रत की मान्यता?
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, त्याग और अटल संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं। बरगद के वृक्ष को अमरत्व, दीर्घायु और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सुख और खुशहाली बनी रहती है तथा परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में महिलाएं श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत करती हैं।
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