Baitul : बैतूल में दूषित पानी का संकट- ग्राम पंचायत बघोली में सरपंच पति की तानाशाही, ग्रामीण बीमार

लोहारिया गांव में नल-जल योजना की पाइपलाइन खराब वाल्वों के कारण नालियों का गंदा पानी सप्लाई कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी को पीने से लोग बीमार हो

Sep 16, 2025 - 19:55
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Baitul : बैतूल में दूषित पानी का संकट- ग्राम पंचायत बघोली में सरपंच पति की तानाशाही, ग्रामीण बीमार
बैतूल में दूषित पानी का संकट- ग्राम पंचायत बघोली में सरपंच पति की तानाशाही, ग्रामीण बीमार

Report : शशांक सोनकपुरिया, बैतूल- मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में स्वास्थ्य विभाग शुद्ध पेयजल के लिए जागरूकता फैला रहा है, लेकिन जिला मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बघोली के लोहारिया गांव में ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।नल-जल योजना की पाइपलाइन में नालियों का गंदा पानी और कीचड़ मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच पति की तानाशाही और सरपंच-सचिव की मिलीभगत से यह समस्या बनी हुई है, जिससे गांव में बीमारियां फैल रही हैं।

नल-जल योजना में गड़बड़ी

लोहारिया गांव में नल-जल योजना की पाइपलाइन खराब वाल्वों के कारण नालियों का गंदा पानी सप्लाई कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी को पीने से लोग बीमार हो रहे हैं।नल-जल योजना की मरम्मत के लिए लाखों रुपये का बजट आया था, लेकिन सरपंच पति और तत्कालीन सचिव ने कथित तौर पर धन की बंदरबांट की। मरम्मत का कोई काम नहीं हुआ, जिसके चलते पाइपलाइन से दूषित पानी आ रहा है।

ग्रामीणों की मुख्य शिकायतें

  • नल-जल पाइपलाइन में नालियों का गंदा पानी।

  • सरपंच पति की तानाशाही, ग्रामीणों को धमकी।

  • मरम्मत के लिए आए बजट का दुरुपयोग।

  • पीएचई विभाग की उदासीनता, कोई सुधार नहीं।

सरपंच पति की तानाशाही

ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच पति पंचायत के कामकाज पर हावी हैं और ग्रामीणों को धमकाते हैं। शिकायत करने वालों की कोई सुनवाई नहीं हो रही। पहले भी कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई अधिकारी गांव नहीं पहुंचा।ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच पति की तानाशाही के कारण उनकी समस्याएं अनसुनी रह रही हैं।

पीएचई विभाग की लापरवाही

जब इस मामले को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के एसडीओ के सामने उठाया गया, तो उन्होंने ग्राम पंचायत को पत्र लिखकर सुधार के निर्देश दिए। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। दूषित पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों को डर है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो गांव में बीमारियों की महामारी फैल सकती है।

ग्रामीणों की मांग

महेंद्र सिंह पंवार (ग्रामीण) ने कहा, "हमें दूषित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है।सरपंच पति धमकी देते हैं, और कोई सुनवाई नहीं हो रही।" ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से इस मामले में जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो।

पीएचई विभाग का बयान

पीएचई विभाग के एसडीओ विवेक रामटेके ने बताया कि ग्राम पंचायत को सुधार के लिए पत्र लिखा गया है।उन्होंने दावा किया कि जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल आश्वासन है, और अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जिला कलेक्टर से उम्मीद

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर सरपंच और सचिव के भ्रष्टाचार की जांच नहीं हुई, तो गांव में स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब और कैसी कार्रवाई करता है।

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