यूनिटेक प्रमोटर्स पर ED का तीसरा चार्जशीट: 16,000 करोड़ के होमबायर्स फंड से 7,794 करोड़ का डायवर्शन, 29,800 खरीदारों की ठगी।

रियल एस्टेट जगत की दिग्गज कंपनी यूनिटेक लिमिटेड के प्रमोटर्स ने होमबायर्स से लिए गए पैसे का गलत इस्तेमाल कर एक बड़ा घोटाला किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में इस

Oct 5, 2025 - 13:31
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यूनिटेक प्रमोटर्स पर ED का तीसरा चार्जशीट: 16,000 करोड़ के होमबायर्स फंड से 7,794 करोड़ का डायवर्शन, 29,800 खरीदारों की ठगी।
यूनिटेक प्रमोटर्स पर ED का तीसरा चार्जशीट: 16,000 करोड़ के होमबायर्स फंड से 7,794 करोड़ का डायवर्शन, 29,800 खरीदारों की ठगी।

रियल एस्टेट जगत की दिग्गज कंपनी यूनिटेक लिमिटेड के प्रमोटर्स ने होमबायर्स से लिए गए पैसे का गलत इस्तेमाल कर एक बड़ा घोटाला किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में इस मामले में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने 29,800 से ज्यादा होमबायर्स से जमा कराए गए 16,075 करोड़ रुपये में से 7,794 करोड़ रुपये का डायवर्शन किया। यह रकम बेनामी कंपनियों और व्यक्तिगत खर्चों में उड़ाई गई। होमबायर्स को न तो फ्लैट का कब्जा मिला और न ही उनका पैसा लौटा। ईडी का यह एक्शन रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करने वालों के लिए चेतावनी का संदेश है। यह चार्जशीट 10 जुलाई 2025 को दिल्ली की एक विशेष मनी लॉन्ड्रिंग कोर्ट में दाखिल की गई।

यूनिटेक लिमिटेड एक समय भारत की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में शुमार थी। 1980 के दशक में स्थापित यह कंपनी दिल्ली-एनसीआर, गुरुग्राम, नोएडा और अन्य शहरों में लग्जरी प्रोजेक्ट्स विकसित करने के लिए जानी जाती थी। लेकिन 2010 के बाद कंपनी विवादों में घिर गई। होमबायर्स ने अपनी जिंदगी भर की कमाई इन प्रोजेक्ट्स में लगाई, लेकिन कंपनी ने वादे पूरे नहीं किए। ईडी की जांच के मुताबिक, प्रमोटर्स ने होमबायर्स को गुमराह रखा। प्रोजेक्ट्स की समय सीमा बीत जाने के बाद भी न कंस्ट्रक्शन पूरा हुआ और न ही रिफंड दिया गया। यह घोटाला 2017 से चल रहा है, जब दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने एफआईआर दर्ज की। बाद में सीबीआई और ईडी ने केस संभाला।

चार्जशीट में मुख्य आरोपी यूनिटेक के संस्थापक रामेश चंद्रा, उनके बेटे संजय चंद्रा, अजय चंद्रा और संजय की पत्नी प्रीति चंद्रा हैं। इसके अलावा शिवालिक वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, ओरम एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, यूनिटेक बिल्ड टेक लिमिटेड, यूनिटेक गोल्फ रिसॉर्ट्स लिमिटेड और रैंचरो सर्विसेज लिमिटेड जैसी कंपनियां भी आरोपी हैं। ईडी ने कहा कि रामेश चंद्रा और उनके परिवार ने साजिश रची। उन्होंने होमबायर्स और बैंकों से लिए गए पैसे को गैर-प्रोजेक्ट कार्यों में डाला। कुल 16,075.89 करोड़ रुपये में से 7,794.35 करोड़ रुपये का डायवर्शन हुआ। यह रकम बेनामी कंपनियों के जरिए लेयरिंग की गई, यानी धोई गई। कुछ पैसे विदेशी संपत्तियों में लगाए गए। उदाहरण के लिए, प्रीति चंद्रा ने डायवर्टेड फंड से दुबई में तीन फ्लैट खरीदे।

ईडी की जांच सीबीआई की एफआईआर पर आधारित है। सीबीआई ने 2020 में संजय चंद्रा और परिवार के खिलाफ नया केस दर्ज किया था, जिसमें कनारा बैंक को 198 करोड़ का चूना लगाने का आरोप था। लेकिन होमबायर्स घोटाले का केंद्र 2017 का मामला है। तब दिल्ली पुलिस ने संजय और अजय चंद्रा को गिरफ्तार किया। आरोप था कि गुरुग्राम के सेक्टर 70 में वाइल्डफ्लावर कंट्री प्रोजेक्ट के नाम पर 550 से ज्यादा खरीदारों को ठगा। कंपनी ने 94 करोड़ रुपये लिए, लेकिन सिर्फ लैंड फिलिंग और सीवर पिट्स बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया, जिसमें पाया गया कि 14,270 करोड़ में से 5,063 करोड़ का दुरुपयोग हुआ। ईडी ने अब तक 1,621.91 करोड़ के प्रॉसीड्स ऑफ क्राइम की पहचान की है। 21 अस्थायी अटैचमेंट ऑर्डर से 1,291 प्रॉपर्टीज अटैच की गईं, जिनकी कीमत बराबर है। एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इन्हें कन्फर्म किया।

इस घोटाले से प्रभावित होमबायर्स की संख्या भारी है। 29,800 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए, जो ज्यादातर मध्यम वर्ग के हैं। उन्होंने नोएडा, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा के प्रोजेक्ट्स जैसे यूनिटेक ग्रैंड, यूनिवर्ल्ड, यूनिटेक होराइजन, एंथिया और यूनिटेक स्पा में निवेश किया। कई ने लोन लिया, लेकिन प्रोजेक्ट रुक गए। नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने कई मामलों में कंपनी को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ रिफंड का आदेश दिया। लेकिन कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्रोजेक्ट के लिए 5 करोड़ जमा करने को कहा। 2020 में गुरुग्राम के 39 फ्लैटबायर्स को 2 करोड़ देने का आदेश आया। होमबायर्स एसोसिएशन ने कहा कि वे अब भी इंतजार कर रहे हैं। ईडी का एक्शन उनके लिए राहत है, क्योंकि अटैच्ड प्रॉपर्टीज से रिकवरी हो सकती है।

ईडी ने कहा कि प्रमोटर्स ने आपराधिक साजिश रची। उन्होंने को-कांस्पिरेटर्स के साथ मिलकर फंड्स को लेयर किया। कुछ पैसे साइप्रस जैसे टैक्स हेवन में भेजे गए। 2022 में ईडी ने 5,000 करोड़ के सिफनिंग की जांच की। संजय चंद्रा को 2017 में गिरफ्तार किया गया, लेकिन 2020 में मेडिकल ग्राउंड पर जमानत मिली। अजय चंद्रा भी जेल से बाहर हैं। ईडी ने दूसरी सप्लीमेंट्री कम्प्लेंट भी दाखिल की, जिसमें 105 आरोपी बनाए गए। जांच में पाया गया कि फंड्स का इस्तेमाल पर्सनल लग्जरी पर हुआ। होमबायर्स को प्रॉमिस्ड टाइमलाइन के बाद भी कुछ नहीं मिला। ईडी ने कहा कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का क्लासिक केस है, जहां निवेशकों की मेहनत की कमाई लूटी गई।

रियल एस्टेट सेक्टर में यह घोटाला एक सबक है। भारत में रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट) 2016 में लागू हुआ, लेकिन यूनिटेक जैसे पुराने केस इससे पहले के हैं। नया कानून प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन और ट्रांसपेरेंसी लाता है। लेकिन कई कंपनियां अभी भी देरी करती हैं। होमबायर्स को सलाह दी जाती है कि वे रेरा पोर्टल चेक करें, प्रोजेक्ट की वैलिडिटी देखें और लोन लेते समय सावधानी बरतें। ईडी का यह एक्शन अन्य कंपनियों के लिए चेतावनी है। जांच अधिकारी ने कहा कि वे और फंड्स रिकवर करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक के मैनेजमेंट को बदलने का आदेश दिया था, लेकिन प्रॉब्लम बनी हुई है।

होमबायर्स संगठनों ने ईडी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह कदम देर से आया, लेकिन सही है। कई खरीदारों ने अपनी कहानियां शेयर कीं। एक दिल्ली के निवासी ने बताया कि उन्होंने 2012 में फ्लैट बुक किया, 50 लाख दिए, लेकिन आज तक कब्जा नहीं मिला। ब्याज के साथ रकम अब 1 करोड़ हो गई। एक अन्य ने कहा कि लोन की ईएमआई अभी भी चुकाते हैं, लेकिन घर नहीं है। ईडी ने प्रॉपर्टीज अटैच कर होमबायर्स को राहत देने का वादा किया। कोर्ट ने चार्जशीट स्वीकार की है, सुनवाई जारी रहेगी।

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