EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ ब्याज दर 8 से 8.20 प्रतिशत तक घटाने पर विचार शुरू किया सीबीटी बैठक में फैसला संभव। 

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ जमा पर ब्याज दर में मामूली कटौती पर विचार शुरू किया है। वर्तमान में वित्त वर्ष

Feb 5, 2026 - 14:38
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EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ ब्याज दर 8 से 8.20 प्रतिशत तक घटाने पर विचार शुरू किया सीबीटी बैठक में फैसला संभव। 
EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ ब्याज दर 8 से 8.20 प्रतिशत तक घटाने पर विचार शुरू किया सीबीटी बैठक में फैसला संभव। 
  • प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड पर मंडराया खतरा ईपीएफ ब्याज दर में 0.05 से 0.25 प्रतिशत की कटौती प्रस्तावित
  • मार्च में होने वाली 239वीं सीबीटी बैठक में ईपीएफ ब्याज दर पर अंतिम मुहर लगेगी वेतन सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ जमा पर ब्याज दर में मामूली कटौती पर विचार शुरू किया है। वर्तमान में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ब्याज दर 8.25 प्रतिशत तय की गई है। प्रस्तावित कटौती से नई दर 8 प्रतिशत से 8.20 प्रतिशत के बीच हो सकती है। यह कटौती संगठन के कोष को सुरक्षित रखने के लिए विचाराधीन है। बढ़ते सदस्यों और पेमेंट दायित्वों के कारण कोष पर दबाव को कम करने का उद्देश्य है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत अधिक सदस्य जुड़ रहे हैं। इस वजह से पेमेंट बढ़ रहे हैं। दर में कटौती से कोष में न्यूनतम बफर बरकरार रखा जा सकेगा। अंतिम फैसला मार्च के पहले सप्ताह में 239वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में लिया जाएगा। फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमिटी फरवरी के अंतिम सप्ताह में बैठक कर सिफारिश करेगी। सिफारिश के बाद सीबीटी अनुमोदन देगी। इसके बाद वित्त मंत्रालय की मंजूरी ली जाएगी। श्रम मंत्रालय द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। ब्याज दर सदस्यों के खातों में मध्य वर्ष तक क्रेडिट की जाएगी।

  • वर्तमान ब्याज दर और पिछले वर्षों का विवरण

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ईपीएफ ब्याज दर 8.25 प्रतिशत तय की गई है। यह दर पिछले वर्ष की तरह बरकरार है। ब्याज दर की समीक्षा हर साल की जाती है। ब्याज मासिक रूप से चक्रवृद्धि आधार पर कैलकुलेट किया जाता है लेकिन वर्ष के अंत में क्रेडिट होता है। वित्त वर्ष 2023-24 में भी दर 8.25 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2022-23 में दर 8.15 प्रतिशत थी। ब्याज दर की घोषणा सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की सिफारिश पर होती है। दर को वित्त मंत्रालय अनुमोदित करता है। ब्याज दर अधिसूचित होने के बाद सदस्यों के खातों में जमा होती है। 2024-25 की दर को 33 करोड़ से अधिक खातों में क्रेडिट किया गया है। ब्याज दर सदस्य और नियोक्ता दोनों के योगदान पर लागू होती है।

  • ब्याज दर में कटौती के संभावित कारण

बढ़ते सदस्यों की संख्या से पेमेंट दायित्व बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत नए सदस्य जुड़ रहे हैं। कोष पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। कोष को सुरक्षित रखने और न्यूनतम बफर बनाए रखने के लिए दर में कटौती पर विचार है। निवेश रिटर्न के आधार पर दर तय की जाती है। फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमिटी निवेश रिटर्न का आकलन करेगी। बढ़े हुए पेमेंट से कोष की स्थिरता को ध्यान में रखा जा रहा है। दर में कटौती से कोष की गिरावट को रोका जा सकेगा। वेतन सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। वेतन सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने पर विचार है। इससे अधिक लोगों को कवरेज मिलेगा लेकिन पेमेंट बढ़ेंगे।

  • निर्णय प्रक्रिया और समय सीमा

फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमिटी फरवरी के अंतिम सप्ताह में बैठक करेगी। कमिटी निवेश रिटर्न के आधार पर ब्याज दर की सिफारिश करेगी। सिफारिश सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के सामने रखी जाएगी। 239वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक मार्च के पहले सप्ताह में होगी। बैठक में दर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अनुमोदन के बाद वित्त मंत्रालय की मंजूरी ली जाएगी। मंजूरी के बाद श्रम और रोजगार मंत्रालय अधिसूचना जारी करेगा। अधिसूचना के बाद ब्याज दर लागू होगी। ब्याज दर को सदस्यों के खातों में क्रेडिट किया जाएगा। प्रक्रिया मध्य वर्ष तक पूरी होने की उम्मीद है।

  • राजनीतिक कारकों का प्रभाव

आगामी चुनावों के कारण दर को 8.25 प्रतिशत बरकरार रखने का विकल्प भी है। पश्चिम बंगाल तमिलनाडु असम केरल और पुडुचेरी में चुनाव होने हैं। राजनीतिक मजबूरियों के कारण दर में कटौती नहीं की जा सकती। दर को तीसरे वर्ष लगातार बरकरार रखने का विचार है। चुनावी दबाव दर पर प्रभाव डाल सकता है। अंतिम निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा। दर को स्थिर रखने से सदस्यों को राहत मिलेगी।

  • वेतन सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव

वेतन सीमा को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने पर विचार है। इससे सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ेगा। अधिक कर्मचारियों को ईपीएफ में शामिल किया जा सकेगा। वेतन सीमा बढ़ने से पेमेंट दायित्व भी बढ़ेंगे। यह प्रस्ताव भी सीबीटी बैठक में चर्चा में रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह विचार उठा है। वेतन सीमा बढ़ने से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा।

  • प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों पर प्रभाव

प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी ईपीएफ पर निर्भर हैं। दर में कटौती से रिटायरमेंट फंड पर असर पड़ेगा। योगदान पर कम ब्याज मिलेगा। लंबे समय में कंपाउंडिंग प्रभाव कम होगा। 7 करोड़ से अधिक सदस्य प्रभावित होंगे। अधिकतर प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी हैं। दर में बदलाव से उनकी बचत प्रभावित होगी। ब्याज दर की समीक्षा हर वर्ष होती है।

  • ब्याज दर की गणना प्रक्रिया

ब्याज दर मासिक रूप से चक्रवृद्धि आधार पर कैलकुलेट होती है। मासिक क्लोजिंग बैलेंस पर ब्याज लगता है। पूरे वर्ष का ब्याज अंत में क्रेडिट होता है। 8.25 प्रतिशत दर पर मासिक ब्याज 0.6875 प्रतिशत के आसपास होता है। दर बदलने पर गणना नई दर के अनुसार होगी। ब्याज टैक्स फ्री है लेकिन कुछ शर्तों में टैक्स लग सकता है।

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