Sambhal: पूर्व चेयरपर्सन ने होली-ईद मिलन, गंगा-जमुनी तहज़ीब और चुनाव को लेकर खोले दिल के राज़।
सम्भल नगर पालिका की पूर्व चेयरपर्सन ने एक साक्षात्कार में बीते दिनों की यादें, मौजूदा हालात और भविष्य की राजनीति पर खुलकर बात की। उन्होंने
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल नगर पालिका की पूर्व चेयरपर्सन ने एक साक्षात्कार में बीते दिनों की यादें, मौजूदा हालात और भविष्य की राजनीति पर खुलकर बात की। उन्होंने साफ़ कहा कि उनके कार्यकाल में होली मिलन और ईद मिलन जैसे कार्यक्रम इसलिए शुरू किए गए थे ताकि हिंदू-मुस्लिम एकता मज़बूत हो और गंगा-जमुनी तहज़ीब को बढ़ावा मिले, लेकिन उनके बाद यह परंपरा खत्म कर दी गई।
पूर्व चेयरपर्सन तरन्नुम अकील ने कहा कि आज के दौर में ऐसे कार्यक्रमों की पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है। “जब हम साथ बैठते हैं, एक-दूसरे से मिलते हैं, तो मोहब्बत बढ़ती है। अफ़सोस की बात है कि यह सिलसिला आगे नहीं बढ़ाया गया,” उन्होंने कहा। इस परंपरा के खत्म होने की ज़िम्मेदारी उन्होंने अपने बाद आने वाले चेयरपर्सनों पर डाली और कहा कि अगर चेयरपर्सन चाहें तो ऐसे काम आसानी से हो सकते हैं। अपने कार्यकाल के विकास कार्यों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी गलियों में उनके नाम के बोर्ड और 20 साल पहले बनी सड़कें मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें काम करने की प्रेरणा अवाम के प्यार से मिली और शायद यही वजह रही कि उनके दौर में विकास दिखा। चुनाव लड़ने के सवाल पर पूर्व चेयरपर्सन ने साफ़ शब्दों में कहा, “अगर लोग कहेंगे तो मैं ज़रूर चुनाव लड़ूंगी। अवाम का हुक्म मेरे लिए सब कुछ है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें वोटों के साथ दुआएँ मिलीं, बुज़ुर्गों और माओं की दुआओं को वह अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी पूंजी मानती हैं। चेयरमैन चुनाव की तैयारियों पर उन्होंने कहा कि अभी कोई तैयारी नहीं है। “तैयारी अवाम करेगी। जब आप लोग कहेंगे, इंशाल्लाह अल्लाह ताला जिताएगा भी,” इसी भरोसे के साथ उन्होंने अपनी बात खत्म की। यह साक्षात्कार न सिर्फ़ बीते दौर की याद दिलाता है, बल्कि आने वाले नगर पालिका चुनावों के संकेत भी देता है।
What's Your Reaction?











