Hardoi News : पिहानी में 33 साल पुराने मारपीट मामले में पांच दोषियों को 5 वर्ष का कारावास

पीड़िता ने 19 दिसंबर 1991 को पिहानी थाने में तहरीर दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि ग्राम छतैया के निवासी कल्लू, रामकरन, सुरेंद्र, महेंद्र, और बलदेव ने उनके साथ...

Jul 4, 2025 - 21:39
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Hardoi News : पिहानी में 33 साल पुराने मारपीट मामले में पांच दोषियों को 5 वर्ष का कारावास

By INA News Hardoi.

हरदोई : जिले के पिहानी थाना क्षेत्र के ग्राम छतैया में 19 दिसंबर 1991 को हुई एक मारपीट की घटना ने हाल ही में सुर्खियां बटोरीं, जब इस मामले में पांच आरोपियों को न्यायालय ने सजा सुनाई। इस मामले में पीड़िता की शिकायत के आधार पर पिहानी थाने में मुकदमा संख्या 287/91 दर्ज किया गया था, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 34 (साझा इरादा), और 326 (खतरनाक हथियारों से गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत कार्रवाई की गई।

पीड़िता ने 19 दिसंबर 1991 को पिहानी थाने में तहरीर दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि ग्राम छतैया के निवासी कल्लू, रामकरन, सुरेंद्र, महेंद्र, और बलदेव ने उनके साथ मारपीट की। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त मुकदमा दर्ज किया। जांच के बाद, पुलिस ने आरोप पत्र तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।

मामले की सुनवाई के दौरान स्थानीय पुलिस और मॉनिटरिंग सेल ने प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप लंबे समय तक चले इस मुकदमे में अंततः फैसला सुनाया गया। 3 जुलाई 2025 को CJM न्यायालय, हरदोई ने पांचों आरोपियों कल्लू (पुत्र रामचरन), रामकरन (पुत्र रामचरन), सुरेंद्र (पुत्र जेजेराम), महेंद्र (पुत्र जेजेराम), और बलदेव (पुत्र रामदयाल) को दोषी ठहराया। प्रत्येक दोषी को 5 वर्ष के कारावास और 5000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई।

दोषी ठहराए गए सभी व्यक्ति ग्राम छतैया, थाना पिहानी, जनपद हरदोई के निवासी हैं। इनके नाम और पिता का विवरण निम्नलिखित है:

  1. कल्लू, पुत्र रामचरन
  2. रामकरन, पुत्र रामचरन
  3. सुरेंद्र, पुत्र जेजेराम
  4. महेंद्र, पुत्र जेजेराम
  5. बलदेव, पुत्र रामदयाल

पुलिस और अभियोजन की भूमिका

इस मामले में पुलिस और अभियोजन विभाग की सक्रियता उल्लेखनीय रही। "ऑपरेशन कन्विक्शन" अभियान के तहत पिहानी पुलिस और मॉनिटरिंग सेल ने साक्ष्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया और सशक्त पैरवी की, जिसके कारण 33 साल पुराने इस मामले में दोषियों को सजा दिलाने में सफलता मिली। यह कार्रवाई न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण रही, बल्कि यह भी दर्शाती है कि लंबे समय तक चलने वाले मामलों में भी पुलिस की प्रभावी कार्रवाई और अभियोजन की पैरवी से इंसाफ संभव है।

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