Trending News: 'मैं और आसिम मुनीर आखिरी लोग हैं जो विदेशों से कर्ज मांगेंगे ....' पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) का बड़ा बयान।
पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने देश की आर्थिक स्थिति और वैश्विक मंच पर उसकी छवि को लेकर एक महत्वपूर्ण....
Trending News: पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने देश की आर्थिक स्थिति और वैश्विक मंच पर उसकी छवि को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। शनिवार, 31 मई 2025 को इस्लामाबाद में एक राष्ट्रीय आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने कहा, "मैं और जनरल आसिम मुनीर (पाकिस्तान सेना प्रमुख) इस देश के आखिरी लोग हैं, जो दूसरे देशों में जाकर पैसे मांग रहे हैं। अब समय आ गया है कि पाकिस्तान के सभी नागरिक, व्यापारी, और संस्थाएं देश की तरक्की में योगदान दें।"
यह बयान न केवल पाकिस्तान की गंभीर आर्थिक चुनौतियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि सरकार अब विदेशी कर्ज पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ना चाहती है। शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) का यह बयान उस समय आया है, जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उच्च मुद्रास्फीति, बढ़ता विदेशी कर्ज, और घटते विदेशी मुद्रा भंडार ने देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ हाल ही में हुए 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज के बावजूद, पाकिस्तान को सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), और चीन जैसे देशों से बार-बार वित्तीय सहायता लेनी पड़ रही है। शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल के महीनों में इन देशों की यात्राएं की हैं, जहां उन्होंने आर्थिक सहायता और निवेश की अपील की थी।
इस्लामाबाद में आयोजित इस सम्मेलन में शहबाज ने देश के व्यापारियों, उद्योगपतियों, और नागरिकों से अपील की कि वे कर चोरी बंद करें, निवेश बढ़ाएं, और राष्ट्रीय विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान का भविष्य हमारी एकजुटता और सामूहिक प्रयासों पर निर्भर है। अब यह जिम्मेदारी केवल सरकार या सेना की नहीं, बल्कि हर पाकिस्तानी की है।"
- पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। 2025 तक, देश का विदेशी कर्ज 130 अरब डॉलर को पार कर चुका है, और अगले कुछ वर्षों में इसे 20 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज चुकाना है। मुद्रास्फीति की दर 20% से अधिक है, और पाकिस्तानी रुपये का अवमूल्यन लगातार जारी है। इसके अलावा, ऊर्जा संकट, बढ़ती बेरोजगारी, और खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट से 2024 में बाहर आने के बावजूद, पाकिस्तान को आतंकवादी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर अंकुश लगाने के लिए और कदम उठाने की जरूरत है। शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भरोसा जीतने के लिए पाकिस्तान को अपनी आर्थिक और प्रशासनिक प्रणाली में सुधार करना होगा।
- शहबाज और आसिम मुनीर की भूमिका
शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) का बयान में जनरल आसिम मुनीर का उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पाकिस्तान में सेना और सरकार के बीच गहरे गठजोड़ को दर्शाता है। जनरल मुनीर, जो नवंबर 2022 से पाकिस्तान सेना के प्रमुख हैं, ने देश की आर्थिक स्थिरता के लिए कई देशों के साथ कूटनीतिक चर्चाएं की हैं। सऊदी अरब और UAE जैसे देशों से निवेश और कर्ज के लिए उनकी यात्राएं चर्चा में रही हैं।
शहबाज का यह कहना कि "हम आखिरी लोग हैं जो पैसे मांग रहे हैं" एक तरह से सरकार और सेना की संयुक्त जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। हालांकि, यह बयान यह भी दर्शाता है कि दोनों नेतृत्व अब इस स्थिति से थक चुके हैं और देश के भीतर आर्थिक सुधारों को लागू करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं।
शहबाज के इस बयान ने पाकिस्तान में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हासिल की हैं। कुछ विश्लेषकों ने इसे एक सकारात्मक कदम माना, जो आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय एकता पर जोर देता है। एक वरिष्ठ पत्रकार, हामिद मीर, ने कहा, "यह पहली बार है जब कोई पाकिस्तानी नेता इतने खुले तौर पर विदेशी सहायता पर निर्भरता को खत्म करने की बात कर रहा है। लेकिन इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी।"
विपक्षी दलों, विशेष रूप से इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI), ने इस बयान को "खोखला" करार दिया। PTI प्रवक्ता ने कहा, "शहबाज सरकार की नीतियों ने ही अर्थव्यवस्था को इस स्थिति में पहुंचाया है। अब वे जनता से योगदान मांग रहे हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन पर कोई जवाब नहीं दे रहे।"
शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने अपने संबोधन में कई सुधारों की बात की, जैसे कर आधार को बढ़ाना, सरकारी खर्चों में कटौती, और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देना। हालांकि, इन सुधारों को लागू करना आसान नहीं होगा। पाकिस्तान में कर चोरी एक बड़ी समस्या है, और अनुमान के अनुसार, केवल 2% आबादी ही आयकर देती है। इसके अलावा, ऊर्जा क्षेत्र में सब्सिडी और सरकारी उपक्रमों के घाटे ने आर्थिक बोझ बढ़ाया है।
शहबाज ने यह भी कहा कि सरकार निर्यात बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठा रही है। हाल ही में, पाकिस्तान ने चीन और सऊदी अरब के साथ व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ा सकते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए भ्रष्टाचार पर अंकुश और पारदर्शी नीतियां जरूरी हैं।
शहबाज का यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक संदेश है कि पाकिस्तान अब अपनी छवि को "कर्ज मांगने वाला देश" से बदलना चाहता है। भारत और अन्य पड़ोसी देशों ने लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और आर्थिक अस्थिरता के लिए आलोचना की है। शहबाज का यह बयान भारत के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत ने हाल ही में अल्जीरिया में एक सम्मेलन में पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट में वापस डालने की मांग की थी।
शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) का यह बयान न केवल पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि सरकार और सेना अब विदेशी सहायता पर निर्भरता को कम करने के लिए गंभीर हैं।
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