कर्नाटक में 'पावर ब्रेकफास्ट 2.0': सीएम पद की खींचतान के बीच डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया की मेजबानी की, पार्टी हाईकमान के निर्देश पर एकता का संदेश। 

कर्नाटक की सियासत में जारी सीएम पद को लेकर खींचतान के बीच डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने 2 दिसंबर 2025 को अपने बेंगलुरु

Dec 2, 2025 - 15:56
 0  58
कर्नाटक में 'पावर ब्रेकफास्ट 2.0': सीएम पद की खींचतान के बीच डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया की मेजबानी की, पार्टी हाईकमान के निर्देश पर एकता का संदेश। 
कर्नाटक में 'पावर ब्रेकफास्ट 2.0': सीएम पद की खींचतान के बीच डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया की मेजबानी की, पार्टी हाईकमान के निर्देश पर एकता का संदेश। 

कर्नाटक की सियासत में जारी सीएम पद को लेकर खींचतान के बीच डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने 2 दिसंबर 2025 को अपने बेंगलुरु स्थित निवास पर सीएम सिद्धारमैया की मेजबानी की, जो 'पावर ब्रेकफास्ट 2.0' के रूप में चर्चित हो गई। यह बैठक कांग्रेस हाईकमान के निर्देशों के तहत आयोजित की गई, जहां दोनों नेताओं ने राज्य की प्राथमिकताओं पर चर्चा की और पार्टी की एकजुटता का संदेश दिया। सिद्धारमैया ने शिवकुमार के आवास पर पहुंचकर नाश्ते में हिस्सा लिया, जो शनिवार को सिद्धारमैया के आवास पर हुई पहली बैठक का दूसरा दौर था। शिवकुमार ने बैठक के बाद कहा कि यह चर्चा राज्य के विकास और कांग्रेस के विजन पर केंद्रित रही, और दोनों नेता भाईचारे की तरह काम करते रहेंगे। यह बैठक राज्य विधानसभा के विंटर सेशन से ठीक पहले हुई, जो 8 दिसंबर से बेलगावी में शुरू होगा, और इसका उद्देश्य आंतरिक मतभेदों को सुलझाना था। कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच अनौपचारिक पावर शेयरिंग एग्रीमेंट को लेकर अटकलें तेज हैं, जो 2023 विधानसभा चुनावों के बाद से चली आ रही हैं।

पहली 'पावर ब्रेकफास्ट' 29 नवंबर 2025 को सिद्धारमैया के कावेरी आवास पर हुई थी, जहां हाईकमान ने दोनों को एकजुट होने के निर्देश दिए थे। उस बैठक में सिद्धारमैया के कानूनी सलाहकार एएस पोनन्ना भी मौजूद थे, और शिवकुमार ने इसे 'उत्पादक चर्चा' बताया, जो कर्नाटक की प्राथमिकताओं और आगे की राह पर केंद्रित रही। सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि उनका रुख अपरिवर्तित है, और वे पूरे पांच वर्ष के लिए सीएम बने रहेंगे। लेकिन शिवकुमार के समर्थकों ने हाल ही में आवाज बुलंद की है कि सिद्धारमैया के 2.5 वर्ष पूरे होने के बाद पद का आदान-प्रदान होना चाहिए। यह दावा 2023 चुनावों के बाद कथित रोटेशनल फॉर्मूले पर आधारित है, जहां कांग्रेस ने सत्ता हासिल करने के बाद अनौपचारिक समझौता किया था। 20 नवंबर 2025 को सरकार के कार्यकाल के आधे समय पूरे होने के बाद यह विवाद और तेज हो गया, जब शिवकुमार के समर्थक सीएम पद के लिए दबाव बनाने लगे।

2 दिसंबर की बैठक में सिद्धारमैया शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित निवास पर पहुंचे, जहां नाश्ते में इडली-समोसा, उपमा और नाटी चिकन जैसे व्यंजन परोसे गए। बैठक करीब एक घंटे चली, और उसके बाद दोनों ने एकजुटता का संदेश दिया। शिवकुमार ने कहा कि वे और सिद्धारमैया भाइयों की तरह काम कर रहे हैं, और मुद्दा केवल उनके बीच का है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार में कोई गुटबाजी नहीं है, और वे जनता से किए वादों को पूरा करने के लिए एक साथ हैं। सिद्धारमैया ने भी कहा कि वे हाईकमान के फैसले का पालन करेंगे, और दिल्ली यात्रा की कोई योजना अभी नहीं है। बैठक के दौरान दोनों ने राज्य के विकास, अच्छे शासन और कांग्रेस के विजन पर चर्चा की, लेकिन सीएम पद के रोटेशन पर कोई स्पष्ट फैसला नहीं हुआ। हाईकमान ने दोनों को निर्देश दिया था कि वे नियमित रूप से मिलें और मतभेद सुलझाएं, ताकि विंटर सेशन में एकजुट दिखें।

कर्नाटक कांग्रेस में यह खींचतान 2023 विधानसभा चुनावों से जुड़ी है, जब पार्टी ने 135 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी। चुनाव के बाद सिद्धारमैया को सीएम बनाया गया, जबकि शिवकुमार को डिप्टी सीएम का पद मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाईकमान ने 2.5 वर्ष के रोटेशनल फॉर्मूले पर सहमति जताई थी, लेकिन अब सिद्धारमैया पूर्ण कार्यकाल का दावा कर रहे हैं। शिवकुमार के समर्थक, जो पार्टी के अंदर मजबूत हैं, ने हाल ही में पद परिवर्तन की मांग तेज कर दी, जिससे आंतरिक कलह बढ़ गई। 20 नवंबर को आधे कार्यकाल पूरे होने के बाद यह विवाद चरम पर पहुंचा, और हाईकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा कि दोनों नेता ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर मीटिंग्स करेंगे, और सभी मुद्दों पर चर्चा होगी। गृह मंत्री जी परमेश्वरा ने भी कहा कि अलग-अलग आकांक्षाएं स्वाभाविक हैं, और वे सही समय पर व्यक्त होती हैं। बैठक के बाद शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि उन्होंने सिद्धारमैया की मेजबानी की, और यह चर्चा अच्छे शासन तथा राज्य के विकास पर केंद्रित रही। सिद्धारमैया ने भी कहा कि वे हाईकमान के निर्देशों का पालन करेंगे। लेकिन विपक्ष ने इस पर तंज कसा, और कहा कि कर्नाटक में केवल ब्रेकफास्ट मंत्रालय सक्रिय है, बाकी सब स्थायी उपवास पर हैं। जेडीएस नेता निखिल कुमारस्वामी ने कांग्रेस पर निशाना साधा, और कहा कि यह सत्ता संघर्ष प्रशासनिक मशीनरी को ठप कर रहा है। भाजपा ने दावा किया कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के विवाद से राज्य का प्रशासन पूरी तरह ढह गया है। लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया, और कहा कि सरकार मजबूत है, और 2028 में फिर सत्ता में लौटेगी।

यह बैठक विंटर सेशन से पहले महत्वपूर्ण है, जहां 8 दिसंबर से बेलगावी में विधानसभा शुरू होगी। सेशन में बजट, विकास योजनाओं और विपक्ष के हमलों का सामना करना पड़ेगा। हाईकमान ने दोनों को निर्देश दिया था कि वे एकजुट दिखें, ताकि पार्टी की छवि प्रभावित न हो। शिवकुमार ने कहा कि दिल्ली यात्रा अभी तय नहीं है, लेकिन यदि जरूरी हुआ तो जाएंगे। सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि जनादेश पांच वर्ष का है, न कि क्षणिक। लेकिन शिवकुमार के समर्थक रोटेशनल फॉर्मूले का हवाला देकर दबाव बना रहे हैं। जी परमेश्वरा जैसे अन्य दावेदार भी मैदान में हैं, जो दलित नेता के रूप में उभर रहे हैं। कर्नाटक सरकार के कार्यकाल के आधे समय में यह विवाद पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है। 2023 चुनावों में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर सत्ता हासिल की थी, लेकिन आंतरिक एकता बनाए रखना कठिन हो गया है। शिवकुमार, जो राज्य कांग्रेस प्रमुख भी हैं, ने कहा कि वे सिद्धारमैया के साथ टीम के रूप में काम करेंगे। बैठक में राज्य की प्राथमिकताओं जैसे विकास योजनाएं, जनकल्याण और चुनावी वादे पूरे करने पर फोकस रहा। दोनों ने कहा कि वे हाईकमान के फैसले का सम्मान करेंगे, और किसी भी 'भ्रम' को दूर करेंगे।

पहली बैठक के बाद शिवकुमार ने कहा था कि यह कर्नाटक की प्राथमिकताओं पर उत्पादक चर्चा थी। सिद्धारमैया ने जोर दिया कि वे पूर्ण कार्यकाल के लिए सीएम हैं। लेकिन समर्थकों की सक्रियता ने विवाद को हवा दी। हाईकमान ने दोनों को नियमित मीटिंग्स करने को कहा, ताकि सेशन में मजबूत दिखें। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ब्रेकफास्ट के अलावा लंच और डिनर मीटिंग्स भी होंगी। यह दूसरी बैठक एकता का प्रतीक बनी, लेकिन सीएम पद का मुद्दा अनसुलझा है। विपक्ष ने इसे कमजोरी बताया, लेकिन कांग्रेस ने एकजुटता का दावा किया। राज्य में विकास योजनाओं पर फोकस रहेगा, और हाईकमान का फैसला निर्णायक होगा। कर्नाटक की राजनीति में यह खींचतान जारी है, लेकिन बैठक ने एकता का संदेश दिया। सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच भाईचारा बना रहेगा, और राज्य के हितों को प्राथमिकता मिलेगी। विंटर सेशन में चुनौतियां होंगी, लेकिन सरकार तैयार है।

Also Read- गरीबी का तंज चलेगा सरकार को महंगा- SIR के 'वोट चोरी' जाल पर चंद्रशेखर आजाद का तीखा प्रहार, बोले 'अविश्वास की आग में जलेंगे सत्ता-सिंधु', दलित-गरीबों का दर्द संसद तक गूंजेगा।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।