Lucknow : कोडीन युक्त कफ सिरप की बिक्री जांच के बीच मामूली गलतियों के लिए छोटे दुकानदारों को मिली राहत, आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने जारी किये निर्देश
अब आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में मुख्य जांच थोक विक्रेताओं, सुपर स्टॉकिस्ट और सीएफए (कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग एजेंट) पर चल रही है। फुटकर दुकानदारों
लखनऊ। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने प्रदेश के सभी औषधि निरीक्षकों को नया निर्देश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि कोडीन युक्त कफ सिरप और नारकोटिक दवाओं के मामले में अब फुटकर दवा दुकानों (रिटेल मेडिकल स्टोर) पर छोटी-मोटी खामियां मिलने पर सख्त कार्रवाई न की जाए। इससे पहले पिछले एक महीने से पूरे प्रदेश में कोडीन वाली कफ सिरप और नशीली दवाओं की काला बाजारी रोकने के लिए विशेष अभियान चल रहा है। इस दौरान थोक और फुटकर दोनों तरह की दवा दुकानों के बड़े पैमाने पर निरीक्षण हो रहे थे। कई जगह छोटी दुकानों की खरीद-बिक्री रोक दी गई थी, लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू की गई थी और एफआईआर भी दर्ज की जा रही थी।
अब आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में मुख्य जांच थोक विक्रेताओं, सुपर स्टॉकिस्ट और सीएफए (कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग एजेंट) पर चल रही है। फुटकर दुकानदारों पर सिर्फ मामूली गलतियां मिलने पर उत्पीड़न करने वाली कार्रवाई जैसे एफआईआर दर्ज करना, बिक्री रोकना या लाइसेंस रद्द करना तुरंत बंद किया जाए। आयुक्त का कहना है कि ऐसा करने से आम छोटे दवा व्यापारियों में डर का माहौल न बने। इससे पहले 21 नवंबर को भी इसी तरह का एक पत्र जारी कर कहा गया था कि जिन रिटेल दुकानदारों ने पूरा हिसाब-किताब और बिल दिखा दिए हैं, उन्हें बार-बार परेशान न किया जाए। नया पत्र सभी जिला प्रशासन के औषधि निरीक्षकों को भेजा गया है और इसे तुरंत लागू करने को कहा गया है। छोटे दवा व्यापारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अभियान के नाम पर कई जगह जरूरत से ज्यादा सख्ती हो रही थी, जिससे आम दुकानदार परेशान थे।
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