Sambhal : जिहाद की गलत व्याख्या, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर सवाल, काले कानूनों का विरोध और बराबरी व इंसाफ की मांग- सम्भल में AIMIM जिला अध्यक्ष असद अब्दुल्ला का बड़ा बयान
असद अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट से जुड़े सवालों पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जब तक अदालतें पूरी तरह अदल और इंसाफ नहीं करेंगी, तब तक अमन कायम नहीं
Report : उवैस दानिश, सम्भल
मौहल्ला चौधरी सराय स्थित चौधरी सराय चौराहे पर ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के जिलाध्यक्ष असद अब्दुल्ला ने पत्रकार वार्ता करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। मौलाना महमूद मदनी के हालिया बयान जब-जब ज़ुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जिहाद का मूल अर्थ जद्दोजहद और संघर्ष है, लेकिन उसे गलत तरीके से दहशतगर्दी से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, इस्लाम में दहशतगर्दी की कोई जगह नहीं है। जिहाद का मतलब संघर्ष है, और इसे गलत रूप में पेश किया जा रहा है।
असद अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट से जुड़े सवालों पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जब तक अदालतें पूरी तरह अदल और इंसाफ नहीं करेंगी, तब तक अमन कायम नहीं रह सकता। उन्होंने वक्फ बोर्ड बिल और अन्य कानूनों को लेकर अदालतों में इंसाफ न मिलने का आरोप लगाया। बाबरी मस्जिद मामले का जिक्र करते हुए कहा, हमने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार किया, लेकिन भविष्य में फैसले आस्था नहीं बल्कि न्याय के आधार पर होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम रहे, यही हमारी मांग है।
असम विधानसभा में एक से अधिक शादी पर 7 साल की सजा के प्रस्तावित बिल को उन्होंने काला कानून बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कानून जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने के लिए बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, देश में सभी को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश की जा रही है। विकास की गति बढ़े और सभी के साथ इंसाफ हो, यही हमारी मांग है। पत्रकार वार्ता में उन्होंने सरकार की नीतियों और न्याय व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए और समान न्याय व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।
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