Sambhal : ईद मिलादुन्नबी पर निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी, गूंजे लब्बैक या रसूल अल्लाह के नारे, देशभक्ति और धार्मिक रंग में रंगा शहर
लोगों ने हाथों में झंडे लेकर न केवल धार्मिक भक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि देशभक्ति का संदेश भी दिया। जुलूस में जगह-जगह स्टॉल लगाए गए, जहां लोगों को प्रसाद और शरबत वितरित किया गया। इसके
Report : उवैस दानिश, सम्भल
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर शुक्रवार को जुलूस-ए-मोहम्मदी शान और शौकत के साथ निकाला गया। इस अवसर पर शहर की गलियां और चौराहे धार्मिक उत्साह और भाईचारे के रंग में सराबोर नजर आए। सुबह से ही गली-मोहल्लों में लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। जुलूस में घोड़ों पर सवार बच्चे और धार्मिक स्थलों के खूबसूरत नक्शे आकर्षण का केंद्र बने रहे। हर किसी की जबान पर लब्बैक या रसूल अल्लाह के नारों की गूंज से पूरा माहौल रसूल-ए-पाक की मोहब्बत में डूबा नजर आया।
लोगों ने हाथों में झंडे लेकर न केवल धार्मिक भक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि देशभक्ति का संदेश भी दिया। जुलूस में जगह-जगह स्टॉल लगाए गए, जहां लोगों को प्रसाद और शरबत वितरित किया गया। इसके साथ ही सामाजिक जागरूकता का संदेश भी जुलूस में देखने को मिला। जल संरक्षण के लिए जल बचाओ अभियान चलाया गया, जिसमें लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया गया। वहीं, पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जुलूस में चंदा इकट्ठा करने की विशेष पहल भी की गई, जिससे प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाई जा सके।
जुलूस चमन सराय से शुरू होकर विभिन्न इलाकों से होता हुआ आगे बढ़ा। आर्य समाज रोड स्थित मदरसा अजमल उलूम के बड़े जुलूस में कोट का जुलूस और रायसत्ती का जुलूस भी शामिल हो गया, जिससे यह और अधिक भव्य हो गया। खग्गू सराय तिराहे पर पहुंचने पर उलेमाओं ने लोगों को संबोधित किया और मोहम्मद साहब के बताए गए नक्शे कदम पर चलने की अपील की। उलेमाओं ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने हमेशा अमन, इंसाफ और भाईचारे का संदेश दिया है, इसलिए हमें उनकी शिक्षाओं को जीवन में अपनाना चाहिए।
अंजुमन तिराहे पर यह जुलूस एक विशाल जुलूस में तब्दील हो गया। यहां से दीपा सराय होते हुए जुलूस चौक की ओर बढ़ा। चौक में तबर्रुककात की जियारत कराई गई, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद एक भव्य जलसे का आयोजन किया गया, जिसमें शहर और आसपास के इलाकों से आए लोग शामिल हुए।
जलसे में वक्ताओं ने पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि समाज में नफरत नहीं बल्कि मोहब्बत और भाईचारा फैलाना ही असली इबादत है। उन्होंने यह भी कहा कि मुल्क की तरक्की और अमन-चैन के लिए सबको मिलकर काम करना चाहिए। इस मौके पर लोगों ने मुल्क में अमन और शांति कायम रहने की दुआ की।
जुलूस को देखते हुए पुलिस और प्रशासन भी सतर्क रहा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा और जुलूस का मार्ग डायवर्ट किया गया, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे। ईद मिलादुन्नबी के इस जुलूस ने शहर को पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग दिया। जुलूस में शामिल लोगों का जोश और श्रद्धा देखते ही बन रही थी। धार्मिक नारे और इबादत की गूंज ने पूरे माहौल को पाक और रूहानी बना दिया। जुलूस-ए-मोहम्मदी के साथ ही शहर में भाईचारे और अमन का संदेश भी बुलंद हुआ।
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