Hardoi: वरिष्ठ समाजसेवी एवं अधिवक्ता अरुणेश वाजपेयी का निधन, जनपद में शोक की लहर।
पत्रकारिता से जुड़े रहे वरिष्ठ सामाजिक व्यक्तित्व, साहित्यिक संस्था श्रीसरस्वती सदन के पूर्व अध्यक्ष एवं रफी अहमद किदवई इंटर कॉलेज
हरदोई। पत्रकारिता से जुड़े रहे वरिष्ठ सामाजिक व्यक्तित्व, साहित्यिक संस्था श्रीसरस्वती सदन के पूर्व अध्यक्ष एवं रफी अहमद किदवई इंटर कॉलेज के पूर्व प्रबंधक, अधिवक्ता अरुणेश वाजपेयी का आज सुबह उनके धर्मशाला स्थित आवास पर निधन हो गया। वे काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से जनपद में शोक की लहर व्याप्त है।
साण्डी मार्ग स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहाँ उनके पुत्र सुयश वाजपेयी ने मुखाग्नि दी। निधन की सूचना मिलते ही सामाजिक, साहित्यिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक जगत से जुड़े लोग उनके आवास पर पहुँचे और अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर पूर्व सांसद डॉ. अशोक वाजपेयी, विधायक माधवेन्द्र प्रताप सिंह, श्यामप्रकाश, प्रभाष कुमार, नगर पालिका परिषद हरदोई के अध्यक्ष सुखसागर मिश्र मधुर, पूर्व अध्यक्ष उमेश अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन, पूर्व जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्र, राजीव रंजन मिश्र, आध्यात्मिक गुरु डॉ. राजेन्द्रदत्त मिश्र, डॉ. सी.पी. कटियार, डॉ. अजय सिंह, वैद्य बाल शास्त्री, डॉ. बी.एस. पाण्डे, प्रधानाचार्य परिषद के जिलाध्यक्ष राजेश तिवारी, राजाबक्श सिंह, पारुल दीक्षित, सपा नेता अनिल सिंह वीरू, अखिलेश पाठक, कमलेश पाठक, प्रियम मिश्र, राजेश श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वक्ताओं ने स्वर्गीय अरुणेश वाजपेयी को न्यायप्रिय, संवेदनशील एवं समाज के लिए सदैव समर्पित व्यक्तित्व बताया। वे रफी अहमद इंटर कॉलेज के प्रबंधक के रूप में शिक्षा के प्रसार तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर सक्रिय रहे। साथ ही वरदान चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में उन्होंने सैकड़ों निर्धन कन्याओं के विवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा।
श्रीसरस्वती सदन, वरदान चैरिटेबल ट्रस्ट, आप और हम चेतना मंच सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उनके निधन को साहित्य और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया। वक्ताओं ने कहा कि जनपद ने एक सजग प्रहरी, समाजसेवी एवं मार्गदर्शक व्यक्तित्व को खो दिया है।
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