Indian Astronaut: शुभांशु शुक्ला ने ISS से शेयर किया मजेदार वीडियो: स्पेस में तैरना वास्तव में हमेशा गिरना ही है।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से एक रोचक और मजेदार वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में वे कैमरे का लेंस बदलते हुए दिख रहे हैं और
भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से एक रोचक और मजेदार वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में वे कैमरे का लेंस बदलते हुए दिख रहे हैं और बताते हैं कि स्पेस में कोई भी चीज हवा में तैरती रहती है। शुक्ला ने न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम को सरल तरीके से समझाया है। उन्होंने लिखा कि मान लीजिए या न मानिए, इस फ्रेम में जो कुछ भी आप देख रहे हैं, वह गिर रहा है। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि स्पेस में तैरना वास्तव में गिरना ही है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और लोगों ने इसे सराहा है। यह भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक झलक भी देता है।
शुक्ला का यह वीडियो 23 सितंबर 2025 को एक्स पर शेयर किया गया। वे भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री हैं जो एक्सिओम-4 मिशन के तहत जुलाई 2025 में ISS पहुंचे थे। मिशन के दौरान उन्होंने 20 दिनों तक स्पेस में समय बिताया। वीडियो में शुक्ला एक कैमरे का लेंस बदल रहे हैं। जैसे ही वे पुराना लेंस छोड़ते हैं, वह हवा में तैरने लगता है। फिर वे नया लेंस लगाते हैं और कैमरा भी तैरता हुआ दिखता है। दो कैमरे उनके चारों ओर तैर रहे हैं। शुक्ला मुस्कुराते हुए कहते हैं कि शुरुआत में उन्हें डर लगता था कि चीजें गिर जाएंगी। लेकिन स्पेस में सब कुछ साथ-साथ गिरता है।
शुक्ला ने कैप्शन में लिखा कि जब वे पहली बार ISS पहुंचे, तो उन्हें अजीब सी झिझक हुई। वे सोचते थे कि अगर कुछ छोड़ दिया तो वह गिर जाएगा। पृथ्वी पर तो ऐसा ही होता है। लेकिन स्पेस में वे चीजों को सावधानी से साथियों को सौंपते थे। वीडियो में वे बताते हैं कि गुरुत्वाकर्षण यहां भी मौजूद है। ISS पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के सतह पर के 90 प्रतिशत के बराबर है। लेकिन हम वजनहीन महसूस करते हैं क्योंकि हम और हमारे आसपास की सब चीजें पृथ्वी के चारों ओर एक ही गति से गिर रही हैं। इसलिए कोई चीज नीचे नहीं गिरती। तैरना बस हमेशा गिरना है।
यह वीडियो न्यूटन के सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण नियम को याद दिलाता है। न्यूटन ने कहा था कि हर चीज एक-दूसरे की ओर आकर्षित होती है। स्पेस में कक्षा में चक्कर लगाना एक सतत मुक्त पतन है। ISS पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर है। वहां की गति इतनी तेज है कि गुरुत्वाकर्षण के बावजूद वह गिरते हुए भी पृथ्वी के चारों ओर घूमती रहती है। शुक्ला का यह प्रयोग सरल लेकिन प्रभावी है। उन्होंने लिखा कि यह समझना कि कक्षा में घूमना बस हमेशा गिरना है, स्पेस को विज्ञान से जादू बना देता है। न्यूटन को गर्व होगा।
शुक्ला का यह वीडियो एक्स पर तेजी से वायरल हो गया। हजारों लोगों ने इसे लाइक और शेयर किया। एक यूजर ने लिखा कि दिमाग हिला देने वाला। स्पेस में तैरना जादू नहीं, बल्कि सतत मुक्त पतन है। सब कुछ साथ गिरता है, इसलिए वजनहीन लगता है। न्यूटन गर्व महसूस करेंगे। दूसरे यूजर ने कहा कि लेंस तैरता देखना रोमांचक था। तीसरे ने लिखा कि यह स्पेस को विज्ञान से जादू में बदल देता है। कई लोगों ने शुक्ला की सरल व्याख्या की तारीफ की। वे बोले कि स्कूल के बच्चों को दिखाओ, विज्ञान मजेदार लगेगा। वीडियो को न्यूज चैनलों ने भी कवर किया।
शुभांशु शुक्ला का सफर प्रेरणादायक है। वे लखनऊ के रहने वाले हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे। पिता शंभू दयाल शुक्ला रिटायर्ड सरकारी अधिकारी हैं। मां आशा शुक्ला गृहिणी। शुक्ला ने स्कूल की पढ़ाई लखनऊ से की। फिर भारतीय वायुसेना में शामिल हुए। वे ग्रुप कैप्टन और टेस्ट पायलट हैं। 2019 में ISRO ने उन्हें गगनयान मिशन के लिए चुना। 2020 में रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर भेजा गया। वहां एक साल की ट्रेनिंग ली। 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें गगनयान के चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक घोषित किया।
एक्सिओम-4 मिशन जुलाई 2025 में शुरू हुआ। स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से शुक्ला ISS पहुंचे। कमांडर पेगी व्हिटसन के नेतृत्व में चार सदस्यों का दल था। मिशन के दौरान 60 से ज्यादा प्रयोग किए गए। 31 देशों के वैज्ञानिक शामिल थे। भारत के सात प्रयोग ISRO के नेतृत्व में हुए। शुक्ला ने पानी के बुलबुले से सतह तनाव का प्रदर्शन किया। वे मजाक में कहते हैं कि मैं स्टेशन में वॉटरबेंडर बन गया। प्लास्टिक बैग को बुलबुले में दबाकर दिखाया कि सतह तनाव चुंबक की तरह काम करता है। मिशन 20 दिनों का था। अगस्त 2025 में शुक्ला पृथ्वी पर लौटे। कैप्सूल प्रशांत महासागर में उतरा।
शुक्ला की पत्नी कमना मिश्रा दंत चिकित्सक हैं। वे स्कूल के साथी थे। शुक्ला ने कहा कि उनका सफर ISS तक नहीं, बल्कि भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत है। सभी को इसमें शामिल होना चाहिए। छाती फुलाकर गर्व महसूस करें। भारत का मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। गगनयान 2025 में लॉन्च होगा। शुक्ला उसका हिस्सा होंगे। ISRO ने व्योममित्र रोबोट को पहले भेजा। अब मानव उड़ान की तैयारी है। शुक्ला का अनुभव गगनयान के लिए उपयोगी होगा।
यह वीडियो विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में मदद करता है। स्पेस में जीवन कठिन है। शुक्ला ने एक अन्य वीडियो में बताया कि स्थिर रहना चुनौती है। माइक्रोग्रैविटी में छोटी गति से शरीर हिल जाता है। वे अभ्यास करते दिखे। लेकिन असफल रहे। वे बोले कि गुरुत्वाकर्षण के बिना या साथ, स्थिर रहना मुश्किल है। मिशन के दौरान वे व्यस्त रहे। प्रयोग, टास्क और स्टेशन सीखना। लेकिन अब वे अनुभव शेयर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनका अकाउंट @gagan_shux है। 18 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
भारत में शुक्ला की वापसी पर स्वागत हुआ। वे राष्ट्रीय नायक हैं। दूसरा भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के बाद। 1984 में शर्मा सोवियत मिशन पर गए। शुक्ला का मिशन निजी था। एक्सिओम स्पेस ने आयोजित किया। लागत पर सवाल उठे। लेकिन ISRO ने कहा कि ट्रेनिंग और सहयोग से फायदा। व्यावसायिक अंतरिक्ष उड़ान में भारत की मौजूदगी बढ़ी। शुक्ला ने कहा कि जय हिंद, जय भारत।
यह वीडियो युवाओं को प्रेरित कर रहा है। स्कूलों में दिखाया जा रहा। विज्ञान शिक्षक बोले कि यह गुरुत्वाकर्षण को समझाने का बेहतरीन तरीका। स्पेस में पानी का बुलबुला, लेंस तैरना सब जादू जैसा। लेकिन विज्ञान है। ISRO ने शुक्ला के वीडियो को रीट्वीट किया। बोले कि स्पेस से विज्ञान की झलक। भविष्य में और मिशन होंगे। गगनयान से भारत स्वतंत्र मानव उड़ान करेगा।
सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी। कुछ बोले कि स्पेस महंगा है। लेकिन फायदे ज्यादा। तकनीक विकसित होती है। स्वास्थ्य, कृषि में प्रयोग। शुक्ला का वीडियो साबित करता है कि स्पेस सिर्फ वैज्ञानिकों का नहीं, सबका है। सरल भाषा में समझाएं। बच्चे उत्साहित हैं। एक बच्चे ने लिखा कि मैं भी स्पेस जाना चाहता हूं। शुक्ला ने रिप्लाई किया कि पढ़ाई जारी रखो। सपने पूरे होंगे।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने स्पेस का अपना एक मजेदार वीडियो शेयर किया है
◆ वीडियो में शुभांशु कैमरे का लेंस बदलते हुए दिख रहे हैं और बता रहे हैं कि स्पेस में किसी भी चीज को आप हवा में तैरता हुआ छोड़ सकते हैं
◆ उन्होंने लिखा कि मानों न मानों- इस फ्रेम में आप जो कुछ… pic.twitter.com/a5Rw51bOmC — News24 (@news24tvchannel) September 24, 2025
What's Your Reaction?









