आगरा में ई-चालान से बचने के लिए नंबर प्लेटों के साथ अनोखी धोखाधड़ी: सीमेंट, टेप और नंबर मोड़ने के शातिराना खेल का हुआ खुलासा।

आगरा के प्रमुख चौराहों जैसे भगवान टॉकीज, एमजी रोड, खंदारी और सुल्तानगंज की पुलिया पर लगे इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के

Mar 31, 2026 - 15:42
Mar 31, 2026 - 15:42
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आगरा में ई-चालान से बचने के लिए नंबर प्लेटों के साथ अनोखी धोखाधड़ी: सीमेंट, टेप और नंबर मोड़ने के शातिराना खेल का हुआ खुलासा।
आगरा में ई-चालान से बचने के लिए नंबर प्लेटों के साथ अनोखी धोखाधड़ी: सीमेंट, टेप और नंबर मोड़ने के शातिराना खेल का हुआ खुलासा।
  • ताजनगरी की सड़कों पर दौड़ रहे 'अदृश्य' वाहन: चालान से बचने के लिए नंबर प्लेट पर कालिख और कीचड़ मलने वालों के खिलाफ पुलिस का बड़ा अभियान
  • स्मार्ट कैमरों को चकमा देने की नाकाम कोशिश: आगरा ट्रैफिक पुलिस ने पकड़े ऐसे सैकड़ों वाहन जिनकी नंबर प्लेट के साथ की गई थी छेड़छाड़

आगरा के प्रमुख चौराहों जैसे भगवान टॉकीज, एमजी रोड, खंदारी और सुल्तानगंज की पुलिया पर लगे इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के कैमरे यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पैनी नजर रखते हैं। इन कैमरों की सटीकता से घबराकर वाहन चालकों ने अब नंबर प्लेट को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया है। शहर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ दुपहिया वाहन चालकों ने अपनी नंबर प्लेट के अंतिम दो अंकों को पीछे की ओर मोड़ दिया है या उन पर काला टेप चिपका दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि जब कैमरा वाहन की तस्वीर खींचे, तो पूरी नंबर प्लेट स्पष्ट न आए और सिस्टम चालान जनरेट न कर सके। यह न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि एक गंभीर आपराधिक कृत्य भी है जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है।

धोखाधड़ी का यह सिलसिला यहीं नहीं थमता, बल्कि आगरा में कुछ वाहन चालक इससे भी एक कदम आगे निकल गए हैं। चेकिंग के दौरान पुलिस ने ऐसे कई चार पहिया और दो पहिया वाहन पकड़े हैं जिनकी नंबर प्लेट पर सीमेंट या गीली मिट्टी चिपकाई गई थी। देखने में यह सड़क की गंदगी जैसा प्रतीत होता है, लेकिन गौर से देखने पर पता चलता है कि इसे जानबूझकर केवल नंबरों को छिपाने के लिए लगाया गया है। कुछ मामलों में तो नंबरों को खुरच दिया गया है या उन पर सफेद पेंट फेर दिया गया है ताकि रात के समय रिफ्लेक्टर काम न करें और कैमरे की फ्लैश लाइट में नंबर चमकने के बजाय धुंधले हो जाएं। प्रशासन के लिए यह चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि ऐसे वाहनों का उपयोग अक्सर आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के लिए भी किया जा सकता है।

आगरा ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में ऐसे 500 से अधिक वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है जिनकी नंबर प्लेट से छेड़छाड़ की गई थी। पुलिस का कहना है कि जब कोई वाहन चालक हेलमेट नहीं पहनता या रेड लाइट जंप करता है, तो उसे पता होता है कि कैमरा उसका चालान काटेगा। इसी आर्थिक दंड से बचने के लिए वे नंबर प्लेट को खराब करने का जोखिम उठाते हैं। हालांकि, अब पुलिस ने 'मैनुअल चेकिंग' को तेज कर दिया है। चौराहों पर खड़े ट्रैफिक पुलिसकर्मी अब केवल कागजात ही नहीं देख रहे, बल्कि दूर से आ रहे वाहनों की नंबर प्लेट की स्थिति का भी बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं। यदि किसी की नंबर प्लेट मुड़ी हुई या छिपी हुई पाई जाती है, तो उसे मौके पर ही भारी जुर्माने के साथ वाहन सीज करने की चेतावनी दी जा रही है।

नंबर प्लेट के साथ की जा रही इस छेड़छाड़ के पीछे हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) के सख्त नियमों का भी हाथ है। पहले पुरानी प्लेटों पर नंबर लिखना या बदलना आसान था, लेकिन एचएसआरपी के आने के बाद अब नंबरों के साथ छेड़छाड़ करना मुश्किल हो गया है। इसी कारण लोग बाहरी तौर पर उन पर टेप, सीमेंट या कालिख का सहारा ले रहे हैं। कुछ वाहन चालकों ने तो नंबर प्लेट के ऊपर 'प्रेस', 'पुलिस' या किसी राजनीतिक दल का स्टीकर इस तरह चिपकाया है कि नंबर का कुछ हिस्सा ढक जाए। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से युवाओं में अधिक देखी जा रही है जो स्टंट बाजी के दौरान अपनी पहचान छिपाना चाहते हैं। प्रशासन अब ऐसे स्टीकर बेचने वाली दुकानों और नंबर प्लेट बनाने वालों पर भी नजर रख रहा है।

क्या कहता है कानून?

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 51 और 177 के तहत नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ करना या उसे छिपाना एक दंडनीय अपराध है। इसके लिए 5,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि यह सिद्ध हो जाता है कि नंबर प्लेट जानबूझकर किसी अपराध को छिपाने के लिए बदली गई है, तो वाहन स्वामी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं (IPC/BNS) के तहत प्राथमिकी भी दर्ज की जा सकती है।

आगरा पुलिस ने अब इस समस्या से निपटने के लिए तकनीक का ही सहारा लिया है। स्मार्ट सिटी के कैमरों के सॉफ्टवेयर को अपडेट किया जा रहा है ताकि वे आंशिक रूप से छिपे हुए नंबरों की भी पहचान कर सकें। 'पैटर्न रिकॉग्निशन' तकनीक के माध्यम से अब वाहन के मॉडल, रंग और नंबर के शुरुआती अंकों के आधार पर संदिग्ध वाहनों की सूची तैयार की जा रही है। इसके अलावा, पुलिस ने एक विशेष 'इंटरसेप्टर' टीम का गठन किया है जो शहर के उन हिस्सों में गश्त करती है जहाँ ई-चालान का डर अधिक है। पुलिस का मानना है कि नंबर प्लेट छिपाने वाले लोग न केवल नियमों को तोड़ रहे हैं, बल्कि वे सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा हैं क्योंकि ऐसी गाड़ियां किसी भी बड़ी घटना के बाद पहचान में नहीं आतीं। वाहनों की नंबर प्लेट के साथ इस तरह के प्रयोगों ने समाज में घटती कानून के प्रति श्रद्धा को भी दर्शाया है। चालान के डर से बचने के लिए सुरक्षा मानकों की बलि देना आत्मघाती कदम है। ताजनगरी में बढ़ते हादसों के पीछे एक कारण यह भी है कि नियम तोड़ने वाले लोग सोचते हैं कि वे कैमरों को चकमा देकर बच जाएंगे, जिससे उनमें बेखौफ ड्राइविंग की प्रवृत्ति बढ़ती है। यातायात विभाग ने अब जागरूकता अभियान भी शुरू किया है, जिसमें यह बताया जा रहा है कि नंबर प्लेट को साफ और स्पष्ट रखना क्यों जरूरी है। साथ ही, पेट्रोल पंपों और पार्किंग स्थलों पर भी सीसीटीवी कैमरों की मदद से ऐसे वाहनों की पहचान की जा रही है जो संदिग्ध नंबर प्लेट के साथ घूम रहे हैं।

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