गायत्री मंत्र के जप से मनुज में देवत्व स्थापित होता है- पंडित छबीलदास मिश्रा
रामकथा में रामचरित मानस के बालकांड में दिए गए यज्ञ एवं उसके प्रभाव की जानकारी दी गई। गीता का उदाहरण देते हुए बताया यज्ञ से बड़ा श्रेष्ठ कर्म और कुछ नहीं होता है।
Hardoi News INA.
गायत्री मंत्र के जप से मनुज में देवत्व स्थापित होता है। इसमें 24 अक्षर हैं, जो देव शक्तियों से सन्निहित है। ऋषि परंपरा के आधार पर ऋषि, महात्मा, गायत्री मंत्र का जाप कर सूर्य का ध्यान करते थे। पंडित श्री राम शर्मा आचार्य ने 24-24 लाख गायत्री महामंत्र के 24 महापुरश्चरण कर गायत्री मंत्र सिद्ध कर पूरे विश्व में जन जन तक पहुंचाया। उनके मानव में देवत्व और धरती पर स्वर्ग जैसा वातावरण बनाने के संकल्प को सिद्ध करने के लिए व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण का कार्य चल रहा है। गायत्री मंत्र का यह वर्णन आवास विकास कालोनी के बड़ा पार्क में आयोजित कार्यक्रम में गायत्री तपोवन से पधारे पंडित छबीलदास मिश्रा ने किया। इससे पूर्व देवों के आह्वान एवं अपार जनसमूह की उपस्थिति में महामृत्युंजय गायत्री महायज्ञ एवं पावन श्री राम कथा का शुभारंभ किया गया। रामकथा में रामचरित मानस के बालकांड में दिए गए यज्ञ एवं उसके प्रभाव की जानकारी दी गई। गीता का उदाहरण देते हुए बताया यज्ञ से बड़ा श्रेष्ठ कर्म और कुछ नहीं होता है। आचार्यों ने उपस्थित जन मानस से प्रति दिन घर घर यज्ञ और हवन करने एवं अभियान की कड़ी बनने की अपील की।
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