आगरा का परिवार कैमरून में फंसा: कंपनी ने पासपोर्ट जब्त कर लूट के झूठे आरोप लगाए, वायरल वीडियो में सरकार से वतन वापसी की मांगी मदद।
उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के दयालबाग इलाके से जुड़े एक परिवार की दर्दभरी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। धीरज जैन, उनकी पत्नी सुप्रिया जैन
उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के दयालबाग इलाके से जुड़े एक परिवार की दर्दभरी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। धीरज जैन, उनकी पत्नी सुप्रिया जैन और डेढ़ साल की बेटी राघवी मध्य अफ्रीका के कैमरून देश के डौआला शहर में फंस चुके हैं। धीरज का आरोप है कि उनकी भारतीय कंपनी ने उन पर 25 लाख रुपये की लूट का झूठा इल्जाम लगाकर उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया है। कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद कंपनी न तो सैलरी दे रही है, न ही घर लौटने दे रही है। परिवार के पास अब इतने पैसे भी नहीं बचे कि बेटी का दूध और दवा खरीद सकें। वायरल वीडियो में रोते हुए सुप्रिया ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द मदद न मिली, तो परिवार की जान को खतरा हो सकता है। आगरा में धीरज के रिश्तेदारों को खोजा जा रहा है, लेकिन उनका सटीक पता अब तक नहीं मिल सका। यह घटना प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है।
धीरज जैन मूल रूप से आगरा के दयालबाग क्षेत्र के बसरा वसंत रेजिडेंसी के रहने वाले हैं। वे पुणे की सदगुरु टूर एंड ट्रेवल्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में एकाउंट एंड फाइनेंस मैनेजर के पद पर काम करते थे। कंपनी का ऑफिस वेस्ट अफ्रीका के डौआला में है, जहां धीरज की पोस्टिंग थी। वे 2012 से कंपनी में जुड़े हुए थे और परिवार के साथ ही वहां रहते थे। धीरज ने बताया कि 7 सितंबर 2024 को वे कंपनी के 25 लाख रुपये लेकर ड्राइवर के साथ कार से ऑफिस जा रहे थे। रास्ते में अज्ञात लोगों ने उन्हें लूट लिया। धीरज और ड्राइवर ने तुरंत स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच शुरू हुई, लेकिन नवंबर 2024 में धीरज दो महीने की छुट्टी लेकर आगरा लौट आए। जनवरी 2025 में जब वे वापस ड्यूटी पर लौटे, तो स्थिति उलट गई। ड्राइवर ने अपना बयान बदल दिया और कंपनी ने धीरज पर ही लूट का आरोप लगा दिया। कंपनी का दावा है कि धीरज ने ही पैसे गबन किए। इसके बाद उनका कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर दिया गया और पासपोर्ट जब्त कर लिया गया।
परिवार की हालत अब नाजुक बता रहे हैं। धीरज ने वीडियो में कहा कि कंपनी ने सैलरी रोक दी है और मकान खाली करने का दबाव डाल रही है। स्थानीय पुलिस भी कंपनी के कहने पर बार-बार घर आ रही है और धमकी दे रही है। सुप्रिया वीडियो में रोते हुए कहती हैं कि बेटी बीमार है, लेकिन दवा के पैसे नहीं हैं। खाने-पीने की चीजें भी खत्म हो चुकी हैं। वे कहती हैं कि हम भारत लौटना चाहते हैं, लेकिन बिना पासपोर्ट के यह संभव नहीं। धीरज ने भारतीय दूतावास में भी शिकायत की, लेकिन वहां से कोई ठोस मदद नहीं मिली। वीडियो 20 नवंबर 2025 को सोशल मीडिया पर अपलोड हुआ और देखते ही देखते लाखों बार देखा गया। ट्विटर पर #SaveDheerajFamily और #IndianInCameroon जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। लोग सरकार से अपील कर रहे हैं कि परिवार को जल्द सुरक्षित वापस लाया जाए।
आगरा में धीरज के रिश्तेदारों की तलाश तेज हो गई है। दयालबाग पुलिस और स्थानीय पत्रकार उनके बसरा वसंत रेजिडेंसी के पते पर पहुंचे, लेकिन परिवार के सदस्यों से संपर्क नहीं हो सका। एक पड़ोसी ने बताया कि धीरज का परिवार कई महीनों से संपर्क में नहीं है। वे छुट्टी पर आए थे, लेकिन वापस चले गए। अब वीडियो देखकर सब हैरान हैं। आगरा के एसएसपी ने कहा कि मामला विदेश मंत्रालय को भेजा गया है। हम स्थानीय स्तर पर रिश्तेदारों से बात करने की कोशिश कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि मामला संज्ञान में है। हम भारतीय दूतावास याऊंडे के माध्यम से जांच कर रहे हैं। अगर आरोप सही पाए गए, तो कूटनीतिक मदद की जाएगी। लेकिन फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
यह घटना विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की मुश्किलों को सामने ला रही है। कैमरून जैसे देशों में भारतीय कंपनियां टूरिज्म और ट्रेवल सेक्टर में सक्रिय हैं, लेकिन श्रमिकों के शोषण के आरोप लगते रहते हैं। धीरज का केस पासपोर्ट जब्ती और झूठे मुकदमों का उदाहरण है। विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रवासी मजदूरों को विदेश जाने से पहले कंपनी की सत्यापन जरूरी है। भारतीय दूतावासों को ऐसे मामलों में तेज कार्रवाई करनी चाहिए। एक एनआरआई संगठन ने कहा कि हर साल सैकड़ों भारतीय अफ्रीका में फंसते हैं। सरकार को हेल्पलाइन मजबूत करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करने वालों ने कहा कि यह चेतावनी है कि विदेशी नौकरियों में सावधानी बरतें।
परिवार की दशा बयां करने वाला वीडियो दिल दहला देने वाला है। धीरज कहते हैं कि हम निर्दोष हैं। लूट की घटना में हम शिकार बने, लेकिन कंपनी ने हमें ही दोषी ठहरा दिया। सुप्रिया की आंखों में आंसू और बेटी के रोने की आवाज सुनकर कोई भी भावुक हो जाए। वे कहते हैं कि भारत लौटकर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं। आगरा के लोग भी साथ खड़े हो गए हैं। स्थानीय एनएसएस वॉलंटियर्स ने दूतावास के बाहर धरना देने की योजना बनाई है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि यह मानवाधिकार का मामला है। संयुक्त राष्ट्र को भी सूचित किया जाना चाहिए। फिलहाल, वीडियो के वायरल होने से दबाव बढ़ा है। सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
धीरज का सफर सामान्य था। आगरा से पढ़ाई पूरी कर वे पुणे चले गए और कंपनी में नौकरी पा ली। अफ्रीका में पोस्टिंग मिली तो परिवार खुश था। लेकिन लूट की घटना ने सब उलट दिया। पुलिस रिपोर्ट में धीरज का नाम गवाह था, लेकिन ड्राइवर के बयान बदलने से मामला पलट गया। कंपनी ने कोर्ट में केस दायर कर दिया। अब वे किराए के मकान में रह रहे हैं, लेकिन बकाया किराया भी नहीं चुका पा रहे। पड़ोसी मदद कर रहे हैं, लेकिन कितने दिन चलेगा। सुप्रिया ने कहा कि बेटी को डॉक्टर की जरूरत है, लेकिन पैसे की तंगी से कुछ नहीं हो रहा। धीरज ने अपील की कि कम से कम इमरजेंसी वीजा पर हमें वापस आने दें।
यह कहानी प्रवासी जीवन की कठिनाइयों को दिखाती है। अफ्रीका में भारतीय समुदाय बड़ा है, लेकिन सुरक्षा की कमी है। दूतावास की भूमिका महत्वपूर्ण है। एक पूर्व राजनयिक ने कहा कि ऐसे मामलों में एम्पैट्रिएशन प्रक्रिया अपनाई जाती है। लेकिन देरी से हालात बिगड़ जाते हैं। सोशल मीडिया ने आवाज बुलंद की है। वीडियो पर 50 हजार से ज्यादा व्यूज हो चुके हैं। लोग शेयर कर रहे हैं और टैग कर रहे हैं। आगरा के सांसद ने भी ट्वीट किया कि मामला उठाएंगे। उम्मीद है कि जल्द समाधान निकले। परिवार की प्रार्थना है कि बेटी का बचपन सुरक्षित हो। यह घटना सबको सोचने पर मजबूर कर रही है कि विदेशी सपनों के पीछे सावधानी जरूरी है।
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